PoK में चुनाव से पहले भारी तनाव, 12 सीटों पर मचा बवाल, 14 हजार पुलिसकर्मी तैनात, क्यों भड़के लोग?

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में विधानसभा चुनाव शुरू हो गए हैं. लेकिन इस बार चुनाव सिर्फ राजनीतिक मुकाबला नहीं, बल्कि इलाके में बढ़ते गुस्से और विरोध के बीच हो रहे हैं.

High tension in PoK ahead of elections uproar over 12 seats police personnel deployed
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इस्लामाबाद: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में विधानसभा चुनाव शुरू हो गए हैं. लेकिन इस बार चुनाव सिर्फ राजनीतिक मुकाबला नहीं, बल्कि इलाके में बढ़ते गुस्से और विरोध के बीच हो रहे हैं.

पिछले दो महीनों से PoK में लगातार प्रदर्शन और हिंसा देखने को मिली है. इसी को देखते हुए पाकिस्तान सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त कर दी है. चुनाव 27 जुलाई से 10 अगस्त तक तीन चरणों में कराए जा रहे हैं. सुरक्षा के लिए पंजाब प्रांत से करीब 14 हजार अतिरिक्त पुलिसकर्मियों को PoK भेजा गया है.

सबसे बड़ा विवाद 12 रिफ्यूजी सीटों को लेकर है. इन सीटों को लेकर स्थानीय संगठनों का विरोध जारी है और उनका आरोप है कि इन सीटों के जरिए इस्लामाबाद PoK की राजनीति पर अपना प्रभाव बनाए रखता है.

PoK विधानसभा में कितनी सीटें हैं?

PoK विधानसभा में कुल 53 सीटें हैं. इनमें से 45 सीटों पर जनता सीधे मतदान करती है. वहीं, 8 सीटें महिलाओं, तकनीकी विशेषज्ञों और धार्मिक प्रतिनिधियों के लिए आरक्षित हैं.

चुनाव तीन चरणों में होंगे. पहले चरण में मीरपुर डिवीजन की 13 सीटों पर मतदान होगा. इसके बाद मुजफ्फराबाद डिवीजन की 9 सीटों और 12 रिफ्यूजी सीटों पर वोटिंग होगी. आखिरी चरण में पुंछ डिवीजन की 11 सीटों पर चुनाव कराया जाएगा.

12 रिफ्यूजी सीटों पर क्यों मचा विवाद?

इस चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा 12 रिफ्यूजी सीटें हैं. ये सीटें उन लोगों के लिए बनाई गई थीं, जो 1947 के बाद जम्मू-कश्मीर से जाकर पाकिस्तान के दूसरे हिस्सों में बस गए थे.

स्थानीय संगठन जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) का कहना है कि इन सीटों के जरिए बाहरी लोगों को PoK की राजनीति में जगह मिलती है और स्थानीय लोगों की आवाज कमजोर होती है.

JAAC लंबे समय से इन सीटों को खत्म करने की मांग कर रही है. इसी मांग को लेकर पिछले कई हफ्तों से बड़े प्रदर्शन हुए. कई जगह हालात इतने बिगड़ गए कि प्रदर्शन हिंसक हो गए और कई लोगों की मौत हुई.

प्रदर्शनों के बाद पाकिस्तान सरकार ने JAAC पर कार्रवाई करते हुए उसे प्रतिबंधित संगठन घोषित कर दिया.

चुनाव से पहले भारी सुरक्षा इंतजाम

PoK में तनाव को देखते हुए पाकिस्तान सरकार ने सुरक्षा का बड़ा इंतजाम किया है. 14 हजार अतिरिक्त पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है.

इनमें करीब 30 प्रतिशत जवान हथियारों के साथ तैनात रहेंगे, जबकि बाकी पुलिसकर्मियों के पास दंगा रोकने वाले उपकरण होंगे.

कई इलाकों में सख्त पाबंदियां भी लगाई गई हैं ताकि चुनाव के दौरान हिंसा को रोका जा सके.

राजनीतिक मुकाबला भी दिलचस्प

PoK चुनाव में पाकिस्तान की प्रमुख पार्टियां आमने-सामने हैं. पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP), जो केंद्र में साथ हैं, यहां एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ रही हैं.

वहीं, पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने चुनाव का बहिष्कार कर दिया है. पार्टी ने इसके पीछे सरकार की कार्रवाई और मौजूदा हालात को वजह बताया है.

भारत का रुख साफ

भारत लंबे समय से कहता आया है कि पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उसका अभिन्न हिस्सा है और पाकिस्तान ने कुछ हिस्सों पर अवैध कब्जा कर रखा है.

भारत PoK में होने वाले चुनावों को मान्यता नहीं देता. नई दिल्ली का कहना है कि PoK में हो रहे विरोध प्रदर्शन वहां के लोगों की नाराजगी और लंबे समय से चले आ रहे प्रशासनिक दबाव का परिणाम हैं. अब देखने वाली बात होगी कि चुनाव के बाद PoK में राजनीतिक हालात शांत होते हैं या फिर विरोध और असंतोष का दौर आगे भी जारी रहता है.

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