अमेरिका के बाद फ्रांस ने लिया पुतिन से पंगा! जब्त किया रूसी तेल का टैंकर, जंग की ओर जा रही दुनिया?

यूक्रेन युद्ध के बीच रूस पर दबाव बढ़ाने की कोशिशों को और तेज करते हुए अब फ्रांस ने भी बड़ा कदम उठाया है.

France seized Russian oil tanker Putin Macron Trump
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यूक्रेन युद्ध के बीच रूस पर दबाव बढ़ाने की कोशिशों को और तेज करते हुए अब फ्रांस ने भी बड़ा कदम उठाया है. अमेरिका द्वारा इसी महीने एक रूसी तेल जहाज को रोके जाने के बाद, फ्रांसीसी नौसेना ने भूमध्य सागर में रूस से जुड़े एक संदिग्ध तेल टैंकर को जब्त किया है. यह कार्रवाई पश्चिमी देशों की उस रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है, जिसके तहत रूस की तेल बिक्री से होने वाली कमाई पर लगाम लगाने की कोशिश की जा रही है.

फ्रांसीसी अधिकारियों के अनुसार यह टैंकर पश्चिमी भूमध्य सागर में स्पेन के अल्मेरिया तट के पास पकड़ा गया. खुफिया इनपुट के आधार पर इस जहाज पर काफी समय से नजर रखी जा रही थी. बताया गया है कि ब्रिटेन से मिली खुफिया जानकारी के बाद फ्रांस की समुद्री एजेंसियां अलर्ट पर थीं और उसी के तहत यह कार्रवाई की गई.

‘शैडो फ्लीट’ से जुड़ा होने का शक

अधिकारियों का कहना है कि पकड़ा गया टैंकर रूस की उस तथाकथित ‘शैडो फ्लीट’ का हिस्सा हो सकता है, जिसके जरिए मॉस्को अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को दरकिनार कर तेल का निर्यात करता है. इस गुप्त नेटवर्क के तहत पुराने टैंकरों का इस्तेमाल किया जाता है, जो अक्सर फर्जी झंडों, बदले हुए नामों और जाली दस्तावेजों के सहारे समुद्र में आवाजाही करते हैं.

इस जहाज का नाम ‘ग्रिंच’ बताया गया है. संदेह है कि यह कोमोरोस द्वीपसमूह के झंडे का गलत इस्तेमाल कर रहा था, ताकि इसकी असली पहचान और संचालन से जुड़ी जानकारी छिपी रह सके. कोमोरोस द्वीप पूर्वी अफ्रीका के तट के पास स्थित हैं और उनका झंडा अक्सर ऐसे जहाजों द्वारा इस्तेमाल किया जाता है, जो निगरानी से बचना चाहते हैं.

जहाज जब्त होने से भारतीय क्रू फंसा

इस कार्रवाई का एक अहम पहलू यह भी है कि टैंकर पर मौजूद क्रू भारतीय बताया गया है. जहाज को रोके जाने और जांच के दायरे में आने के बाद कई भारतीय नागरिक इसमें फंस गए हैं. फिलहाल फ्रांसीसी नौसेना इस टैंकर को सुरक्षा घेरे में लेकर एक बंदरगाह की ओर ले जा रही है, जहां इसकी गहन जांच की जाएगी.

फ्रांसीसी समुद्री अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने तक जहाज और उसके क्रू की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी. इस पूरे घटनाक्रम ने भारतीय क्रू में भी अनिश्चितता बढ़ा दी है, क्योंकि आगे की कानूनी प्रक्रिया जांच के नतीजों पर निर्भर करेगी.

रूस के लिए शैडो फ्लीट क्यों अहम

तेल से होने वाली आय रूस की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है. यही पैसा राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को यूक्रेन के खिलाफ युद्ध जारी रखने में मदद करता है, वह भी बिना देश के भीतर महंगाई बढ़ाए या मुद्रा संकट को गहराए. पश्चिमी देशों का मानना है कि जब तक रूस को तेल बेचकर अरबों डॉलर की कमाई होती रहेगी, तब तक युद्ध पर लगाम लगाना मुश्किल होगा.

इसी वजह से अमेरिका और यूरोपीय देश अब सिर्फ जमीन और हवा ही नहीं, बल्कि समुद्र में भी प्रतिबंधों को सख्ती से लागू करने की दिशा में बढ़ रहे हैं. फ्रांस की यह कार्रवाई उसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है.

मैक्रों का समुद्र में भी सख्ती का संकेत

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस कार्रवाई को लेकर बयान जारी करते हुए कहा कि उनका देश अंतरराष्ट्रीय कानून को लागू करने और रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों को प्रभावी बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि रूस की ‘शैडो फ्लीट’ यूक्रेन के खिलाफ चल रहे आक्रामक युद्ध को वित्तीय ताकत देती है और इसे रोका जाना जरूरी है.

मैक्रों ने इस कार्रवाई से जुड़ी एक तस्वीर भी साझा की, जिसमें फ्रांसीसी हेलिकॉप्टर को टैंकर के ऊपर उड़ान भरते हुए देखा जा सकता है. यह तस्वीर एक साफ संदेश देती है कि अब समुद्र में भी रूस के लिए रास्ते आसान नहीं रहने वाले.

रूस की शैडो फ्लीट कितनी बड़ी?

विशेषज्ञों का अनुमान है कि रूस की शैडो फ्लीट में 400 से ज्यादा जहाज शामिल हैं. ये टैंकर अक्सर जटिल समुद्री रास्तों का इस्तेमाल करते हैं और कई बार समुद्र के बीच ही जहाज से जहाज तेल ट्रांसफर किया जाता है. इस तरीके से यह पता लगाना बेहद मुश्किल हो जाता है कि तेल की असली उत्पत्ति कहां की है.

पश्चिमी देशों का कहना है कि जब तक इस गुप्त नेटवर्क पर प्रभावी नियंत्रण नहीं किया जाता, तब तक प्रतिबंध पूरी तरह कारगर नहीं हो सकते. फ्रांस द्वारा किया गया यह कदम संकेत देता है कि यूरोप अब इस दिशा में और आक्रामक रुख अपनाने जा रहा है.

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