नई दिल्ली: डिजिटल ठगों के मामले आजकल आम हो चले हैं. दक्षिण दिल्ली से सामने आए एक हैरान कर देने वाले मामले में, 78 वर्षीय पूर्व बैंक अधिकारी नरेश मल्होत्रा को साइबर ठगों ने 23 करोड़ रुपये का चूना लगा दिया. यह धोखाधड़ी एक फोन कॉल से शुरू हुई, जिसमें ठगों ने बैंकर को डराकर और भ्रमित कर के करोड़ों रुपये की ठगी की. आइए जानते हैं, अगर आपके पास भी ऐसे कॉल आएं तो आपको क्या सावधानियां बरतनी चाहिए.
साइबर ठगों की चाल: कैसे हुई बैंकर से ठगी?
ठगों ने खुद को एक टेलीकॉम कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी बताकर बैंकर से संपर्क किया. उन्होंने बताया कि बैंकर का मोबाइल नंबर ‘कानून के खिलाफ गतिविधियों’ में इस्तेमाल हो रहा है. मुंबई पुलिस का हवाला देकर बैंकर को डरा-धमकाकर 20 अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए उनके खाते से करोड़ों रुपये निकाल लिए. यह एक आम तरीका है, जिसमें धमकी देकर तुरंत पैसे भेजने को कहा जाता है, जो पूरी तरह गलत और धोखाधड़ी भरा होता है.
आपके पास आए ऐसे कॉल? तुरंत करें ये 3 काम
सबसे पहले Sanchar Saathi ऐप डाउनलोड करके देखें कि आपका नंबर या आधार किसी अन्य मोबाइल नंबर पर तो इस्तेमाल नहीं हो रहा. अगर अनाधिकृत उपयोग मिले तो तुरंत रिपोर्ट करें. तीन रिपोर्ट्स पर नंबर ब्लॉक हो जाता है और दस पर IMEI भी ब्लॉक हो जाता है.
अगर कॉल किसी अंतरराष्ट्रीय नंबर से आई हो, तो उसी ऐप के माध्यम से तुरंत रिपोर्ट करें. यह साइबर अपराधियों की गतिविधियों पर रोक लगाने में मदद करता है. किसी भी धोखाधड़ी या साइबर फ्रॉड की स्थिति में तुरंत 1930 साइबर क्राइम पोर्टल पर मामला दर्ज करें ताकि पुलिस त्वरित कार्रवाई कर सके.
विशेषज्ञों की चेतावनी
भारतीय साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) ने साफ किया है कि डिजिटल गिरफ्तारी जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती. पुलिस, CBI, RBI या ED कभी भी डिजिटल माध्यम से किसी को गिरफ्तार नहीं करते. ऐसे कॉल या मैसेज आने पर पहले पहचान सत्यापित करें, परिवार या दोस्तों से सलाह लें, और फिर ही किसी भी वित्तीय लेनदेन का निर्णय लें.
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