ITRCM Range: भारत अब सिर्फ हथियार खरीदने वाला देश नहीं रहा, बल्कि खुद को वैश्विक हथियार निर्माता और तकनीकी शक्ति के रूप में स्थापित कर रहा है. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) इसी दिशा में एक ऐसी मिसाइल पर काम कर रहा है, जिसे भारतीय रक्षा रणनीति का “गेमचेंजर” माना जा रहा है. इसका नाम है, ITRCM (Indigenous Technology Cruise Missile).
कहा जा रहा है कि यह मिसाइल भारत की ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल से भी ज़्यादा घातक होगी. जहां ब्रह्मोस की रेंज 450–500 किलोमीटर है, वहीं ITRCM दुश्मन को 1000 से 1500 किलोमीटर की दूरी से ही तबाह कर सकेगी.
क्यों है ITRCM ख़ास?
पूरी तरह स्वदेशी- इंजन, नेविगेशन और गाइडेंस सिस्टम भारत में ही विकसित.
मल्टी-प्लेटफॉर्म लॉन्च- ज़मीन, समुद्र और हवा से दागी जा सकेगी.
न्यूक्लियर पेलोड क्षमता-ज़रूरत पड़ने पर परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम.
सी-स्किमिंग फ्लाइट- बहुत कम ऊंचाई पर उड़ान भरकर दुश्मन के राडार से बच निकलने की ताक़त.
उन्नत टर्बोफैन इंजन- लंबी दूरी तक स्थिर और तेज़ उड़ान की गारंटी.
स्वदेशी GPS-NavIC तकनीक- गाइडेंस सिस्टम और सटीक लक्ष्यभेदन की रीढ़.
भारत की रणनीतिक ताक़त को मिलेगा नया आयाम
DRDO ने अप्रैल 2024 में इसका पहला परीक्षण किया था, जिसमें समुद्र-स्किमिंग क्षमता को परखा गया. सरकार का लक्ष्य है कि 2026 के मध्य तक इसे परिचालन के लिए तैयार कर दिया जाए.
पाकिस्तान और चीन पहले से लंबी दूरी की क्रूज़ मिसाइलों पर काम कर रहे हैं. ऐसे में ITRCM भारत की डिटरेंस (निवारण) क्षमता को और मजबूत बनाएगी. खासकर भारतीय नौसेना के लिए यह मिसाइल किसी वरदान से कम नहीं होगी, क्योंकि यह समुद्री इलाकों में दुश्मन की पनडुब्बियों और ठिकानों को सुरक्षित दूरी से ही निशाना बना पाएगी.
भविष्य की ओर- स्टील्थ और हाइपरसोनिक वर्ज़न
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में ITRCM को स्टील्थ टेक्नोलॉजी से लैस किया जाएगा, जिससे यह आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम को भी धोखा दे सके. साथ ही इसे हाइपरसोनिक वर्ज़न में अपग्रेड करने की संभावनाएं भी जताई जा रही हैं, ठीक वैसे ही जैसे ब्रह्मोस-II प्रोजेक्ट में देखने को मिला है.
साफ है कि ITRCM सिर्फ एक मिसाइल नहीं, बल्कि भारत की रणनीतिक स्वतंत्रता और तकनीकी आत्मनिर्भरता का प्रतीक बनने वाली है. 2026 के बाद यह मिसाइल भारतीय रक्षा ताक़त को उस ऊंचाई पर ले जाएगी, जहां दुश्मन सिर्फ सोचेगा और भारत पहले ही वार कर चुका होगा.
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