Hamas Israel War: गाजा पट्टी में लंबे समय से चल रहे संघर्ष को रोकने के लिए एक नई शांति योजना तैयार की गई थी, जिसमें मिस्र, अमेरिका और कतर की भूमिका निर्णायक मानी जा रही थी. लेकिन अंतिम समय में हमास ने इस प्रस्ताव से किनारा कर लिया है, जिससे मध्यपूर्व में शांति की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है.
हमास ने स्पष्ट किया है कि वह मिस्र में होने वाले शांति समझौता सम्मेलन में हिस्सा नहीं लेगा, क्योंकि प्रस्ताव में शामिल कुछ बिंदु उसके अनुसार एकतरफा और अस्वीकार्य हैं. सबसे विवादित बिंदु यह है कि हमास को गाजा से हटने और अपने लड़ाकों को निष्क्रिय करने के लिए कहा गया है.
मिस्र की पहल और प्रस्ताव की मुख्य बातें
मिस्र की राजधानी काहिरा में एक बहुपक्षीय शांति योजना का खाका तैयार किया गया था, जिसमें अमेरिका, कतर और मिस्र ने मध्यस्थता की. इस प्रस्ताव के तहत हमास को गाजा पट्टी से बाहर जाने के लिए कहा गया है. हथियारों को पूरी तरह निष्क्रिय (डिसआर्म) करने की शर्त रखी गई है.
इसके बाद गाजा में एक नई प्रशासनिक व्यवस्था बनाई जाएगी, जिसमें अमेरिका और मिस्र की भागीदारी होगी. भविष्य में फिलिस्तीन में एक एकीकृत सरकार की स्थापना की जाएगी, जिसमें किसी भी प्रकार के सशस्त्र गुट की भूमिका नहीं होगी.
इस प्रस्ताव पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, मिस्र और कतर के उच्चाधिकारियों के हस्ताक्षर होने वाले हैं. लेकिन हमास ने इस समारोह में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया है, जिससे इस योजना की वैधता और प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हो गए हैं.
हमास की नाराजगी के कारण क्या हैं?
हमास ने इस योजना को ठुकराने के पीछे दो प्रमुख आपत्तियाँ जाहिर की हैं:
गाजा से बेदखली की शर्त: प्रस्ताव के अनुसार हमास को गाजा से बाहर जाना होगा और उसकी राजनीतिक-सैन्य उपस्थिति समाप्त कर दी जाएगी. हमास इसे अपने अस्तित्व पर सीधा हमला मान रहा है.
राजनीतिक भागीदारी से इनकार: प्रस्ताव में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि नई शासन व्यवस्था में हमास को कोई राजनीतिक भूमिका दी जाएगी या नहीं. संगठन का कहना है कि वह गाजा के प्रशासन में सहभागी रहना चाहता है.
हमास ने इन आपत्तियों को लेकर कतर से मध्यस्थता कराने की कोशिश की, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है.
‘अल अरेबिया’ की रिपोर्ट और प्रवक्ता का बयान
अरबी मीडिया चैनल ‘अल अरेबिया’ के अनुसार, हमास के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता हुसम बदरान ने इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि, “शांति समझौते के कई बिंदु हमारे खिलाफ हैं. इन पर गंभीर पुनर्विचार की आवश्यकता है. जब तक हमारी शर्तों पर बातचीत नहीं होती, हम इस योजना में शामिल नहीं होंगे.” उन्होंने यह भी पुष्टि की कि हमास का कोई भी प्रतिनिधि मिस्र में होने वाले उस हस्ताक्षर समारोह में मौजूद नहीं रहेगा, जिसमें अमेरिका और अन्य देश भाग लेंगे.
अमेरिका की योजना को बड़ा झटका
डोनाल्ड ट्रंप, जो इस डील के मुख्य प्रस्तावकों में से हैं, उन्होंने हाल ही में कहा था कि गाजा में "पूर्ण युद्ध विराम" उनकी प्राथमिकता है. लेकिन हमास की अनिच्छा इस योजना के भविष्य पर प्रश्नचिन्ह लगा रही है.
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हमास इस योजना का हिस्सा नहीं बनता है, तो यह समझौता केवल एक कागजी दस्तावेज बनकर रह जाएगा. गाजा पर वास्तविक नियंत्रण अभी भी हमास के पास है, और अगर वह हथियार डालने को तैयार नहीं है, तो इज़राइल और गाजा के बीच तनाव बना रहेगा.
हमास की सैन्य ताकत अभी भी बरकरार
हालांकि हाल के संघर्षों में हमास को भारी नुकसान उठाना पड़ा है, लेकिन रिपोर्ट्स के अनुसार संगठन के पास अब भी लगभग 15,000 सशस्त्र लड़ाके मौजूद हैं. इसके अलावा, उसके पास भूमिगत सुरंग नेटवर्क, रॉकेट उत्पादन सुविधाएं और अन्य सैन्य संसाधन अभी भी सक्रिय हैं.
इसका मतलब है कि जब तक हमास किसी भी समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करता, तब तक कोई भी शांति योजना जमीन पर लागू नहीं हो सकती. इससे अमेरिका की भूमिका भी कमजोर होती दिखाई दे रही है, खासकर जब ट्रंप ने खुद इसे एक "फाइनल डील" बताया था.
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