ऑस्ट्रेलिया के सिडनी से एक बेहद दुखद मामला सामने आया है. नॉर्दर्न बीचेस इलाके में 16 साल की एक लड़की गंभीर हालत में मिली थी. उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया और आईसीयू में भर्ती कराया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. शुरुआती जांच में इस मामले को गर्दन पर दबाव और सांस रुकने से जुड़े एक खतरनाक चलन से जोड़कर देखा जा रहा है.
सिडनी पुलिस मामले की जांच कर रही है. पुलिस ने अभी तक पूरी मेडिकल रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की है. हालांकि, ऑस्ट्रेलिया के राष्ट्रीय प्रसारक एबीसी और ‘सिडनी मॉर्निंग हेराल्ड’ समेत कई मीडिया रिपोर्ट्स में पुलिस सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि घटना के दौरान लड़की की सांस रुकने के बाद वह बेहोश हो गई थी. इसके बाद उसकी हालत बिगड़ती चली गई और अस्पताल में उसकी जान नहीं बचाई जा सकी.
क्या है ‘सेक्सुअल स्ट्रैंगुलेशन’?
इस घटना ने संबंधों के दौरान गर्दन पर दबाव डालने वाले खतरनाक चलन को लेकर चिंता बढ़ा दी है. ऑस्ट्रेलिया में स्वास्थ्य और संबंध विशेषज्ञ लंबे समय से युवाओं को इसके जोखिमों के बारे में चेतावनी देते रहे हैं.
कई युवा इंटरनेट पर देखी गई चीजों को बिना उनके खतरे को समझे असल जिंदगी में आजमाने लगते हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक गर्दन पर दबाव पड़ने से दिमाग तक ऑक्सीजन और खून की सप्लाई प्रभावित हो सकती है. कई बार बाहर से कोई बड़ा निशान दिखाई नहीं देता, लेकिन अंदर गंभीर नुकसान हो सकता है.
इससे बेहोशी, दिमाग को नुकसान, याददाश्त से जुड़ी परेशानी और गंभीर स्थिति में मौत तक हो सकती है. यही वजह है कि विशेषज्ञ इसे बेहद गंभीर खतरा मानते हैं.
इंटरनेट पर हिंसक कंटेंट को लेकर उठे सवाल
लड़की की मौत के बाद ऑस्ट्रेलिया में इंटरनेट पर मौजूद हिंसक यौन कंटेंट को लेकर भी बहस तेज हो गई है. सहमति और सुरक्षित यौन शिक्षा पर काम करने वाली सोशल एक्टिविस्ट और ‘टीच अस कंसेंट’ की संस्थापक चानेल कॉन्टोस ने इस घटना पर चिंता जताई.
उन्होंने कहा कि इंटरनेट पर मौजूद हिंसक सामग्री युवाओं की सोच को प्रभावित कर सकती है. उनके मुताबिक, कई ऑनलाइन सामग्री में हिंसा को सामान्य या आनंद से जुड़ी चीज की तरह दिखाया जाता है, जबकि इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं.
कॉन्टोस ने कहा कि युवाओं को इस तरह के खतरों के बारे में सही जानकारी देना जरूरी है. उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए परिवार, स्कूल और समाज को मिलकर काम करना होगा.
2021 में कॉन्टोस ने ऑस्ट्रेलिया के स्कूलों में यौन दुर्व्यवहार और सहमति को लेकर देशव्यापी अभियान चलाया था. इसके बाद वहां यौन शिक्षा से जुड़े नियमों में बदलाव किए गए थे.
विशेषज्ञ बोले- इसे सुरक्षित मानना गलत
सोशल मीडिया और इंटरनेट पर कई बार यह दावा किया जाता है कि सावधानी बरतकर गर्दन पर दबाव डालना सुरक्षित हो सकता है. विशेषज्ञ इस सोच को खतरनाक मानते हैं. उनका कहना है कि इसमें जोखिम हमेशा बना रहता है और इसके नतीजे अचानक गंभीर हो सकते हैं.
2024 में मेलबर्न यूनिवर्सिटी और क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी की एक रिसर्च में भी इस चलन को लेकर चिंता सामने आई थी. करीब 4,700 युवाओं पर किए गए अध्ययन में बड़ी संख्या में लोगों ने बताया कि उन्होंने अपने रिश्तों में इस तरह के अनुभव का सामना किया था.
रिसर्च ने यह भी दिखाया कि कई युवाओं को कम उम्र में ही इस तरह के अनुभव होने लगे थे. विशेषज्ञों के मुताबिक यह आंकड़ा बताता है कि युवाओं के बीच सही जानकारी और सुरक्षित संबंधों को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है.
इंटरनेट संस्कृति बनी बड़ी चिंता
आज बच्चों और युवाओं के हाथ में स्मार्टफोन और इंटरनेट आसानी से उपलब्ध है. ऐसे में उन्हें कम उम्र में ही ऐसा कंटेंट दिखाई दे सकता है, जिसे वे सही या सामान्य समझने लगते हैं.
समस्या तब और बढ़ जाती है जब युवा इंटरनेट पर दिखाई जाने वाली चीजों और वास्तविक जिंदगी के बीच का फर्क नहीं समझ पाते. विशेषज्ञों का कहना है कि स्कूलों और परिवारों में सहमति, सम्मान, स्वस्थ रिश्तों और ऑनलाइन कंटेंट के खतरों को लेकर खुलकर बात होनी चाहिए.
सिडनी की इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया है कि युवाओं को इंटरनेट पर मौजूद हिंसक सामग्री से बचाने और उन्हें सही जानकारी देने के लिए समाज और सरकारों को कितनी जल्दी कदम उठाने की जरूरत है.
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