Madras High Court On Karur Stampede: तमिलनाडु के चर्चित करूर भगदड़ मामले में मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै पीठ ने राज्य सरकार को बड़ा झटका देते हुए पीड़ित परिवारों को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी देने से जुड़े सरकारी आदेशों को निरस्त कर दिया है. अदालत ने स्पष्ट किया कि इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) कर रही है और इसकी निगरानी स्वयं सुप्रीम कोर्ट कर रहा है. ऐसे में जांच पूरी होने से पहले सरकार द्वारा उठाए गए इस कदम को कानूनी कसौटी पर उचित नहीं माना जा सकता.
सीबीआई जांच और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी का दिया हवाला
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा कि जब किसी मामले की जांच सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसी कर रही हो और उस पर सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी हो, तब अदालत को मामले के तथ्यों और जिम्मेदारियों पर टिप्पणी करने से बचना चाहिए. इसी आधार पर कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार के उन सरकारी आदेशों (जीओ) को रद्द कर दिया, जिनके तहत करूर भगदड़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने का निर्णय लिया गया था. इस फैसले के साथ मामले में दायर सभी जनहित याचिकाओं का भी निस्तारण कर दिया गया.
सीएम विजय ने परिवारों को सौंपे थे नियुक्ति पत्र
मुख्यमंत्री विजय ने 10 जुलाई को मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली बार करूर का दौरा किया था. इसी दौरान उन्होंने सितंबर 2025 में हुई करूर भगदड़ से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए मृतकों के 41 परिवारों में से 32 पात्र सदस्यों को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र सौंपे थे. राज्य सरकार ने घोषणा की थी कि प्रत्येक प्रभावित परिवार के एक पात्र सदस्य को सरकारी सेवा में अवसर दिया जाएगा, ताकि परिवारों को आर्थिक सहारा मिल सके.
पीड़ितों से मुलाकात के बाद लिया गया था फैसला
करूर दौरे के दौरान मुख्यमंत्री विजय ने जिला कलेक्टर कार्यालय में मृतकों के परिजनों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनी थीं और पुनर्वास के लिए कई घोषणाएं की थीं. इसके बाद एक सार्वजनिक सभा में भी उन्होंने सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई थी. हालांकि, इसी निर्णय को चुनौती देते हुए दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के बाद मद्रास हाई कोर्ट ने अब सरकारी आदेशों को रद्द कर दिया है. ऐसे में करूर भगदड़ पीड़ितों के पुनर्वास से जुड़ा यह मामला एक बार फिर कानूनी और प्रशासनिक बहस का विषय बन गया है.
ये भी पढ़ें: जहाज पर हमले में भारतीय नागरिक की मौत से भड़का भारत, विदेश मंत्रालय ने यूक्रेन के राजदूत को किया तलब