UNSC में भारत की नई दावेदारी... कैसे होती है वोटिंग, जीतने के लिए कितना चाहिए समर्थन? जानें सबकुछ

भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की अस्थायी सदस्यता के लिए एक बार फिर अपनी दावेदारी पेश कर दी है. भारत 2028-29 के कार्यकाल के लिए इस सीट को हासिल करने की कोशिश कर रहा है.

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भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की अस्थायी सदस्यता के लिए एक बार फिर अपनी दावेदारी पेश कर दी है. भारत 2028-29 के कार्यकाल के लिए इस सीट को हासिल करने की कोशिश कर रहा है. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत के विजन को ‘SHANTI’ के नाम से दुनिया के सामने रखा है.

इस चुनाव में जीत के लिए भारत को संयुक्त राष्ट्र महासभा में दो-तिहाई बहुमत हासिल करना होगा. यानी 193 सदस्य देशों में से करीब 128-129 देशों का समर्थन जरूरी होगा.

भारत इससे पहले 8 बार UNSC का अस्थायी सदस्य रह चुका है. अब नजर इस बात पर है कि इस बार भारत की राह कितनी आसान होगी और स्थायी सदस्य बनने का सपना कब पूरा होगा.

UNSC चुनाव में भारत की स्थिति कितनी मजबूत?

दुनिया इस समय कई बड़े संकटों से गुजर रही है. रूस-यूक्रेन युद्ध, गाजा संघर्ष और ईरान-इजराइल तनाव जैसे मुद्दों के बीच भारत ने अपनी दावेदारी पेश की है.

भारत खुद को विकासशील देशों यानी ग्लोबल साउथ की आवाज के तौर पर पेश कर रहा है. भारत का कहना है कि वह दुनिया में शांति, बातचीत और कूटनीति को बढ़ावा देने के लिए काम करेगा.

भारत के पक्ष में कई देशों का समर्थन भी सामने आया है. अमेरिका, फ्रांस, ऑस्ट्रिया, फिजी और श्रीलंका जैसे देशों ने भारत की उम्मीदवारी का समर्थन किया है.

हालांकि, भारत के सामने चुनौती भी है. एशिया-प्रशांत क्षेत्र की एक सीट के लिए ताजिकिस्तान भी चुनाव मैदान में है. ताजिकिस्तान को मुस्लिम देशों के संगठन OIC के कई देशों का समर्थन मिलने की उम्मीद है. ऐसे में भारत को अपने पक्ष में ज्यादा से ज्यादा देशों को जोड़ने के लिए कूटनीतिक प्रयास करने होंगे.

भारत कितनी बार UNSC का सदस्य रह चुका है?

भारत अब तक 8 बार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य चुना जा चुका है.

भारत का सबसे बड़ा योगदान संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में रहा है. भारत ने दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे 50 से ज्यादा शांति मिशनों में 3 लाख से अधिक सैनिक भेजे हैं.

इसके अलावा भारत ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई, समुद्री सुरक्षा, उपनिवेशवाद के विरोध और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे मुद्दों पर भी अपनी मजबूत भूमिका निभाई है.

कोरोना महामारी के दौरान भारत ने वैक्सीन उपलब्ध कराकर कई देशों की मदद की थी, जिसे उसकी वैश्विक भूमिका के तौर पर देखा गया.

भारत का असली लक्ष्य क्या है?

भारत सिर्फ अस्थायी सदस्य बनकर संतुष्ट नहीं होना चाहता. उसका सबसे बड़ा लक्ष्य संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता हासिल करना है.

अस्थायी सदस्य और स्थायी सदस्य में बड़ा अंतर होता है. अस्थायी सदस्य केवल 2 साल के लिए चुने जाते हैं और उनके पास वीटो पावर नहीं होती.

वहीं, स्थायी सदस्यों का कार्यकाल हमेशा के लिए होता है और उन्हें वीटो का अधिकार मिलता है.

भारत स्थायी सदस्यता का हकदार क्यों मानता है?

भारत का कहना है कि दुनिया की सबसे बड़ी आबादी, बड़ी अर्थव्यवस्था और वैश्विक शांति में योगदान के कारण उसे UNSC में स्थायी जगह मिलनी चाहिए.

अमेरिका, रूस, फ्रांस और ब्रिटेन कई बार भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन कर चुके हैं. हालांकि, चीन इस मामले में भारत का विरोध करता रहा है.

भारत के साथ जापान, जर्मनी और ब्राजील भी UNSC सुधार की मांग कर रहे हैं. इन देशों का कहना है कि 1945 में बना संयुक्त राष्ट्र ढांचा आज की दुनिया की वास्तविक स्थिति को नहीं दिखाता.

UNSC कैसे काम करता है?

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का मुख्य काम दुनिया में शांति और सुरक्षा बनाए रखना है.

UNSC में कुल 15 सदस्य होते हैं. इनमें 5 स्थायी और 10 अस्थायी सदस्य होते हैं.

स्थायी सदस्य देशों को P5 कहा जाता है. इनमें अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन शामिल हैं.

इन पांचों देशों के पास वीटो पावर होती है. इसका मतलब है कि अगर किसी प्रस्ताव के पक्ष में ज्यादातर देश वोट कर दें, लेकिन कोई एक स्थायी सदस्य वीटो कर दे, तो वह प्रस्ताव रुक सकता है.

किसी देश पर प्रतिबंध लगाना, शांति सेना भेजना या अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई की मंजूरी जैसे बड़े फैसले UNSC में लिए जाते हैं.

अस्थायी सदस्य भी इन फैसलों में हिस्सा लेते हैं, लेकिन उनके पास वीटो पावर नहीं होती.

भारत के लिए UNSC सीट क्यों जरूरी है?

UNSC की सीट भारत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी बात मजबूती से रखने का मौका देती है.

आतंकवाद के मुद्दे पर भारत लंबे समय से पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करता रहा है. UNSC में मजबूत भूमिका से भारत को ऐसे मुद्दों पर ज्यादा समर्थन मिल सकता है.

इसके अलावा, युद्ध और संकट के समय गरीब और विकासशील देशों पर सबसे ज्यादा असर पड़ता है. भारत खुद को ऐसे देशों की आवाज के रूप में पेश करता है.

यूक्रेन युद्ध, गाजा संकट और ईरान से जुड़े तनाव जैसे मामलों में भारत ने बातचीत और कूटनीति के रास्ते पर जोर दिया है.

UNSC चुनाव का पूरा गणित क्या है?

UNSC की 10 अस्थायी सीटें अलग-अलग क्षेत्रों के लिए तय होती हैं.

इनमें अफ्रीका और एशिया को 5 सीटें, पूर्वी यूरोप को 1 सीट, लैटिन अमेरिका और कैरेबियन देशों को 2 सीटें और पश्चिमी यूरोप व अन्य देशों को 2 सीटें मिलती हैं.

हर साल 5 अस्थायी सीटों के लिए चुनाव होता है.

2028-29 के चुनाव में एशिया-प्रशांत क्षेत्र के पास केवल एक सीट होगी. इस सीट के लिए भारत और ताजिकिस्तान के बीच मुकाबला है.

जीत के लिए कितने वोट चाहिए?

UNSC अस्थायी सदस्य का चुनाव संयुक्त राष्ट्र महासभा में होता है.

वोटिंग गुप्त तरीके से होती है और जीतने के लिए दो-तिहाई बहुमत जरूरी होता है.

संयुक्त राष्ट्र में कुल 193 सदस्य देश हैं. इसलिए भारत को जीत के लिए करीब 128-129 देशों का समर्थन हासिल करना होगा.

भारत का पिछला रिकॉर्ड काफी मजबूत रहा है. 2021 के चुनाव में भारत को 192 में से 184 वोट मिले थे.

हालांकि इस बार ताजिकिस्तान की मौजूदगी से मुकाबला थोड़ा कठिन हो सकता है, लेकिन भारत की वैश्विक छवि और मजबूत कूटनीतिक संबंध उसे एक बड़ा दावेदार बनाते हैं.

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