अमेरिका से 90% तक सस्ता इलाज, साल में 5 लाख विदेशी मरीज... भारत कैसे बन रहा मेडिकल टूरिज्म का हब?

भारत अब सिर्फ कम खर्च में इलाज कराने वाले देश के रूप में नहीं, बल्कि दुनिया के बड़े मेडिकल टूरिज्म केंद्रों में शामिल हो रहा है. पिछले कुछ सालों में विदेशी मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है.

500000 foreign patients annually How is India becoming a hub for medical tourism
प्रतिकात्मक तस्वीर/ AI

नई दिल्ली: भारत अब सिर्फ कम खर्च में इलाज कराने वाले देश के रूप में नहीं, बल्कि दुनिया के बड़े मेडिकल टूरिज्म केंद्रों में शामिल हो रहा है. पिछले कुछ सालों में विदेशी मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है.

साल 2009 में जहां करीब 1.12 लाख विदेशी मरीज इलाज के लिए भारत आए थे, वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर 5.07 लाख तक पहुंच गई. यानी 16 साल में भारत आने वाले विदेशी मरीजों की संख्या करीब साढ़े चार गुना बढ़ गई.

बांग्लादेश, इराक, उज्बेकिस्तान, सोमालिया, ओमान और केन्या जैसे देशों से बड़ी संख्या में मरीज भारत इलाज के लिए पहुंच रहे हैं.

मेडिकल टूरिज्म का बाजार भी तेजी से बढ़ रहा है. साल 2025 में यह करीब 84 हजार करोड़ रुपये का था, जिसके 2030 तक बढ़कर 1.56 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है.

सिर्फ सस्ता इलाज नहीं, बेहतर सुविधाएं भी बड़ी वजह

भारत में विदेशी मरीजों की बढ़ती संख्या की सबसे बड़ी वजह सिर्फ कम खर्च नहीं है. यहां विशेषज्ञ डॉक्टर आसानी से मिल जाते हैं, जांच रिपोर्ट जल्दी मिलती है और इलाज की प्रक्रिया भी तेजी से पूरी होती है.

कई देशों की तुलना में भारत में इलाज काफी सस्ता है. अमेरिका में जिस इलाज के लिए हजारों रुपये खर्च होते हैं, वही इलाज भारत में काफी कम कीमत में हो जाता है.

दांतों के इलाज से लेकर बड़ी सर्जरी तक, भारत में खर्च दूसरे विकसित देशों के मुकाबले काफी कम है. यही वजह है कि अब कई विदेशी मरीज इलाज के लिए भारत को प्राथमिकता देने लगे हैं.

भारत के पास मजबूत स्वास्थ्य ढांचा

भारत में मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने में देश का बड़ा स्वास्थ्य ढांचा भी अहम भूमिका निभा रहा है. देश में करीब 69 हजार अस्पताल हैं. इनमें बड़ी संख्या निजी अस्पतालों की है, जहां आधुनिक मशीनें, बेहतर सुविधाएं और विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध हैं.

भारत में करीब 12 लाख पंजीकृत डॉक्टर हैं. इसके अलावा कई अस्पतालों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की मान्यता मिली हुई है, जिससे विदेशी मरीजों का भरोसा बढ़ा है.

इलाज के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ता

विदेशी मरीजों के भारत आने की एक बड़ी वजह जल्दी इलाज मिलना भी है. कई देशों में बड़ी सर्जरी या विशेषज्ञ डॉक्टर से मिलने के लिए महीनों इंतजार करना पड़ता है. वहीं भारत में मरीजों को जल्दी अपॉइंटमेंट मिल जाता है और जांच से लेकर इलाज तक की प्रक्रिया कम समय में पूरी हो जाती है.

ब्रिटेन जैसे देशों से आने वाले कई मरीजों का कहना है कि भारत में उन्हें कम समय में विशेषज्ञ डॉक्टर और इलाज की सुविधा मिल जाती है.

172 देशों के लिए आसान हुआ मेडिकल वीजा

विदेशी मरीजों के लिए भारत ने वीजा प्रक्रिया को भी आसान बनाया है. अब 172 देशों के नागरिकों को ई-मेडिकल वीजा की सुविधा दी जा रही है. इसके अलावा मरीज के साथ आने वाले लोगों के लिए ई-मेडिकल अटेंडेंट वीजा की सुविधा भी उपलब्ध है.

आयुर्वेद, योग, यूनानी और होम्योपैथी जैसी भारतीय चिकित्सा पद्धतियों से इलाज कराने आने वाले लोगों के लिए अलग आयुष वीजा की व्यवस्था की गई है.

सरकार का ‘हील इन इंडिया’ अभियान भी भारत को मेडिकल टूरिज्म के बड़े केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में काम कर रहा है.

अमेरिका के मुकाबले भारत में काफी सस्ता इलाज

भारत में इलाज की कम लागत मेडिकल टूरिज्म की सबसे बड़ी ताकत है. घुटना बदलने की सर्जरी भारत में करीब 6.76 लाख रुपये में हो जाती है, जबकि अमेरिका में इसके लिए करीब 77 लाख रुपये तक खर्च करने पड़ सकते हैं.

हार्ट बाईपास सर्जरी भारत में करीब 7.7 लाख रुपये में हो सकती है, जबकि अमेरिका में इसका खर्च 38 लाख रुपये से ज्यादा हो सकता है.

हिप रिप्लेसमेंट और रीढ़ की सर्जरी जैसे इलाज में भी भारत और अमेरिका के खर्च में बड़ा अंतर है. यही कारण है कि विदेशी मरीज कम खर्च में बेहतर इलाज के लिए भारत का रुख कर रहे हैं.

निजी अस्पताल बन रहे विदेशी मरीजों की पहली पसंद

भारत के निजी अस्पताल मेडिकल टूरिज्म को आगे बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं.

इन अस्पतालों में आधुनिक तकनीक, अनुभवी डॉक्टर और कम इंतजार में इलाज की सुविधा मिलती है. यही कारण है कि विदेशों से आने वाले मरीज अक्सर निजी अस्पतालों को प्राथमिकता देते हैं.

अब लॉन्जेविटी मेडिसिन में भी बढ़ रही भारत की पहचान

भारत अब सिर्फ बीमारी के इलाज तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि स्वस्थ और लंबी उम्र से जुड़े इलाज यानी लॉन्जेविटी मेडिसिन के क्षेत्र में भी आगे बढ़ रहा है.

इसमें जेनेटिक जांच, एंटी-एजिंग थेरेपी और नई चिकित्सा तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है. कम खर्च में इन सुविधाओं की उपलब्धता के कारण विदेशी मरीजों की रुचि इस क्षेत्र में भी बढ़ रही है.

आने वाले समय में और बढ़ेगा मेडिकल टूरिज्म

सस्ता इलाज, विशेषज्ञ डॉक्टर, आधुनिक अस्पताल, आसान वीजा व्यवस्था और तेजी से मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं ने भारत को दुनिया के तेजी से बढ़ते मेडिकल टूरिज्म केंद्रों में शामिल कर दिया है.

आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र भारत की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के साथ-साथ दुनिया में भारतीय स्वास्थ्य सेवाओं की पहचान को और मजबूत कर सकता है.

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