173 मौतें, 936 करोड़ का नुकसान... हिमाचल में मानसून का तांडव, सड़क-बिजली-पानी ठप

हिमाचल प्रदेश में मानसून की बारिश इस बार सिर्फ पहाड़ों को नहीं, बल्कि लोगों की जिंदगी और सरकारी व्यवस्थाओं को भी गहरी चोट पहुंचा रही है.

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प्रतिकात्मक तस्वीर/ AI

हिमाचल प्रदेश में मानसून की बारिश इस बार सिर्फ पहाड़ों को नहीं, बल्कि लोगों की जिंदगी और सरकारी व्यवस्थाओं को भी गहरी चोट पहुंचा रही है. राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र की 12 अगस्त तक की संचयी रिपोर्ट के मुताबिक, मानसून के दौरान प्राकृतिक आपदाओं में 75 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि सड़क हादसों में 98 लोगों की मौत दर्ज हुई है. यानी बारिश के इस मौसम में आपदा और सड़क दुर्घटनाओं को मिलाकर कुल 173 लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं प्रदेश को करीब 936.63 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा है.

बारिश थमी नहीं, 200 सड़कें अब भी बंद

13 अगस्त की सुबह भी प्रदेश में हालात सामान्य नहीं हो सके. राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र की सुबह 10 बजे की रिपोर्ट के अनुसार, हिमाचल में 200 सड़कें यातायात के लिए बंद थीं. इसके अलावा 45 बिजली वितरण ट्रांसफार्मर प्रभावित रहे और 39 पेयजल आपूर्ति योजनाओं पर भी बारिश का असर पड़ा. हालांकि एक दिन पहले शाम के मुकाबले बंद सड़कों की संख्या 209 से घटकर 200 हो गई, लेकिन कई इलाकों में बिजली और पानी की समस्या बनी हुई है.

मंडी और कुल्लू सबसे ज्यादा प्रभावित

सड़क बंद होने के मामलों में मंडी और कुल्लू सबसे ज्यादा प्रभावित जिले बने हुए हैं. मंडी में 64 और कुल्लू में 60 सड़कें बंद रहीं. इसके अलावा शिमला में 32 और चंबा में 24 सड़कें यातायात के लिए बाधित थीं. लाहौल-स्पीति में तीन, किन्नौर में दो और ऊना में चार सड़कें बंद रहीं. मंडी के सराज क्षेत्र में अकेले 41 सड़कें प्रभावित हैं, जबकि कुल्लू के बंजार में 19, कुल्लू में 23, आनी में आठ और निरमंड में 10 सड़कें बंद हैं.

शिमला में भी बिगड़ी सड़क और पानी की व्यवस्था

राजधानी शिमला भी मानसून के प्रकोप से अछूती नहीं रही. 13 अगस्त सुबह तक जिले में 32 सड़कें बंद थीं. इनमें रामपुर की 15 और जुब्बल की 11 सड़कें शामिल हैं. जिले में तीन बिजली वितरण ट्रांसफार्मर प्रभावित रहे, जबकि 17 पेयजल योजनाओं पर भी असर पड़ा. चंबा में 24 सड़कें बंद होने के साथ 13 पेयजल योजनाएं प्रभावित हुईं. किन्नौर में बढ़ते जलस्तर के कारण रिस्पा लिंक रोड बंद हुई, जबकि शंकुई नाला में अचानक आई बाढ़ के चलते चारंग जाने वाली लिंक रोड भी बाधित हो गई.

आपदा में 75 और सड़क हादसों में 98 मौतें

मानसून के दौरान प्राकृतिक आपदाओं ने प्रदेश में भारी मानवीय क्षति पहुंचाई है. रिपोर्ट के अनुसार लाहौल-स्पीति में 14, कांगड़ा में 12, शिमला में 10, कुल्लू और चंबा में नौ-नौ, सिरमौर में सात और मंडी में छह लोगों की आपदा के कारण मौत हुई है. वहीं सड़क हादसों में 98 लोगों की जान गई. इनमें चंबा और सिरमौर में 16-16, कुल्लू में 13, शिमला में 11, कांगड़ा में 10 और ऊना में छह मौतें शामिल हैं.

936 करोड़ से ज्यादा का आर्थिक नुकसान

मानसून की मार का असर प्रदेश की अर्थव्यवस्था और सरकारी ढांचे पर भी साफ दिखाई दे रहा है. सरकारी संचयी रिपोर्ट के मुताबिक हिमाचल को अब तक 93,663.41 लाख रुपये यानी करीब 936.63 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. इसमें निजी और सार्वजनिक संपत्ति के अलावा कृषि-बागवानी, लोक निर्माण, जल शक्ति, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा, मत्स्य पालन तथा ग्रामीण और शहरी विकास से जुड़े क्षेत्रों को हुआ नुकसान शामिल है. लगातार हो रही बारिश ने बुनियादी ढांचे की मुश्किलें भी बढ़ा दी हैं.

पहाड़ों में दोहरी मार, जनजीवन से अर्थव्यवस्था तक असर

हिमाचल में मानसून की मौजूदा तस्वीर यह बताती है कि बारिश का संकट सिर्फ भूस्खलन या सड़क बंद होने तक सीमित नहीं है. एक तरफ प्राकृतिक आपदाएं और सड़क दुर्घटनाएं लोगों की जान ले रही हैं, तो दूसरी ओर सड़क, बिजली और पानी जैसी जरूरी सेवाएं प्रभावित होने से रोजमर्रा का जीवन मुश्किल हो रहा है. करीब 936 करोड़ रुपये का नुकसान इस बात का संकेत है कि इस मानसून ने हिमाचल के बुनियादी ढांचे के साथ-साथ उसकी अर्थव्यवस्था पर भी बड़ा दबाव डाला है.

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