ISRO Cryogenic Engine: जिस तकनीक को कभी भारत को देने से दुनिया के कई देशों ने मना कर दिया था, आज उसी तकनीक में भारत ने बड़ी सफलता हासिल कर ली है. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के चेयरमैन वी. नारायणन ने कहा है कि भारत अब क्रायोजेनिक इंजन तकनीक में पूरी तरह आत्मनिर्भर बन चुका है. उन्होंने बताया कि यह उपलब्धि भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक बड़ा मील का पत्थर है और इससे आने वाले वर्षों में कई बड़े मिशन पूरे किए जाएंगे.
गगनयान मिशन की तैयारी तेज
वी. नारायणन ने कहा कि ISRO इस समय पहले मानवरहित गगनयान मिशन की तैयारी कर रहा है. इस मिशन के सफल होने के बाद उसके नतीजों की समीक्षा की जाएगी और फिर इंसानों को अंतरिक्ष में भेजने वाले मिशन पर आगे बढ़ा जाएगा. उन्होंने कहा कि गगनयान कार्यक्रम अब फ्लाइट वैलिडेशन के चरण में पहुंच चुका है और इसके लिए जरूरी ज्यादातर काम पूरे हो चुके हैं.
#WATCH | Bengaluru, Karnataka: ISRO Chairman V Narayanan says, “…a test that was conducted, excluding the thrust chamber…we have taken close to 90% of the thrust load…it was a major achievement and milestone, and now we are getting ready for the engine test…satellites are… pic.twitter.com/3p7ZBsptmx
— ANI (@ANI) June 27, 2026
चंद्रयान-4 लाएगा चंद्रमा से मिट्टी
ISRO प्रमुख ने बताया कि चंद्रयान-4 भारत का पहला ऐसा मिशन होगा, जो चंद्रमा से मिट्टी और दूसरे नमूने लेकर वापस आएगा. इसके बाद जापान के साथ मिलकर चंद्रयान-5 मिशन लॉन्च किया जाएगा. इस मिशन में करीब 350 किलोग्राम का रोवर भेजा जाएगा, जो लगभग 100 दिनों तक चंद्रमा पर काम कर सकेगा. जबकि चंद्रयान-3 का रोवर सिर्फ 25 किलोग्राम का था और उसने 14 दिन तक काम किया था.
2035 तक स्पेस स्टेशन, 2040 तक चंद्रमा पर भारतीय
वी. नारायणन ने भारत का भविष्य का स्पेस प्लान भी बताया. उन्होंने कहा कि भारत का लक्ष्य 2035 तक अपना स्पेस स्टेशन बनाना है. इसके अलावा 2040 तक भारतीय रॉकेट की मदद से एक भारतीय अंतरिक्ष यात्री को चंद्रमा पर भेजने की तैयारी की जा रही है.
तकनीक नहीं मिली, तो खुद बना लिया इंजन
ISRO प्रमुख ने कहा कि एक समय ऐसा था जब दूसरे देशों ने भारत को क्रायोजेनिक इंजन तकनीक देने से इनकार कर दिया था. लेकिन भारत ने हार नहीं मानी और खुद इस तकनीक को विकसित किया. उन्होंने कहा कि आज भारत के पास तीन अलग-अलग क्रायोजेनिक प्रोपल्शन सिस्टम हैं और इस क्षेत्र में कई रिकॉर्ड भी बनाए गए हैं.
छोटे रॉकेट से शुरू हुआ था सफर
वी. नारायणन ने बताया कि भारत ने 1963 में सिर्फ 7 किलोग्राम के एक छोटे साउंडिंग रॉकेट से अपना अंतरिक्ष सफर शुरू किया था. आज देश दुनिया के सबसे आधुनिक लॉन्च व्हीकल और सैटेलाइट बना रहा है. उन्होंने कहा कि अब भारत सिर्फ अपने ही नहीं, बल्कि कई दूसरे देशों के सैटेलाइट भी लॉन्च कर रहा है.
ISRO ने हासिल की कई बड़ी उपलब्धियां
ISRO अब तक 105 से ज्यादा लॉन्च व्हीकल मिशन और 135 सैटेलाइट मिशन पूरे कर चुका है. इसके अलावा 34 देशों के 434 सैटेलाइट भी लॉन्च किए जा चुके हैं. इस काम में करीब 450 उद्योग, 400 से ज्यादा स्टार्टअप और 130 से अधिक शैक्षणिक संस्थान ISRO के साथ मिलकर काम कर रहे हैं.
सेमी-क्रायोजेनिक इंजन पर भी बड़ी सफलता
ISRO प्रमुख ने बताया कि 200 टन क्षमता वाले सेमी-क्रायोजेनिक इंजन के विकास में भी बड़ी सफलता मिली है. हाल ही में हुए पावरहेड टेस्ट में इंजन लगभग 90 फीसदी थ्रस्ट तक पहुंच गया है. अब अगला कदम पूरे इंजन का परीक्षण करना होगा.
जल्द होंगे नए लॉन्च
वी. नारायणन ने कहा कि ISRO के अगले सैटेलाइट पूरी तरह तैयार हैं और जल्द ही उनकी लॉन्च तारीखों का ऐलान किया जाएगा. उन्होंने यह भी बताया कि PSLV मिशन में आई पिछली दिक्कतों की वजह समझ ली गई है और अब ISRO पूरी तैयारी के साथ दोबारा लॉन्च मिशन शुरू करने जा रहा है.
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