ईरान में फिर छिड़ी पेट्रोल पर बहस, राष्ट्रपति पेजेशकियन बोले- "कीमतें बढ़नी चाहिए, लेकिन जल्दबाजी नहीं करेंगे"

Masoud Pezeshkian: ईरान एक बार फिर पेट्रोल की कीमतों को लेकर राजनीतिक और आर्थिक बहस के केंद्र में आ गया है. राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने हाल ही में संकेत दिया है कि देश में पेट्रोल की मौजूदा कीमतों को "अवास्तविक रूप से कम" नहीं रखा जा सकता.

Debate on petrol broke out again in Iran President Pejeshkian said The prices should increase
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Masoud Pezeshkian: ईरान एक बार फिर पेट्रोल की कीमतों को लेकर राजनीतिक और आर्थिक बहस के केंद्र में आ गया है. राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने हाल ही में संकेत दिया है कि देश में पेट्रोल की मौजूदा कीमतों को "अवास्तविक रूप से कम" नहीं रखा जा सकता. हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार बिना ठोस योजना और जनसहमति के कोई कठोर फैसला नहीं लेगी.

पेजेशकियन के इस बयान ने जनता के बीच हलचल मचा दी है. कई लोगों को डर है कि अगर ईंधन महंगा हुआ, तो 2019 जैसी हिंसक प्रदर्शन और विरोध की स्थिति फिर से पैदा हो सकती है, जब पेट्रोल की कीमतों में अचानक वृद्धि से देशभर में बवाल मच गया था.

“पानी से सस्ता है पेट्रोल” 

उत्तर-पश्चिमी शहर उर्मिया में एक सभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति पेजेशकियन ने कहा, “इसमें कोई शक नहीं कि गैसोलीन की कीमत बढ़नी चाहिए. कौन कहता है कि पेट्रोल सिर्फ 1,500 तोमन प्रति लीटर हो? आज तो पानी भी इससे महंगा है.” उन्होंने कहा कि पेट्रोल की कीमतें बढ़ाना एक आर्थिक आवश्यकता है, लेकिन यह प्रक्रिया धीरे-धीरे और सोच-समझकर ही आगे बढ़ेगी. उन्होंने कहा, “यह आसान फैसला नहीं है. इसके लिए हमें समाज, अर्थव्यवस्था और नागरिकों की स्थिति, सभी पहलुओं पर विचार करना होगा.” 

आर्थिक दबाव और जनता की चिंताएं

ईरान की अर्थव्यवस्था इस समय अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और मुद्रास्फीति के दोहरे दबाव में है. सरकार के पास सब्सिडी पर खर्च बढ़ता जा रहा है, जबकि राजस्व सीमित है. ऐसे में पेट्रोल की कीमतें बढ़ाना सरकार के लिए राजकोषीय राहत का रास्ता हो सकता है, लेकिन जनता के लिए यह जीवनयापन की लागत में बड़ा झटका साबित हो सकता है.

वहीं दूसरी ओर, कई नागरिकों को आशंका है कि इस बार भी कहीं पिछली गलतियों की पुनरावृत्ति न हो जाए. 2019 में इसी मुद्दे पर देशभर में हुए विरोध प्रदर्शनों में सैकड़ों लोगों की मौत हुई थी और सरकार को भारी आलोचना झेलनी पड़ी थी.

पेजेशकियन की चुनौती: आर्थिक सुधार बनाम जनभावनाएं

विश्लेषकों का कहना है कि राष्ट्रपति पेजेशकियन के सामने सबसे बड़ी चुनौती आर्थिक स्थिरता और राजनीतिक संवेदनशीलता के बीच संतुलन बनाने की है. वह न तो जनता का विश्वास खोना चाहते हैं और न ही बढ़ते वित्तीय दबाव को नज़रअंदाज़ कर सकते हैं. उनका बयान संकेत देता है कि ईरान में आने वाले महीनों में ईंधन सब्सिडी नीति पर पुनर्विचार हो सकता है, लेकिन यह कदम धीरे, योजनाबद्ध और संवाद के साथ उठाया जाएगा.

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