Operation Sindoor: 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान वीरगति प्राप्त करने वाले सैनिकों के नाम सार्वजनिक किए जाने और उन्हें नेशनल वॉर मेमोरियल पर अंकित करने को लेकर नया विवाद सामने आया है. विपक्ष की ओर से आरोप लगाए गए कि शहीद जवानों की जानकारी सार्वजनिक करने में देरी की गई. इन आरोपों के बाद रक्षा मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी कर स्थिति स्पष्ट की है. मंत्रालय का कहना है कि शहीद सैनिकों के सम्मान और उनके बलिदान को मान्यता देने में किसी प्रकार की देरी नहीं की गई और उन्हें पहले ही राष्ट्रीय स्तर पर श्रद्धांजलि दी जा चुकी है.
Media reports that the supreme sacrifice of six bravehearts during #OperationSindoor have been acknowledged or brought to public notice for the first time only recently are incorrect. The nation paid homage to these fallen heroes at the earliest opportunity, well before the…
— Ministry of Defence, Government of India (@SpokespersonMoD) June 27, 2026
रक्षा मंत्रालय ने क्या कहा?
रक्षा मंत्रालय ने जारी बयान में कहा कि मीडिया और सोशल मीडिया पर कुछ खबरों में यह दावा किया जा रहा है कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान शहीद हुए छह सैनिकों के बलिदान को पहली बार हाल ही में सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया गया है, जबकि यह दावा तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है. मंत्रालय के अनुसार, इन सैनिकों को उनके सर्वोच्च बलिदान के तुरंत बाद उपलब्ध अवसरों पर श्रद्धांजलि दी गई थी और उनकी वीरता को आधिकारिक रूप से मान्यता भी प्रदान की गई थी.
पहले भी दी गई थी श्रद्धांजलि
रक्षा मंत्रालय ने बताया कि 11 मई 2025 को आयोजित एक आधिकारिक प्रेस ब्रीफिंग में तत्कालीन सैन्य अभियान महानिदेशक (DGMO) ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की थी. इसके बाद 14 अगस्त 2025 को जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में इन सैनिकों को प्रदान किए गए वीरता पुरस्कारों की जानकारी भी साझा की गई थी. मंत्रालय ने यह भी कहा कि भारतीय सेना के आधिकारिक सोशल मीडिया मंचों पर भी समय रहते शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई थी.
वीरता पुरस्कारों से भी किया गया सम्मानित
बयान के मुताबिक, 15 जनवरी 2026 को जयपुर में आयोजित सेना दिवस समारोह के दौरान सेना प्रमुख ने तीन शहीद सैनिकों के परिजनों को सेना मेडल (वीरता) प्रदान किए. वहीं भारतीय वायुसेना प्रमुख ने भी 8 अक्टूबर 2025 को आयोजित एक कार्यक्रम में संबंधित शहीदों के परिवारों को सम्मानित किया था. मंत्रालय का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया भारतीय सशस्त्र बलों की परंपराओं के अनुरूप अपनाई गई.
वॉर मेमोरियल पर नाम दर्ज करने की तय प्रक्रिया
रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर शहीद सैनिकों के नाम अंकित करने की एक निर्धारित और औपचारिक प्रक्रिया होती है. ऐसे में यह कहना कि निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया, सही नहीं है. मंत्रालय ने कहा कि हर शहीद सैनिक का सम्मान पूरी प्रक्रिया और नियमों के तहत किया जाता है.
अफवाहों से बचने की अपील
रक्षा मंत्रालय ने इस पूरे विवाद को अनावश्यक बताते हुए कहा कि बिना पुष्टि के प्रसारित की जा रही खबरें न केवल तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत करती हैं, बल्कि शहीदों के परिवारों की भावनाओं को भी आहत कर सकती हैं. मंत्रालय ने मीडिया और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं से अपील की कि शहीद सैनिकों से जुड़े मामलों में जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ तथ्यात्मक जानकारी ही साझा करें.
विपक्ष ने लगाए थे आरोप
इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान शहीद हुए छह सैनिकों की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई और इस मुद्दे पर संसद को भी पूरी जानकारी नहीं दी गई. इन आरोपों के बाद रक्षा मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी कर अपना पक्ष रखा और कहा कि शहीदों के सम्मान से जुड़ी सभी प्रक्रियाएं समय पर और नियमानुसार पूरी की गई थीं.
ये भी पढ़ें- 'भासेशेल्स का एक पक्का दोस्त'; PM मोदी ने द्विपक्षीय संबंधों को सराहा, बोले- हमारा सबसे भरोसेमंद समुद्री साझेदार