वॉशिंगटन/न्यूयॉर्क: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर सुर्खियों में हैं. इस बार उन्होंने यूक्रेन में चल रहे भीषण युद्ध को लेकर एक ऐसा प्रस्ताव सामने रखा है, जो न केवल रूस और यूक्रेन बल्कि चीन और नाटो (NATO) के भविष्य संबंधों को भी प्रभावित कर सकता है.
ट्रंप ने दावा किया है कि अगर नाटो उनके साथ खड़ा हो जाए और कुछ ठोस फैसले ले, तो वह इस युद्ध को "बहुत कम समय में खत्म" कर सकते हैं. उन्होंने यह बात अपने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म "ट्रुथ सोशल" पर साझा की और सीधे तौर पर नाटो, रूस और चीन के प्रति अपनी रणनीतिक सोच स्पष्ट कर दी.
ट्रंप का प्लान: रूस पर कड़े प्रतिबंध
ट्रंप के अनुसार, वर्तमान में नाटो संगठन यूक्रेन युद्ध को खत्म करने को लेकर पूरी तरह से प्रतिबद्ध नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि कई नाटो सदस्य देश अभी भी रूस से तेल और गैस खरीद रहे हैं, जिससे सीधे तौर पर पुतिन की युद्ध मशीन को आर्थिक सहायता मिल रही है.
उन्होंने स्पष्ट किया कि वे व्यक्तिगत रूप से रूस पर अत्यंत कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने के लिए तैयार हैं, लेकिन तभी जब नाटो के सभी सदस्य देश एकजुट होकर वैसा ही करें.
"मैं प्रतिबंध लगाने को तैयार हूं, लेकिन तब जब नाटो के सदस्य देश भी इस दिशा में कदम बढ़ाएं. सिर्फ अमेरिका को ही अकेला योद्धा बनकर लड़ने की जरूरत नहीं है," ट्रंप ने कहा.
चीन पर 50% से 100% टैरिफ का प्रस्ताव
रूस पर प्रतिबंधों के साथ-साथ ट्रंप ने चीन पर भी कड़ा प्रहार किया है. उन्होंने दावा किया कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, परोक्ष रूप से पुतिन को फंडिंग कर रहे हैं. ट्रंप के अनुसार, चीनी कंपनियां रूस को सैन्य और तकनीकी सहायता दे रही हैं और यही सहायता यूक्रेन युद्ध को लंबा खींचने में मदद कर रही है.
ट्रंप ने सुझाव दिया कि:
उनका मानना है कि इस तरह के भारी-भरकम टैक्सेस से चीन की रूस पर पकड़ कमजोर होगी, और पुतिन को पीछे हटने के लिए मजबूर होना पड़ेगा.
ट्रंप ने नाटो को दिया स्पष्ट अल्टीमेटम
ट्रंप ने अपने बयान में नाटो के नेतृत्व को सीधे तौर पर संबोधित करते हुए कहा, "अगर आप मेरी बात मानते हैं, तो ये युद्ध जल्द ही खत्म हो सकता है और हजारों जानें बचाई जा सकती हैं. लेकिन अगर आप अनिश्चितता और बहसों में फंसे रहेंगे, तो अमेरिका का समय, ऊर्जा और पैसा व्यर्थ जाएगा."
उनके इस बयान को एक तरह का अल्टीमेटम माना जा रहा है, जिसमें उन्होंने नाटो से सामूहिक एक्शन की अपेक्षा जताई है.
अगर मैं राष्ट्रपति होता, युद्ध शुरू नहीं होता
ट्रंप ने एक बार फिर दावा किया कि अगर वे 2022 में अमेरिका के राष्ट्रपति होते, तो यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध की नौबत ही नहीं आती. यह बयान उन्होंने कई बार दोहराया है, लेकिन इस बार उन्होंने इसे अपने प्रस्ताव के साथ जोड़ते हुए यह भी कहा कि, "यह युद्ध अमेरिका की कूटनीतिक विफलता का परिणाम है. मेरे कार्यकाल में, रूस को कभी ऐसी हिम्मत नहीं होती."
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