Illegal Immigrants West Bengal: पश्चिम बंगाल में कथित अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को लेकर सियासत तेज होती जा रही है. भाजपा ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए दावा किया है कि उत्तर 24 परगना जिले के हाकिमपुर सीमा क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोग बांग्लादेश लौटने के लिए जमा हो रहे हैं. पार्टी ने इसे राज्य में शुरू की गई ‘डिटेक्ट, डिलीट एंड डिपोर्ट’ नीति का असर बताया है.
"सख्त कार्रवाई के बाद बदले हालात"
भाजपा ने अपने पोस्ट में कहा कि जब SIR प्रक्रिया शुरू की गई थी, तब भी सीमा क्षेत्रों में इसी तरह की गतिविधियां देखने को मिली थीं. पार्टी का आरोप है कि अब होल्डिंग सेंटर बनाए जाने और कथित अवैध प्रवासियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाए जाने के बाद सीमा क्षेत्रों में फिर से लोगों की भीड़ जुटने लगी है.
पार्टी नेताओं का कहना है कि लंबे समय से राज्य के अलग-अलग हिस्सों में अवैध रूप से रह रहे लोगों की पहचान की जा रही है और उनके खिलाफ कार्रवाई की तैयारी तेज कर दी गई है.
People have once again gathered at the Hakimpur border area in North 24 Parganas, to return to Bangladesh.
— BJP West Bengal (@BJP4Bengal) May 26, 2026
Similar scenes were witnessed when the SIR process began. Now, after the opening of holding centres and the tough stance taken by the BJP government against illegal… pic.twitter.com/NLyDMtsMoD
मालदा में बनाया गया होल्डिंग सेंटर
भाजपा के मुताबिक, मालदा में एक विशेष होल्डिंग सेंटर तैयार किया गया है. यहां उन लोगों को रखा जाएगा, जिनकी पहचान कथित अवैध प्रवासी के रूप में होगी. इसके बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी कर उन्हें बांग्लादेश भेजने की कार्रवाई की जाएगी. राजनीतिक हलकों में इस कदम को भाजपा की बड़ी रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है. पार्टी लगातार सीमा सुरक्षा और अवैध घुसपैठ को बड़ा मुद्दा बनाती रही है.
विपक्ष ने उठाए सवाल
हालांकि, इस पूरे मामले को लेकर विपक्षी दल भाजपा के दावों पर सवाल खड़े कर रहे हैं. विपक्ष का कहना है कि इस तरह के मुद्दों को राजनीतिक फायदा उठाने के लिए हवा दी जा रही है. वहीं प्रशासन की तरफ से अब तक इस वीडियो या कथित भीड़ को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.
बंगाल की राजनीति में फिर गरमाया प्रवासियों का मुद्दा
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में अवैध प्रवासियों और सीमा सुरक्षा का मुद्दा आने वाले दिनों में और ज्यादा राजनीतिक रंग ले सकता है. खासतौर पर सीमा से जुड़े जिलों में यह मुद्दा चुनावी बहस का बड़ा केंद्र बनता दिख रहा है.
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