India LPG Consumption: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब भारत की रसोई गैस सप्लाई पर भी दिखने लगा है. ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष के कारण दुनिया का अहम समुद्री रास्ता स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अस्थिर हो गया है. यह वही रास्ता है, जिससे भारत को बड़ी मात्रा में एलपीजी मिलती है. ऐसे हालात में गुजरात के बंदरगाहों पर गैस लेकर पहुंचे दो भारतीय जहाजों ने थोड़ी राहत जरूर दी है.
भारत में एलपीजी की मांग लगातार बढ़ रही है. पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) की रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी 2026 में देश की गैस खपत करीब 2822 मीट्रिक टन रही. इससे पहले जनवरी में यह 3034 मीट्रिक टन और दिसंबर 2025 में 3068 मीट्रिक टन थी.
भारत अपनी कुल जरूरत का करीब 60 प्रतिशत एलपीजी विदेशों से मंगाता है. वहीं प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के अनुसार, इस आयात का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते ही आता है. यही वजह है कि वहां तनाव बढ़ने से भारत की चिंता भी बढ़ गई है.
युद्ध का असर और सप्लाई पर खतरा
पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष ने समुद्री रास्तों को असुरक्षित बना दिया है. अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत की खबरों के बाद हालात और बिगड़ गए हैं. ऐसे में भारत को गैस सप्लाई रुकने का खतरा सता रहा है.
इसी स्थिति को देखते हुए सरकार ने घरेलू उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं. जानकारी के मुताबिक, गैस उत्पादन को तुरंत करीब 25 प्रतिशत तक बढ़ाने की कोशिश की जा रही है, ताकि जरूरत के समय देश में कमी न हो.
आम लोगों को प्राथमिकता
सरकार ने साफ कहा है कि इस समय सबसे ज्यादा ध्यान आम उपभोक्ताओं पर रहेगा. यानी जो लोग घर में रसोई गैस इस्तेमाल करते हैं, उन्हें पहले गैस उपलब्ध कराई जाएगी.
इसके साथ ही गैस की जमाखोरी और कालाबाजारी को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं. युद्ध की खबरों के कारण कई जगह लोग ज्यादा सिलेंडर जमा करने लगे हैं, लेकिन प्रशासन इस पर नजर रखे हुए है और कार्रवाई भी कर रहा है.
भारत पहुंचे दो बड़े गैस जहाज
इन सबके बीच एक राहत की खबर भी आई है. दो भारतीय जहाज, ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’सुरक्षित रूप से भारत पहुंच गए हैं. ये जहाज गुजरात के मुंद्रा पोर्ट और वाडिनार पोर्ट पर पहुंचे हैं. इन दोनों जहाजों में कुल मिलाकर करीब 92,000 मीट्रिक टन एलपीजी लाई गई है. अंदाजा लगाया जा रहा है कि इस गैस से देश के 64 लाख से ज्यादा सिलेंडर भरे जा सकते हैं, जो बड़ी राहत देने वाला है.
आगे क्या हो सकता है
हालात अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हैं और पश्चिम एशिया में तनाव जारी है. ऐसे में भारत सरकार लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और हर जरूरी कदम उठा रही है, ताकि देश में गैस की सप्लाई बनी रहे. कुल मिलाकर, यह स्थिति एक चेतावनी भी है कि भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए धीरे-धीरे आत्मनिर्भर बनना होगा, ताकि ऐसे संकट का असर कम से कम पड़े.
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