पहले जारी किया NOTAM और अब नौसेना के लिए वार्निंग... सर क्रीक में त्रिशूल अभ्यास से आखिर क्यों कांप रहा पाकिस्तान?

Exercise Trishul: भारत की सैन्य ताकत अब सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं रही है, बल्कि उसका असर पड़ोसी देशों तक महसूस किया जा रहा है. पश्चिमी सीमा पर भारत की तीनों सेनाएँ थल, नौसेना और वायुसेना, एक साथ मिलकर अब तक का सबसे बड़ा संयुक्त युद्धाभ्यास ‘त्रिशूल 2025’ कर रही हैं. 

First NOTAM issued and now warning for Navy Pakistan shivering due Trishul exercise in Sir Creek
Image Source: ANI/ File

Exercise Trishul: भारत की सैन्य ताकत अब सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं रही है, बल्कि उसका असर पड़ोसी देशों तक महसूस किया जा रहा है. पश्चिमी सीमा पर भारत की तीनों सेनाएँ थल, नौसेना और वायुसेना, एक साथ मिलकर अब तक का सबसे बड़ा संयुक्त युद्धाभ्यास ‘त्रिशूल 2025’ कर रही हैं. 

यह सिर्फ एक अभ्यास नहीं बल्कि भारत की एकता, तकनीकी दक्षता और भविष्य की युद्ध रणनीति का प्रदर्शन है. इस बीच, पाकिस्तान ने इस एक्सरसाइज के जवाब में अपने हवाई क्षेत्र के बड़े हिस्से को बंद कर दिया है और समुद्री चेतावनी जारी की है. सवाल यह उठता है कि क्या पाकिस्तान वास्तव में भारत से डर गया है?

त्रिशूल 2025 क्या है?

‘त्रिशूल 2025’ भारत की तीनों सेनाओं का संयुक्त ट्राई-सर्विसेज अभ्यास है, जिसका पूरा नाम है Tri-Services Synergy Enabling Integrated Operations. इसका संस्कृत ध्येय वाक्य “त्रिशूलं समन्वयस्य बलम्” है, जिसका अर्थ है, “एकता ही शक्ति है.” यह अभ्यास भारत को यह सिखाता है कि कैसे थलसेना, नौसेना और वायुसेना एक साथ समन्वय बनाकर भविष्य की जटिल परिस्थितियों में लड़ सकें. यह न केवल सैन्य सहयोग की परीक्षा है, बल्कि आत्मनिर्भरता और नवाचार की दिशा में उठाया गया एक बड़ा कदम भी है.

कब और कहाँ हो रहा है यह अभ्यास

यह युद्धाभ्यास 30 अक्टूबर से शुरू हुआ है और 10 नवंबर 2025 तक चलने की संभावना है. हालांकि, इसे 13 नवंबर तक बढ़ाने की भी तैयारी है. यह पूरा अभ्यास भारत की पश्चिमी सीमा पर, विशेष रूप से गुजरात और राजस्थान में हो रहा है. इस क्षेत्र में स्थित सर क्रीक इलाका इसका मुख्य केंद्र है, वही विवादित दलदली पट्टी, जहाँ समुद्र और जमीन एक-दूसरे से मिलते हैं और जिसके नज़दीक पाकिस्तान का कराची क्षेत्र भी पड़ता है.

त्रिशूल की ताकत और महत्व

‘त्रिशूल 2025’ में तीनों सेनाओं के 20,000 से अधिक जवान हिस्सा ले रहे हैं. इस अभ्यास का नेतृत्व दक्षिणी कमांड कर रही है. यहां तीनों सेनाएँ एक साथ ट्रेनिंग कर रही हैं ताकि किसी भी युद्ध जैसी स्थिति में बेहतर तालमेल बना सकें. ज़मीनी हमलों से लेकर समुद्री अभियानों और हवाई युद्ध तक, सबकी एकजुट तैयारी की जा रही है. राफेल फाइटर जेट, ब्रह्मोस मिसाइल, टी-90 टैंक, पनडुब्बियाँ और युद्धपोत इस अभ्यास में शामिल हैं. यह एक्सरसाइज भारत को एक फ्यूचर-रेडी और टेक-इनेबल्ड फोर्स में बदलने की दिशा में निर्णायक भूमिका निभा रही है.

पाकिस्तान की प्रतिक्रिया

भारत के इस विशाल अभ्यास के जवाब में पाकिस्तान ने अपने हवाई क्षेत्र में NOTAM (Notice to Airmen) जारी किया है. पाँच दिनों में दूसरा नोटैम जारी करते हुए उसने अपने मध्य और दक्षिणी हवाई मार्गों को एक महीने के लिए बंद कर दिया है. यह नोटैम 1 नवंबर से 30 नवंबर 2025 तक प्रभावी रहेगा. इसके अलावा पाकिस्तान ने समुद्री क्षेत्र में नेवल फायरिंग वार्निंग भी जारी की है. यह वही क्षेत्र है जहाँ भारत का त्रिशूल अभ्यास चल रहा है. इससे साफ है कि पाकिस्तान इस भारतीय गतिविधि को गंभीरता से ले रहा है और वह अपनी सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर अतिरिक्त सतर्क हो गया है.

डर या सतर्कता?

यह सवाल सभी के मन में है कि क्या पाकिस्तान सच में भारत से डर गया है? दरअसल, इसे पूरी तरह डर कहना सही नहीं होगा, बल्कि इसे एक तरह की रणनीतिक सतर्कता कहा जा सकता है. सर क्रीक जैसे विवादित क्षेत्र में भारत का इतना बड़ा अभ्यास होना पाकिस्तान के लिए चिंता का विषय जरूर है. लेकिन देशों के बीच इस तरह की एक्सरसाइज के दौरान हवाई और समुद्री चेतावनी जारी करना सामान्य सैन्य प्रक्रिया भी होती है. फिर भी, पाकिस्तान द्वारा लगातार दो नोटैम जारी करना यह संकेत देता है कि इस बार वह ज्यादा सतर्क और सजग है.

भारत की मंशा और संदेश

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पहले ही साफ कर चुके हैं कि भारत किसी पर हमला करने की नीति नहीं रखता, लेकिन अगर किसी ने हिमाकत की तो मुंह की खानी पड़ेगी. यही संदेश ‘त्रिशूल’ के ज़रिए दिया जा रहा है कि भारत पूरी तरह तैयार है और किसी भी चुनौती का जवाब देने में सक्षम है. इस एक्सरसाइज का उद्देश्य पड़ोसी देशों को डराना नहीं बल्कि अपनी रक्षा क्षमता और तैयारियों को मजबूत करना है.

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