Mumbai News: डिजिटल धोखाधड़ी के मामले लगातार नए-नए रूप ले रहे हैं, और जालसाज अपनी पहचान छुपाने के लिए अब एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करने लगे हैं. हाल ही में पश्चिमी उपनगरों के एक वरिष्ठ नागरिक इस घोटाले का शिकार बने. उन्हें एक कथित पुलिस अधिकारी ने दिल्ली विस्फोट मामले की ऑनलाइन जांच के लिए सिग्नल ऐप डाउनलोड करने को कहा, और इस दौरान उनसे 16.5 लाख रुपये की धोखाधड़ी की गई. इस मामले ने एक बार फिर से डिजिटल सुरक्षा और साइबर अपराधों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
सिग्नल ऐप का लाभ और इसका गलत इस्तेमाल
सिग्नल ऐप एक एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म है जो उपयोगकर्ताओं को उनके फोन नंबर को गोपनीय रखने की सुविधा प्रदान करता है. इसमें केवल यूजर नाम की आवश्यकता होती है, और यह ऐप किसी प्रकार का मेटाडेटा नहीं इकट्ठा करता. यह विशेषता आमतौर पर पत्रकारों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और अन्य व्यक्तियों के लिए बनाई गई है, ताकि उनके नागरिक अधिकारों की सुरक्षा हो सके. हालांकि, अब जालसाज इस ऐप का गलत तरीके से इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे धोखाधड़ी के नए तरीके सामने आ रहे हैं.
इस घोटाले का शिकार बने बुजुर्ग व्यक्ति बीएमसी के सेवानिवृत्त ठेकेदार हैं. 11 दिसंबर को उन्हें एक कॉल आई, जिसमें कॉल करने वाले ने खुद को दिल्ली आतंकवाद विरोधी विभाग (एटीडी) का अधिकारी बताया. उसने बुजुर्ग पर दिल्ली विस्फोटों में संलिप्तता का आरोप लगाते हुए उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी जांच के लिए सिग्नल ऐप डाउनलोड करने को कहा. इसके बाद उन्हें ऐप पर एक वीडियो कॉल आया, जिसमें कॉल करने वाले ने खुद को पूर्व एनआईए प्रमुख सदानंद डेट बताया और उन्हें एक गंभीर आरोप में फंसा दिया.
धमकी और झांसा
वीडियो कॉल के दौरान, बुजुर्ग व्यक्ति पर 7 करोड़ रुपये की अवैध मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाया गया और उन्हें एक "गिरफ्तारी वारंट" भेजा गया. साथ ही, उन्हें धमकी दी गई कि यदि वे परिवार के साथ इस मामले पर चर्चा करते हैं तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने होंगे. इसके बाद उन्हें लगातार "मैं सुरक्षित हूं" जैसे संदेश भेजने के लिए कहा गया. फिर, जालसाजों ने बुजुर्ग से उनकी वित्तीय संपत्तियों का सत्यापन करने को कहा, और आश्वासन दिया कि सत्यापन के बाद उन्हें पूरा पैसा वापस मिल जाएगा.
16.5 लाख रुपये की ठगी
16 दिसंबर से 6 जनवरी के बीच, बुजुर्ग व्यक्ति ने जालसाजों को 16.5 लाख रुपये हस्तांतरित किए. लेकिन जब उन्होंने पैसे की वापसी के बारे में पूछा, तो सिग्नल ऐप पर उन्हें ब्लॉक कर दिया गया और जालसाजों ने उनका संपर्क तोड़ लिया. इस ठगी का पर्दाफाश तब हुआ जब बुजुर्ग ने अपने बेटे से इस घटना के बारे में बात की, और बेटे ने धोखाधड़ी का खुलासा किया.
एफआईआर और साइबर पुलिस की जांच
इसके बाद बुजुर्ग व्यक्ति ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग (एनसीसीआर) पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई और पश्चिम साइबर पुलिस से संपर्क किया. 19 जनवरी को इस मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई. साइबर पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है, ताकि इस धोखाधड़ी के पीछे के आरोपियों को पकड़ा जा सके और पीड़ित को न्याय मिल सके.
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