मशूहर एक्टर राजकुमार राव ने कोर्ट के सामने किया आत्मसमर्पण, गैर-जमानती वारंट था जारी, जानें पूरा मामला

Rajkumar Rao Surrender: भारतीय सिनेमा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच एक बार फिर टकराव की स्थिति उभर कर सामने आई है. पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने अभिनेता राजकुमार राव के खिलाफ दर्ज एक पुराने एफआईआर मामले में जालंधर पुलिस कमिश्नर से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है.

Famous actor Rajkumar Rao surrendered before the court
Image Source: ANI

Rajkumar Rao Surrender: भारतीय सिनेमा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच एक बार फिर टकराव की स्थिति उभर कर सामने आई है. पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने अभिनेता राजकुमार राव के खिलाफ दर्ज एक पुराने एफआईआर मामले में जालंधर पुलिस कमिश्नर से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है. यह मामला वर्ष 2017 में रिलीज़ हुई फिल्म 'बहन होगी तेरी' के प्रचार से जुड़ा है, जिसमें फिल्म के एक पोस्टर में अभिनेता को भगवान शिव के रूप में दिखाया गया था.

विवादित पोस्टर को लेकर धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में राजकुमार राव के खिलाफ धारा 295A, धारा 120B और आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी. पुलिस द्वारा गैर-जमानती वारंट जारी किए जाने के बाद, अभिनेता ने हाल ही में जालंधर की अदालत में आत्मसमर्पण किया और उन्हें जमानत दे दी गई.

एफआईआर रद्द कराने की मांग

राजकुमार राव ने अब हाईकोर्ट का रुख करते हुए याचिका दायर की है, जिसमें एफआईआर को रद्द करने की मांग की गई है. याचिका में कहा गया है कि धारा 295A के तहत कार्यवाही के लिए जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण मंशा आवश्यक होती है, जो इस मामले में नहीं है. अभिनेता ने फिल्म में केवल एक कला प्रदर्शन किया, जिसमें उनका किरदार एक जागरण मंडली में भगवान शिव की भूमिका निभाता है. फिल्म को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) की मंज़ूरी मिली हुई है, यानी सामग्री कानून के दायरे में है. उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(A) के तहत संरक्षित है.

हाईकोर्ट की प्रतिक्रिया

न्यायमूर्ति एन.एस. शेखावत की अदालत ने याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब पुलिस को निर्देश दिया है कि 8 अगस्त 2025 तक जालंधर पुलिस कमिश्नर द्वारा शपथपत्र के माध्यम से जांच की वर्तमान स्थिति की रिपोर्ट दाखिल की जाए.

क्या कहता है मामला कला बनाम आस्था पर?

यह मामला भारतीय सिनेमा में अभिव्यक्ति की सीमा, धार्मिक आस्था और कानून के बीच संतुलन की एक बार फिर गहन पड़ताल करता है. क्या एक अभिनेता को उसके किरदार के लिए दोषी ठहराया जा सकता है, खासकर तब जब वह एक स्वीकृत और प्रमाणित स्क्रिप्ट पर काम कर रहा हो? यह एक नैतिक और कानूनी बहस को जन्म देता है.

अगली सुनवाई पर टिकी निगाहें

अब सभी की निगाहें 8 अगस्त 2025 को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जब अदालत में स्टेटस रिपोर्ट पेश की जाएगी. यह रिपोर्ट यह तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है कि एफआईआर रद्द होगी या नहीं.

ये भी पढ़ें- स्वतंत्रता दिवस पर बिहार को हेल्थकेयर की बड़ी सौगात, PMCH में 271 बेड वाला नया अस्पताल होगा शुरू