BhookaNangaPakistan: पाकिस्तान में आर्थिक संकट और बढ़ती महंगाई का असर अब सीधे लोगों की रोज की थाली पर दिखाई दे रहा है. महंगी होती खाने-पीने की चीजों के कारण परिवारों के लिए पहले जितना खाना खरीदना आसान नहीं रह गया है. इसका असर सिर्फ खाने की मात्रा पर नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता पर भी पड़ रहा है. कुछ साल पहले गेहूं संकट के दौरान सोशल मीडिया पर #BhookaNangaPakistan जैसे हैशटैग चर्चा में आए थे. अब एक बार फिर पाकिस्तान में खाद्य सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ रही है.
खाने की चीजों की खपत में आई कमी
पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स यानी पीबीएस के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले छह साल में शहरों और गांवों दोनों जगह कई प्रमुख खाद्य चीजों की खपत कम हुई है. महंगाई बढ़ने और लोगों की खरीदने की क्षमता घटने से परिवारों की खाने की आदतें भी बदल रही हैं.
कई परिवार अब पहले के मुकाबले छोटी रोटी खा रहे हैं. मांस महीने में कम बार पकाया जा रहा है और बच्चों को दिए जाने वाले दूध की मात्रा भी कम हुई है. यहां तक कि रोज पी जाने वाली चाय के कप भी घट रहे हैं. यानी समस्या सिर्फ खाने की चीजों के महंगे होने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है.
छह साल में खाद्य असुरक्षा बढ़ी
पाकिस्तान के सामाजिक आंकड़े भी हालात की गंभीर तस्वीर दिखाते हैं. आंकड़ों के अनुसार, 2019 में करीब 15.92 फीसदी पाकिस्तानी परिवार मध्यम से गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे थे. 2025 तक यह आंकड़ा बढ़कर 24.35 फीसदी हो गया.
वहीं, गंभीर खाद्य असुरक्षा से जूझने वाले परिवारों की संख्या भी बढ़ी है. 2019 में ऐसे परिवारों की हिस्सेदारी 2.37 फीसदी थी, जो 2025 में बढ़कर 5.04 फीसदी हो गई. इसका सीधा मतलब है कि ज्यादा परिवारों के लिए पर्याप्त और पौष्टिक खाना जुटाना मुश्किल होता जा रहा है.
पाकिस्तान में अनाज है, लेकिन लोगों की जेब खाली
पाकिस्तान की समस्या सिर्फ खाद्यान्न की कमी नहीं है. देश में गेहूं और चावल का उत्पादन होता है. इसके अलावा दूध, अंडे और पोल्ट्री का भी बड़े स्तर पर उत्पादन किया जाता है. पाकिस्तान मांस का निर्यात भी करता है.
इसके बावजूद आम लोगों के लिए खाना महंगा होता जा रहा है. असली समस्या बढ़ती कीमतों और लोगों की घटती खरीद क्षमता से जुड़ी है. महंगाई ने परिवारों का बजट बिगाड़ दिया है और ऐसे में लोग अपनी जरूरतों में कटौती कर रहे हैं. खाने-पीने की मात्रा और गुणवत्ता में कमी करना भी इसी मजबूरी का हिस्सा बन गया है.
फिर चर्चा में आया ‘भूखा-नंगा पाकिस्तान’
कुछ साल पहले गेहूं संकट के दौरान पाकिस्तान में #BhookaNangaPakistan जैसे हैशटैग सोशल मीडिया पर चर्चा में रहे थे. 2023-24 के गेहूं संकट के बाद अब खाद्य सुरक्षा को लेकर एक नई चिंता सामने है.
पाकिस्तान के सामने चुनौती सिर्फ पर्याप्त खाना पैदा करने की नहीं है. बड़ी चुनौती यह भी है कि आम लोगों को जरूरी खाद्य पदार्थ उचित कीमत पर मिल सकें. अगर महंगाई और लोगों की घटती खरीद क्षमता का दबाव आगे भी बना रहा, तो खाद्य असुरक्षा और कुपोषण की समस्या और गंभीर हो सकती है.
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