Trump Strait of Hormuz: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर एक बार फिर कड़ा बयान दिया है. 12 अगस्त 2026 को सोशल मीडिया पर किए एक पोस्ट में ट्रंप ने दावा किया कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिका का पूरा नियंत्रण है. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका इसे अपने नियंत्रण में बनाए रखने पर विचार कर रहा है.
ट्रंप ने अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को ‘स्टील की दीवार’ बताया. उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बना हुआ है.
दुनिया के लिए क्यों अहम है हॉर्मुज?
हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है. इसी रास्ते से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और दूसरे ऊर्जा उत्पाद दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचते हैं. अगर इस रास्ते पर सैन्य तनाव बढ़ता है या जहाजों की आवाजाही में बड़ी रुकावट आती है तो इसका असर दुनिया भर के तेल बाजार पर पड़ सकता है. इससे तेल की कीमतों में तेजी आने का खतरा भी रहता है.
ट्रंप ने ईरान की सैन्य ताकत पर उठाए सवाल
ट्रंप ने अपने पोस्ट में ईरान की सैन्य और आर्थिक स्थिति पर भी तीखी टिप्पणी की. उन्होंने दावा किया कि ईरान के पास अब पहले जैसी प्रभावी नौसेना और वायुसेना नहीं बची है. ट्रंप ने यह भी आरोप लगाया कि ईरान के कुछ सैनिकों को वेतन नहीं मिल रहा है और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी को भारी नुकसान हुआ है. उन्होंने ईरान के नेतृत्व पर भी सवाल उठाए.
ईरान की आर्थिक स्थिति पर भी निशाना
अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान की आर्थिक स्थिति को लेकर भी कई दावे किए. उन्होंने कहा कि देश के पास पैसे की कमी है और उसकी आर्थिक स्थिति लगातार खराब हो रही है. ट्रंप ने ईरान में महंगाई का जिक्र करते हुए वहां की सरकार पर निशाना साधा.
उन्होंने कहा कि ईरान अब पहले की तरह मध्य-पूर्व में अपनी ताकत नहीं दिखा सकता और केवल बयानबाजी तक सीमित रह गया है. हालांकि, ट्रंप के इन दावों को उनके राजनीतिक बयान के तौर पर देखा जा रहा है और ईरान की सैन्य तथा आर्थिक स्थिति को लेकर स्वतंत्र पुष्टि अलग-अलग हो सकती है.
हॉर्मुज में स्थिति अभी भी जटिल
हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर स्थिति पूरी तरह एकतरफा नहीं है. अमेरिकी नौसैनिक मौजूदगी के बावजूद कई कारोबारी जहाज इस रास्ते से गुजरने को लेकर सावधानी बरत रहे हैं. कुछ जहाज ईरान के नियंत्रण वाले रास्तों का इस्तेमाल कर रहे हैं.
इससे साफ है कि क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और जहाजों की आवाजाही को लेकर अभी भी काफी अनिश्चितता बनी हुई है. अगर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव आगे बढ़ता है तो इसका असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रहेगा. हॉर्मुज से होने वाले ऊर्जा परिवहन के कारण पूरी दुनिया के तेल और ऊर्जा बाजार पर इसका असर पड़ सकता है.
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