चीन में धार्मिक आजादी को लेकर एक बार फिर सवाल उठे हैं. ब्रिटिश अखबार द टेलीग्राफ की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग के शासन के दौरान पिछले 10 साल में 10 हजार से ज्यादा ईसाइयों को गिरफ्तार किया गया.
रिपोर्ट के अनुसार, कार्रवाई उन लोगों के खिलाफ की गई जो सरकार से मान्यता प्राप्त चर्चों की बजाय अंडरग्राउंड या अनरजिस्टर्ड चर्चों में प्रार्थना करते थे. हालांकि, चीन सरकार ने इन सभी आरोपों को खारिज किया है.
रिपोर्ट में क्या दावा किया गया?
रिपोर्ट के मुताबिक, चीन में सिर्फ सरकार के नियंत्रण वाले चर्चों को आधिकारिक मान्यता मिली हुई है.
दावा किया गया है कि इन चर्चों में प्रार्थना शुरू होने से पहले देशभक्ति गीत गाए जाते हैं और चर्च में राष्ट्रपति शी जिनपिंग की तस्वीर भी लगाई जाती है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि जो लोग सरकारी व्यवस्था से बाहर चलने वाले चर्चों में जाते हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाती है.
एक ईसाई ने सुनाई अपनी कहानी
द टेलीग्राफ की रिपोर्ट में टीजे नाम के एक ईसाई की कहानी भी बताई गई है. सुरक्षा कारणों से उनकी असली पहचान सार्वजनिक नहीं की गई.
उनका दावा है कि एक रात पुलिस उनके घर पहुंची, दरवाजा तोड़कर अंदर आई और परिवार से पूछताछ की.
टीजे के अनुसार, उनकी तीन साल की बेटी लगातार रो रही थी, लेकिन उन्हें उसके पास जाने की भी अनुमति नहीं दी गई. उनका कहना है कि उनका कसूर सिर्फ इतना था कि वह सरकारी चर्च की बजाय अंडरग्राउंड चर्च में प्रार्थना करते थे.
10 हजार से ज्यादा गिरफ्तारियों का दावा
रिपोर्ट में मानवाधिकार संगठन चाइनाएड के संस्थापक बॉब फू के हवाले से दावा किया गया है कि पिछले एक दशक में 10 हजार से ज्यादा ईसाइयों को गिरफ्तार किया गया.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि हाल ही में एक चर्च पर छापेमारी के दौरान 30 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया था.
हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है.
क्या है 'सिनिसाइजेशन' नीति?
रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने 2015 में 'सिनिसाइजेशन' नाम की नीति लागू की थी.
इस नीति के तहत धार्मिक संगठनों से कहा गया कि वे अपनी धार्मिक पहचान से पहले चीन और कम्युनिस्ट पार्टी के प्रति वफादारी दिखाएं.
रिपोर्ट का दावा है कि इसके बाद अंडरग्राउंड चर्चों पर कार्रवाई तेज हुई और कई धार्मिक स्थलों को बंद कर दिया गया.
चीन में किन धर्मों को मान्यता है?
चीन आधिकारिक तौर पर पांच धर्मों को मान्यता देता है.
इनमें बौद्ध, ताओ, इस्लाम, प्रोटेस्टेंट और कैथोलिक धर्म शामिल हैं.
हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक यह मान्यता केवल उन्हीं धार्मिक संस्थानों को मिलती है, जो सरकार के नियमों के तहत काम करते हैं.
चीन सरकार ने क्या कहा?
चीन ने इन सभी आरोपों को गलत बताया है. चीन का कहना है कि देश में सभी धार्मिक मामलों का संचालन कानून के अनुसार किया जाता है और अदालतें हर मामले में कानूनी प्रक्रिया का पालन करती हैं.
चीन का यह भी कहना है कि कुछ विदेशी और चीन विरोधी ताकतें धार्मिक स्वतंत्रता और मानवाधिकार के नाम पर उसकी छवि खराब करने की कोशिश कर रही हैं.
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