टोल टैक्स व आबकारी नीति को मंजूरी, 1066 पदों पर होगी भर्ती; पढ़ें हिमाचल कैबिनेट के अहम फैसले

Himachal Cabinet Decisions: हिमाचल प्रदेश की सियासत और प्रशासनिक दिशा को तय करने वाली अहम कैबिनेट बैठक में इस बार फैसलों की झड़ी देखने को मिली.

Himachal Pradesh Cabinet meeting Decisions Approval to fill 1066 posts
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Himachal Cabinet Decisions: हिमाचल प्रदेश की सियासत और प्रशासनिक दिशा को तय करने वाली अहम कैबिनेट बैठक में इस बार फैसलों की झड़ी देखने को मिली. मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिमंडल की बैठक केवल औपचारिक चर्चा तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें विकास, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर ठोस निर्णय लिए गए. सरकार ने साफ संकेत दिया है कि संसाधनों की चुनौतियों के बावजूद विकास की रफ्तार थमने नहीं दी जाएगी.

1066 पदों को मंजूरी

मंत्रिमंडल ने विभिन्न विभागों में 1066 पदों के सृजन और उन्हें भरने को मंजूरी दी है. सरकार का कहना है कि आरडीजी बंद होने से राज्य को आर्थिक झटका जरूर लगा है, लेकिन विकास कार्य बाधित नहीं होंगे. मंत्री हर्षवर्धन चौहान और रोहित ठाकुर ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में राज्य ने लगभग साढ़े तीन हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व अर्जित किया है और आगे भी संसाधन जुटाए जाएंगे.

सरकार ने स्पष्ट किया कि कर्मचारियों का महंगाई भत्ता और एरियर फ्रीज नहीं किया गया है. साथ ही पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) को बंद करने का कोई निर्णय नहीं है. हिमकेयर, सहारा और एमआईएस जैसी जनकल्याणकारी योजनाएं भी जारी रहेंगी. महिला होमगार्ड को 26 सप्ताह का मातृत्व अवकाश देने का फैसला सामाजिक संवेदनशीलता को दर्शाता है.

बजट सत्र और नई वित्तीय दिशा

मंत्रिमंडल ने विधानसभा के आगामी बजट सत्र के दौरान राज्यपाल के अभिभाषण को मंजूरी दी. बजट मार्च में पेश किया जाएगा, जबकि पहला सत्र 16 से 18 फरवरी तक आयोजित होगा. संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि आरडीजी बंद होने के बाद नए वित्तीय ढांचे को तैयार करने में समय लग रहा है, लेकिन सरकार संतुलित और यथार्थवादी बजट लाने के लिए प्रतिबद्ध है.

शिक्षा और आबकारी नीति में अहम फैसले

कैबिनेट ने टोल टैक्स बैरियर और आबकारी नीति 2026-27 को मंजूरी दी. इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना में संशोधन करते हुए विधवाओं की बेटियों को व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए राज्य के भीतर और बाहर सरकारी संस्थानों में वित्तीय सहायता देने का निर्णय लिया गया है. यदि छात्रावास उपलब्ध नहीं होगा तो उन्हें तीन हजार रुपये प्रतिमाह किराया सहायता भी दी जाएगी.

सीबीएसई स्कूलों के लिए 600 शिक्षकों के पद सृजित किए गए हैं, जिनमें संस्कृत, शारीरिक शिक्षा, संगीत और ड्राइंग के 150-150 पद शामिल हैं. इनकी भर्ती राज्य चयन आयोग के माध्यम से होगी. इसके अतिरिक्त 31 बालक और बालिका विद्यालयों को सह-शिक्षा विद्यालयों में परिवर्तित किया जाएगा. राज्य के 777 और स्कूलों में डिजिटल क्लासरूम परियोजना लागू करने की भी स्वीकृति दी गई है.

मातृ-शिशु पोषण और दिव्यांग कल्याण

मंत्रिमंडल ने इंदिरा गांधी मातृ शिशु संकल्प योजना शुरू करने को मंजूरी दी है. इस योजना का उद्देश्य छह वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के पोषण स्तर को बेहतर बनाना है.

दिव्यांग व्यक्तियों के विवाह अनुदान में भी उल्लेखनीय वृद्धि की गई है. 70 प्रतिशत से अधिक दिव्यांगता वाले व्यक्तियों के लिए अनुदान राशि 50 हजार से बढ़ाकर दो लाख रुपये कर दी गई है, जबकि 40 से 70 प्रतिशत दिव्यांगता वाले व्यक्तियों को 25 हजार रुपये की सहायता दी जाएगी.

स्वास्थ्य सेवाओं के आधुनिकीकरण पर बड़ा निवेश

राज्य के चिकित्सा महाविद्यालयों, सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों और आदर्श स्वास्थ्य संस्थानों के आधुनिकीकरण के लिए 1,617.40 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी दी गई है. उद्देश्य है कि मरीजों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण उपचार राज्य के भीतर ही उपलब्ध हो सके.

कमला नेहरू अस्पताल शिमला सहित सुंदरनगर, नूरपुर, ऊना, भोरंज और बिलासपुर के अस्पतालों में आधुनिक उपकरणों की खरीद को स्वीकृति दी गई है. मेडिकल कॉलेज नाहन में इम्यूनोहेमेटोलॉजी एवं ब्लड ट्रांसफ्यूजन विभाग स्थापित किया जाएगा. साथ ही सभी सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों में बायोमेडिकल उपकरण प्रबंधन एवं अनुरक्षण कार्यक्रम लागू होगा.

नई नियुक्तियां और प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण

कैबिनेट ने कनिष्ठ अभियंता (सिविल) के 190, कनिष्ठ कार्यालय सहायक (आईटी) के 151, सहायक स्टाफ नर्स के 150 और फार्मेसी अधिकारी के 40 पदों को भरने की मंजूरी दी है. इसके अतिरिक्त रेडियोग्राफर, फूड सेफ्टी ऑफिसर, सफाई कर्मचारी, वेलफेयर ऑर्गेनाइजर और अन्य पदों को भी स्वीकृति प्रदान की गई है.

नूरपुर, बद्दी और ऊना में औषधि परीक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी. सिरमौर जिले में लोक निर्माण विभाग मंडलों का पुनर्गठन किया जाएगा और कोटखाई के पशु चिकित्सालय को उपमंडलीय स्तर पर उन्नत किया जाएगा.

सड़क और अवसंरचना सुधार पर जोर

बरसात के दौरान जलभराव और कटाव की समस्या से निपटने के लिए रोड ड्रेनेज पॉलिसी को मंजूरी दी गई है. नई सड़कों के निर्माण में वैज्ञानिक ढंग से नालियों, कल्वर्ट और रिटेनिंग वॉल का प्रावधान अनिवार्य होगा. पुरानी सड़कों की नियमित सफाई और मरम्मत की जिम्मेदारी संबंधित विभागों को सौंपी जाएगी. इसके साथ ही सड़कों की मरम्मत के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर को भी मंजूरी दी गई है.

खेल और कौशल विकास को बढ़ावा

खेल क्षेत्र में भी कई अहम फैसले लिए गए. बिलासपुर के लुहणू खेल छात्रावास की क्षमता 80 से बढ़ाकर 100 की गई है. विभिन्न जिलों में वॉलीबॉल, कबड्डी, बॉक्सिंग और हैंडबॉल खेल छात्रावास स्थापित करने का निर्णय लिया गया है. चंबा जिले में डिस्टिल ग्लोबल स्किल्स एवं डिजिटल विश्वविद्यालय की स्थापना को भी स्वीकृति दी गई है. इसके अलावा हिमाचल प्रदेश राज्य लॉटरी (विनियमन) नियम, 2026 का प्रारूप तैयार करने के लिए मंत्रिमंडलीय उप समिति का गठन किया गया है. 

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