Rising Bharat Leadership Summit 2026: आज राजधानी दिल्ली में Rising Bharat Leadership Summit 2026 का भव्य आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम में रक्षा, राजनीति और राष्ट्रवाद से जुड़ी जानी-मानी हस्तियां शामिल हुईं. इस लीडरशिप समिट में केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास के प्रमुख नेता चिराग पासवान ने भी शिरकत की. इस मौके पर चिराग पासवान ने राजनीति, विकास समेत तमाम ज्वलंत मुद्दों से जुड़े सवालों के जवाब दिए.
सवाल: बिहार फर्स्ट बिहार बिहारी फर्स्ट की आप बात करते आए हैं. बिहार चुनाव निमट गया है. बहुत अच्छा प्रदर्शन आप का रहा है. लेकिन अब सुनते हैं कि आप विस्तार कर रहे हैं. तो अगला मिशन क्या है? बंगाल में डेढ़ करोड़ से ज्यादा वोटर बिहार और उत्तर प्रदेश हैं. तो अगला मिशन एलजेपीआर का क्या है?
जवाब: मैं मेरे पिता के सपनों को पूरा करने के उद्देश्य के साथ आगे बढ़ रहा हूं. उन्होंने सपना देखा था एक विकसित बिहार का साथ ही में पार्टी के विस्तार का भी जहां विकसित बिहार की बात है चुनाव आपने कहा हम लोग जीत कर आए बिहार फर्स्ट बिहारी फर्स्ट का नारा देकर जनता ने अपना विश्वास मुझ पर मेरे दल पर मेरे गठबंधन पर जताने का काम किया अब समय है उस विश्वास पर खरा उतरने का तो यकीनन पहली प्राथमिकता मेरी बिहार फर्स्ट बिहारी फर्स्ट. जिन-जिन वादों के साथ मैंने चुनाव में उतरा था. उन वादों को पूरा करूं. साइमलटेनियसली यस पार्टी का एक्सपेंशन मोड है. मैं प्रयास कर रहा हूं कि हम लोग क्षेत्रीय दल से राष्ट्रीय दल की भूमिका में हम लोग आए और अलग-अलग राज्यों में पार्टी के संगठन के माध्यम से पार्टी को मजबूती देने का कार्य मेरे पार्टी के तमाम नेता कार्यकर्ताओं के द्वारा हो रहा है.
आज मुझे खुशी है इस बात की कि आज से 3 साल 4 साल पहले 2021 में मुझसे मेरी पार्टी पार्टी का नाम निशान सिंबल सब छीन लिया गया था. उस रात जितनी तकलीफ मुझे इस बात की थी कि मेरी पार्टी समाप्त हुई है उससे ज्यादा तकलीफ इस बात की थी कि पापा जहां कहीं होंगे वो इस बात को लेकर दुखी होंगे कि उन्होंने जिस खून पसीने से इस पार्टी को बनाया शायद मैं उसे संभाल नहीं पाया. पर आज मुझे इस बात का संतोष है कि पापा जिस स्थिति में छोड़ के गए थे पार्टी को आज उससे एक कदम ज्यादा मजबूत ही है पार्टी. अब्सोलुटली. आज मेरे पांच सांसद हैं. 19 विधायक हैं. दो मंत्री राज्य में है. एक राज्य मंत्री बिहार में है. एक विधायक मेरे झारखंड में है. दो विधायक मेरे नागालैंड में है. तो धीरे-धीरेधी पार्टी वो विस्तार कर रही है. आपने बंगाल को लेकर प्रश्न पूछा. हां, मैं चाहता हूं कि बंगाल में भी पार्टी आगे बढ़े. मैं मानता हूं कि बंगाल ना सिर्फ एक खूबसूरत प्रदेश है. वहां के लोग इतने खूबसूरत हैं. इतनी मिठास है पर उस राज्य जो डिर्व करता है वो कहीं ना कहीं नहीं मिला है.
मौजूदा नेतृत्व बंगाल को मुख्यधारा के साथ व्यक्तिगत द्वेष की वजह से नहीं जोड़ पा रहा है. आपको मेरे प्रधानमंत्री से शिकायत होगी. बट उसका कतई यह मतलब नहीं है कि आप केंद्र सरकार की योजनाएं जिससे आपके राज्य का विकास हो सकता है आप उसको धरातल पर नहीं उतरने दें. ऐसी योजनाएं जो कि गरीब कल्याण की सोच के साथ बनी है उन योजनाओं तक को बंगाल में नहीं उतरने दिया जाता है. सिर्फ इस वजह से क्यों? क्योंकि प्रधानमंत्री उन योजनाओं का नेतृत्व कर रहे हैं. पर मैं मानता हूं कि जिस तरीके से बिहार में एक ऐतिहासिक जीत एनडीए की हुई है, उतनी ही बड़ी जीत हम लोग की बंगाल में भी होगी और आसाम में तो हम लोग दोबारा आ ही रहे हैं.
सवाल: आप चाहते थे कि आप बिहार में विधानसभा का चुनाव भी लड़े. राष्ट्र राजनीति से हटकर आप राज्य की राजनीति करें. दूसरी तरफ आपकी पार्टी विस्तार मोड में है. तो पहला तो कि आप क्यों विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ पाए?
जवाब: मैं लड़ना जरूर चाहता था और बिहारी हूं और मैंने हमेशा यह माना है कि आप जब तक टारगेट ओरिएंटेड हो के नहीं आगे बढ़ेंगे फोकस नहीं रहेंगे तो फिर आप जैक ऑफ ऑल मास्टर ऑफ नन बन के रह जाएंगे. मैं जिस बिहार फर्स्ट बिहारी फर्स्ट की मैं बात करता हूं जब तक मैं उसको धरातल पर उतार कर दिखाऊंगा नहीं तो मैं बाकी राज्यों को यह विश्वास नहीं दिला पाऊंगा कि मैं या मेरी पार्टी मेरे संगठन मेरे नेता मेरे कार्यकर्ताओं में वो क्षमता है कि जो बात हम कह रहे हैं उस पर हम खरा भी उतरेंगे. आई वांट टू लीड बाय बाय एग्जांपल मैं जो कह रहा हूं उसको करके दिखाना चाहता हूं और मैं यह मानता हूं कि दिल्ली में रहकर तीसरी बार का सांसद हूं. मुझे एहसास हुआ है कि बिहार में रहकर मैं जितना बिहार और बिहारियों के लिए कर सकता हूं. दिल्ली में रहकर शायद वो संभव नहीं है. और इसीलिए मैं विधानसभा का चुनाव लड़ना चाहता था बट नेगोशिएशंस आपने देखे होंगे. काफी देर तक खींचे. अगर मुझे तारीख ठीक से अगर मेरी याददाश्त ठीक है तो शायद 17 तारीख को लास्ट डे था पहले चरण के नामांकन का और 16 तारीख तक नेगोशिएशंस हम लोग के चले हैं तो 16 तारीख रात में या तो मैं फिर खुद अपने चुनाव की सोचता या पार्टी के नेताओं को चुनाव लड़वाता अगली बार चुनाव बिहार से विधानसभा 2030 में यस डेफिनेटली.
सवाल: आप एक तरफ तो विस्तार करना चाहते हैं. दूसरी तरफ आप क्षेत्रीय राजनीति में ज्यादा रुचि रख रहे हैं.
जवाब: मैं इसको कंट्राडिक्टिंग कतई नहीं मानूंगा. पार्टी अपने स्तर पर है. मेरी व्यक्तिगत प्राथमिकताएं अलग हैं. पार्टी की भी यह सोच है कि बिहार को हम लोग प्राथमिकता दें. बट पार्टी अपना विस्तार करें. पार्टी के अलग-अलग क्षेत्रीय नेताओं के माध्यम से हमारे प्रदेश अध्यक्षों के माध्यम से आज अगर झारखंड में अगर हम लोगों की जीत हुई है या नागालैंड में हम लोगों की जीत हुई है उसमें मेरे क्षेत्रीय संगठन की एक बहुत बड़ी भूमिका है और मुझे लगता है कि मैं वहां पर रहकर भी बिहार में रहकर भी देश में पार्टी के संगठन को उतनी ही मजबूती से उसका संरक्षण मैं कर सकता हूं. अ पार्टी का विस्तार मेरे पिता का सपना रहा है और बिहार फर्स्ट बिहारी फर्स्ट मेरा सपना रहा है. दोनों सपनों को पूरा करूंगा.
सवाल: मैं बिहार चुनाव में काफी लंबे समय बिहार रही. मैंने एक चीज देखी कि सभी लोगों ने पिटारा खोल दिया था. सभी पॉलिटिकल पार्टीज ने इंक्लूडिंग आपके गठबंधन ने भी, विपक्ष ने भी. उस 10 करोड़ नौकरियों के बावजूद भी वहां की महिला लोग स्थिरता चाहते थे. जिसका नतीजा देखा. लेकिन उसके बावजूद भी मुझे लगता है कि अभी बिहार को बहुत कुछ मिलना बाकी है. लेकिन सबसे इंपॉर्टेंट इन सारी चीजों में पलायन फिर गौण हो गया. पलायन का मुद्दा फिर गायब हो गया. और ये बहुत महत्वपूर्ण मुद्दा है. क्योंकि आप युवाओं का नेतृत्व करते हैं. उसका क्या पलायन को लेकर आप अगले 5 साल क्या करने वाले हैं सर?
जवाब: इसकी पृष्ठभूमि समझनी होगी कि बिहार पीछे क्यों रह गया? जबकि बिहारी बुद्धि को लोग देश दुनिया में मानते हैं. बिल्कुल सर. मेरा खुद का अनुभव रहा है. मैं मीडिया हाउसेस में देखता हूं. बड़े-बड़े पदों पर मुझे बिहारी दिख जाते हैं. मैं बिजनेस हाउसेस में देखता हूं. सीओ, सीएफओस मुझे बिहारी मिल जाते हैं. नीडलेस टू से आईएएस, आईपीएस, ऑफिसर्स हमारे राज्य से बहुत आते हैं. तो जब बिहारी इतना आगे तो मेरा बिहार इतना पीछे क्यों रहा? ये सवाल मुझे भी कौन देता था? ऐसे में जब मैंने इसके ऊपर वर्किंग करनी शुरू की. सबसे पहली जो जड़ की समस्या मेरे राज्य में रही है. मैं 2013 में सक्रिय राजनीति में आया और जब जब मैं बिहार जाता था तो मुझे बिहार में ब्राह्मण मिलते थे, भूमिहार मिलते थे, राजपूत मिलते थे, पिछड़ा मिलते थे, अति पिछड़ा मिलते थे, दलित मिलते थे, महादलित मिलते थे, हिंदू मिलते थे, मुसलमान मिलता था. पर मुझे कोई बिहारी नहीं मिलता था. ये एकजुटता का अभाव, एक दूसरे के साथ कनेक्ट करने की सोच यह कभी रही नहीं. और इसका मैं जिम्मेदार कई राजनीतिक दल हैं बिहार में जो जात पात धर्म मजहब की राजनीति में आपको बांटते हैं. आपका वोट लेते हैं और उसके बाद आपको भूलने का काम करते हैं. ये बहुत बड़ा कारण रहा. दूसरा कारण रहा कि विरोधाभास की सरकार है. आज जब मेरे प्रधानमंत्री डबल इंजन की सरकार की जब वो बात करते हैं तो डबल इंजन की सरकार का लाभ क्या होता है?
इसका अनुभव मैंने पिछले साल सवा साल में किया. 2024 में जब तीसरी बार मेरे प्रधानमंत्री देश के प्रधानमंत्री पद की उन्होंने शपथ ली, बिहार विधानसभा चुनाव से पहले वह लगभग 12 13 बार मेरे राज्य आए. एक साल में कोई प्रधानमंत्री इतनी बार राज्य जाए और जितनी बार वह गए, उतनी बार उन्होंने हजारों करोड़ की योजनाएं बिहारियों के लिए समर्पित करने का उन्होंने काम किया. अब ये डबल इंजन की सरकार जैसे मैं बंगाल का उदाहरण दे रहा था कि ममता जी सिर्फ इसलिए केंद्र की योजनाओं को धरातल पर नहीं उतारेंगी. क्यों? क्योंकि आपको नरेंद्र मोदी जी से आपको बैर है और इसीलिए आप बंगालियों को उनके हक अधिकार से वंचित रखेंगी. ये होता रहा था बिहार में. देयर वाज़ अ पॉइंट इन टाइम व्हेन ऑन अ स्ट्रेच फॉर 27 इयर्स अलग-अलग सरकारें थी. केंद्र में कोई और सरकार, राज्य में कोई और सरकार. 2000 का ही दशक देख लीजिए. जब तक केंद्र में यूपीए की सरकार थी, बिहार में एनडीए की सरकार थी. जैसे ही केंद्र में 2014 में एनडीए की सरकार आई तो बिहार में महागठबंधन की सरकार आ गई. तो ये कंट्राडिक्शन ने बिहार को काफी पीछे रखा है. बट कमिंग बैक टू योर क्वेश्चन पलायन ये मेरे लिए भी बहुत बड़ा कंसर्न रहा और मैंने बिहार फर्स्ट बिहारी फर्स्ट में पलायन को लेकर मैंने बहुत स्पष्ट रूपरेखा तैयार की है कि किन-किन बिंदुओं पर अध्ययन करके हम लोग ना सिर्फ पलायन को रोक सकते हैं बल्कि मैं उससे एक कदम और बढ़कर मैं रिवर्स माइग्रेशन चाहता हूं. मैं वो बिहार तैयार करना चाहता हूं, जिस दिन दुनिया के किसी भी कोने में बिहारी रह रहा होगा तो उसे वो डेवल्पड बिहार मिले कि वो उस देश को छोड़कर वापस अपने राज्य आए.
सवाल: 2005 में आपके पिताजी ने वो कर दिखाया था जो एलजेपीआर का बेस्ट परफॉर्मेंस 29 सीटें और यह बहुत ही बड़ी बात है कि उन्होंने कहा मुस्लिम समुदाय से कोई सीएम बने तो हम उसके साथ जाएंगे और आपने देखा फिर क्या हुआ सरकार नहीं बन पाई. इतनी बड़ी बात आज तक बिहार की राजनीति में या देश की राजनीति में नहीं कहा गया किसी भी पॉलिटिकल पार्टी से कि मुस्लिम चेहरा होगा तो हम उसी के साथ जाएंगे. उसके बावजूद भी क्या इस बात की आपको पीड़ा होती है कि मुस्लिम समुदाय बिहार में इतनी बड़ी बात के बाद भी नीतीश कुमार के साथ चले जाते हैं. लालू के या उनके बेटे के साथ चले जाते हैं. यह पीड़ा है आपको?
जवाब: बिल्कुल पीड़ा है और यह शिकायत भी मैंने हर मंच से मैंने उनके साथ इसीलिए आप राइट विंग के गठबंधन के साथ चले नहीं मैं राइट विंग के गठबंधन मैं इस सोच के साथ नहीं कि मैं किस विंग किस विचारधारा का गठबंधन है? मैं सिर्फ डेवलपमेंट की सोच के साथ मैं इतना जरूर मानता हूं कि अगर आपके साथ भेदभाव जाति के आधार पर हो रहा है या धर्म के आधार पर हो रहा है तो आपको वो एक्स्ट्रा हाथ बढ़ाने की जरूरत है उनको मुख्यधारा के साथ जोड़ने की. 2005 में अ मेरे पिता ने ये कहा था. उससे पहले केंद्र में सरकार किसकी अधिकांश समय सो कॉल्ड लेफ्टिंग सोच वाली सरकारें बिहार में लेफ्ट विंग सोच वाली सरकारें जिनके बारे में कहा जाता है कि वो मुसलमानों के संरक्षक हैं तथाकथित उनके ठेकेदार हैं. उनको मुख्यधारा के साथ जोड़ने के लिए अगर आपने इतना ही काम किया था. तो क्यों सचर कमिटी की रिपोर्ट और मुझे लगता है उसी के आसपास ही आई थी. 2006 या 2004 के आसपास सचर कमेटी की रिपोर्ट आई स्ट्रक्चर कमेटी की रिपोर्ट मुसलमानों के हालात के बारे में बताती है. हमारे देश में उनके क्या हालात हैं.
2006 से पहले केंद्र में अधिकांश समय तक कांग्रेस या कांग्रेस लेड सरकारें रही हैं. मेरे राज्य में राजद की सरकार उससे पहले 15 साल तक निरंतरता में रही थी जो अपने एमवाई समीकरण पे गर्व करते हैं जिसमें उनका एम मुसलमानों का प्रतीक है. ऐसे में जब आपकी सरकारें थी, तो उसके बाद भी मुसलमानों के हालात ऐसे क्यों रहे? दूसरी तरफ जब हम लोग आते हैं तो सीधा राइट विंग कह के ये कह दिया जाता है कि भैया ये तो डिवाइड वाली राजनीति करते हैं. धर्म के आधार पर लोगों को बांटने का काम करते हैं. मेरी सरकार का मूल मंत्र ही सबका साथ सबका विकास रहा. पहली बार देश में 2014 में एक ऐसे प्रधानमंत्री पद के दावेदार आए जिन्होंने उस वक्त की आबादी सवा5 करोड़ जनता को संबोधित किया. ना उन्होंने कभी हिंदू तुष्टीरण की बात की, ना उन्होंने कभी मुसलमान तुष्टीरण की बात की. उन्होंने सवा सौ करोड़ और जितनी हमारी योजनाएं बनी है बहुत क्लीशेट साउंड करेगा. बट आप मुझे बताइए ना किस योजना में हम लोग भेदभाव कर रहे हैं. जितनी केंद्र सरकार की योजनाएं हैं आज हम लोग अगर आपको मुफ्त अनाज देते हैं ये देख के तो नहीं देते कि आप हिंदू हैं मुस्लिम है आयुष्मान योजना हिंदू मुस्लिम नहीं करते. जितनी भी योजनाएं हैं हम लोग जब उसमें वो नहीं करते. सर ट्रस्ट डेफिसिट तो है ही. यह है यह है ट्रस्ट डेफिसिट और इसीलिए मैंने हर मंच पे जब मैं मुसलमान समुदाय से जब मैं बातचीत भी करता हूं तो मैं यही मैं बोलता हूं कि मेरे पिता ने मेरी पार्टी को अपनी पार्टी को पूरी तरीके से समाप्त ही कर दिया एक तरीके से पर उसके बाद भी हम लोगों को बार-बार अपने आप को प्रूफ करना पड़ता है कि हम बिना भेदभाव के सबके साथ चलने का प्रयास कर रहे हैं.
सवाल: मैं चाहूंगी कि मैं कुछ दो चार नेताओं के नाम लूंगी. आप उनको अपने स्टाइल में दो शब्दों में कैसे उनके राजनीतिक व्यक्तित्व को कैसे एक्सप्लेन करेंगे या रेट करेंगे. डेफिनेटली मैं मोदी जी या अमित शाह जी का नाम इसलिए नहीं लूंगी क्योंकि उनका प्रेम आपके लिए और आपका प्रेम उनके लिए तो काफी बार झलका है. लेकिन सबसे पहले मैं चाहूंगी कि आप नीतीश कुमार के लिए दो शब्द में क्या कहेंगे?
नीतीश कुमार के बारे में क्या बोले चिराग पासवान?
मैं मानता हूं कि उनके पास जो अनुभव है, मैंने खुद कई बार सवाल उठाए हैं उनकी कार्यशैली को लेकर. पर मैं इस बात को मैंने तब भी कभी नकारा नहीं कि यह अनुभव उन्हीं के पास है. एक प्रदेश जो कि 2005 तक बर्बादी की खाई में चला गया था. आज लोग पूछते हैं कि भैया 20 साल लगे आपको इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप करने में. 20 साल में उद्योग क्यों नहीं आए? मैंने भी ये सवाल किए थे. बट आज जब मैं व्यवस्था का हिस्सा हूं तो मैं समझ पाता हूं कि ये 20 साल लगे बिहार में वो व्यवस्था 20 साल पहले आप जाते बिहार में सड़कें नहीं थी. मेरा गांव शहर बन्नी मुझे पूरा दिन लगता था अपने गांव पहुंचने में. आज मैं 3- 3 घंटे में अपने गांव पहुंच जाता हूं. वो कनेक्टिविटी नहीं थी. पहले दिन में एक डेढ़ घंटे के लिए बिजली आती थी बिहार में तो लोग खुशी से झूमते थे. आज एक डेढ़ घंटे के लिए बिजली चली जाती है तो लोग परेशान होते हैं. ये उन्होंने बदलाव किया है. तो ऐसे में उनके अनुभव का मैं प्रेरणा लेता हूं उनके अनुभव से.
सम्राट चौधरी के बारे में क्या बोले चिराग पासवान?
भाई हैं और बड़ी जिम्मेदारी है आज की तारीख में उनके पास गृह विभाग की. मेरा बिहार परसेप्शन का भी शिकार रहा है. सेंस ऑफ सिक्योरिटी को लेके, लॉ एंड ऑर्डर को लेके अ बिहार पे कई सवाल उठे हैं. ऐसे में मुझे लगता है कि ये समय है, युवा है, जानकार हैं. मुझे लगता है कि ये उस परसेप्शन को बदलने में कामयाब रहेंगे.
तेजस्वी यादव के बारे में क्या बोले चिराग पासवान?
तेजस्वी यादव भाई छोटा भाई वो पारिवारिक रिश्ता है और भाई में पर मैं इतना जरूर कहूंगा कि उनके पास भी मौका है. लोकतंत्र में सिर्फ सर अभी भी है या था. अभी भी है. लोकतंत्र में सिर्फ सत्ता पक्ष की भूमिका नहीं होती. विपक्ष की भी उतनी ही मजबूत भूमिका होती है. और विपक्ष की दमदार आवाज बनने का अवसर है उनके पास. पर पूरा सत्र बीत जाता है और वो विदेश में रहेंगे. एलओपी की भूमिका नहीं निभाएंगे तो यह गलत है.
राहुल गांधी के बारे में क्या बोले चिराग पासवान?
गांधी परिवार से मेरा पुराना रिश्ता रहा है. मैं मैंने जीवन का एक लंबा समय मेरे पिता के घर जो उनको जनपद पर मिला हुआ था. तो वहां पर आदरणीय सोनिया गांधी जी हमारी पड़ोसी थी. जी और अब मुझे घर मिला है सुनहरी बाग में तो वहां पे राहुल गांधी जी मेरे पड़ोसी तो मैं यह समझ गया हूं कि घर मेरा कहीं भी रहे पड़ोसी मेरे गांधी रहेंगे तो वो पड़ोसियों का रिश्ता है.
ललन सिंह के बारे में क्या बोले चिराग पासवान?
ललन सिंह जी अनुभव उनका भी रहा एक लंबा उनका कार्यकाल रहा है बिहार की राजनीति में उनकी बहुत सक्रिय भूमिका रही और मैं मानता हूं कि वो बिहार बिहारियों को अच्छे से जानते हैं जिस विभाग की जिम्मेदारी प्रधानमंत्री जी ने उन्हें दी है. उसको बखूबी वो निभा रहे हैं. और यह उन नेताओं में से है जिनको देखकर मैं सीखने का प्रयास करता हूं.
सवाल: फूड प्रोसेसिंग मिनिस्ट्री टेक्निकली बहुत इंपॉर्टेंट है और उस पर विवाद भी होता है क्योंकि विपक्ष कहता है कि ये वो मंत्रालय है जहां से नौकरियों का जनरेशन हो सकता है. ऐसे में विपक्ष कहता है नौकरियां कहां है? मोदी जी कहते हैं कि हम नौकरियां दे रहे हैं. उस विषय में आपका कितना काम हुआ और खासतौर पे बिहारी जब कहते हैं कि उनको नौकरियां तो नौकरियों के लिहाज से आपका मंत्रालय क्या काम कर रहा है?
जवाब: जब मुझे यह मंत्रालय नहीं भी मिला था. आप मेरा बिहाफ फर्स्ट बिहारी फर्स्ट विज़न देखेंगी जिसमें मैंने 2018 से मैंने काम किया है. उस वक्त भी मैंने खाद्य प्रसंस्करण का फूड प्रोसेसिंग का मैंने निरंतरता में मैंने जिक्र किया. भारत कृषि प्रधान देश है और भारत के कई राज्य बिहार जैसा राज्य जिसमें मेजर सोर्स ऑफ इनकम राजस्व रेवेन्यू का स्रोत ही कृषि है और देश की एक बड़ी आबादी किसानों की जो कृषि के साथ जुड़ी हुई है, फार्मिंग के साथ जुड़ी हुई है. मैं मानता हूं कि इस सेक्टर की एक अहम भूमिका है. इस सेक्टर को लंबे समय तक इग्नोर किया गया. मैं कारण भी इसका समझता हूं क्योंकि एक समय ऐसा था जब देश में अनाज की कमी थी. तो पूरी प्राथमिकता हम लोगों की प्रोडक्शन पे गई. हरित क्रांति के माध्यम से, ग्रीन रिवोल्यूशन के माध्यम से हम लोगों ने प्रोडक्शन को हम लोग कैसे बढ़ाएं इस पे हम लोगों ने लंबा समय तक हम लोगों ने ध्यान देने का काम किया. पर अब जरूरत है प्रोडक्शन के साथ-साथ प्रोसेसिंग पे भी ध्यान देने की. मैं ये मानता हूं कि पिछले 10 सालों में और मैं सिर्फ इसलिए नहीं कि मैं इस सरकार का हिस्सा हूं और मैं अपनी वाईवाई करने के लिए बट आप आंकड़े देखेंगे जिस तरीके से हमारा प्रोसेसिंग बढ़ी है. अ खाद्य पदार्थों से जिस तरीके से हमारा एक्सपोर्ट एग्री एक्सपोर्ट में प्रोसेस फूड आइटम्स का हम लोग का एक्सपोर्ट बढ़ा है. लगभग 13.7% होता था और अभी रीसेंट आंकड़े में आप देखिएगा तो लगभग 20.4% के आसपास पहुंचा है.
एफडीआई हम लोग इस पे लेके आए पूरी तरीके से 100% एफडीआई 7.33 बिलियन यूएसडी का निवेश उसके माध्यम से हुआ. राइटली सेड जॉब क्रिएशन में इसकी एक अहम भूमिका है. जहां एक तरफ प्रोसेसिंग के माध्यम से आप किसानों को आर्थिक मजबूती देने का काम करते हैं. किसानों के पास वो होल्डिंग कैपेसिटी आती है. ओनेपौने दाम पर उनको अपने अनाज को ना बेचना पड़े. इसके लिए प्रोसेसिंग के माध्यम से आप शेलफ लाइफ बढ़ाते हैं. उसमें वैल्यू एडिशन करते हैं. उसकी गुणवत्ता बढ़ाने का आप काम करते हैं. तो ऐसे में किसानों को आर्थिक मजबूती देना और जॉब अपोरर्चुनिटीज क्रिएट करना. पीएमएफएम ही हम लोग की एक ऐसी योजना है जिसमें आप ग्रामीण क्षेत्रों में युवा युवतियों को आप एंटरप्रेन्योर बना सकते हैं. एंड जैसा मेरे प्रधानमंत्री कहते हैं कि युवा सिर्फ जॉब सीकर की भूमिका में ना रहे. जॉब गिवर की भूमिका में भी वो आए.
ऐसे में उनको उद्यमी बना के वो अपने नीचे दो चार पांच 10 लोगों को छोटे माइक्रो एंटरप्राइजेस की मैं बात कर रहा हूं. पीएमएफएम ही है ही उसके लिए. बट साइमलटेनियसली पीएम केएसवाई के माध्यम से जितने मीडियम एंड लार्ज एंटरप्राइजेज भी हैं उनको भी हम लोग के करने का हम लोग कार्य करते हैं. बट मैं अभी भी मानूंगा कि जितनी क्षमता है हम लोगों में प्रोसेसिंग सेक्टर को लेकर इस सेक्टर में मिसकंसेप्शंस भी बहुत आते हैं. मिसलीडिंग एडवर्टाइजमेंट्स इतनी आती हैं. प्रोसेस हो गया तो मतलब खराब हो गया. यह धारणा ये परसेप्शन बनाया जाता है. जबकि प्रोसेस होना गुणवत्ता बढ़ाना है. हम लोग वैल्यू ऐड कर रहे हैं. ऑफ कोर्स देयर आर डिफरेंट काइंड ऑफ़ प्रोसेसिंग. अगर आपने उसको एक्स्ट्रा शुगर, तेल डाल दिया, ये डाल दिया वो एक अलग बात है. बट जब आप उसमें वैल्यू एडिशन आप कर रहे हैं तो वो कतई गलत नहीं है. सो साइमलटेनियसली वी आर फाइटिंग दैट मिसकसेप्शन आल्सो. बट हैविंग सेड इट ऑल मेरे लिए ये बहुत महत्वपूर्ण सेक्टर है. मैं मानता हूं इससे 2047 विकसित भारत का जो लक्ष्य है उसमें आप देखिएगा ओवर द इयर्स ये प्रूव भी होगा इस सेक्टर की सबसे ज्यादा अहम भूमिका होने वाली.
सवाल: मैं चाहूंगी कि सरकार के बिहाफ पर आप दर्शकों को यह बताएं या यहां बैठे लोगों को कि सबको ये चिंता है कि सरकार चुप है. यूएस के साथ लगातार बातचीत चल रही है ट्रेड और टेरिफ को लेकर और यूएस अभी भी भारत के एग्रीकल्चर सेक्टर में घुसना चाहता है. कपास देना चाहता है. दाल देना चाहता है. दूध देना चाहता है जो भारत की ताकत है. सरकार की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक बात नहीं आई है. इसका जेनुइनली आपके मंत्रालय से भी जुड़ी हुई बात है. सरकार का स्टैंड क्या है सर?
जवाब: ये कुछ सेंसिटिव विषय हैं जिनको सार्वजनिक मंच पे लाने से पहले उनको पूरी तरीके से जांच परख के उनको आप हल्के में इन विषयों की चर्चा नहीं कर सकते. और मैं कतई अपने आप को अधिकृत नहीं मानूंगा इस विषय पे कोई भी टिप्पणी करने के लिए क्योंकि मैं मानता हूं कि सरकार सरकार की पूरी मशीनरी खासतौर पे हमारा एमईए विदेशी विदेश विभाग हम लोग का पूरी गंभीरता से इनके सारे प्रोस एंड क्स को इवैलुएट कर रहा है. अ जानकारी ज्यादा सार्वजनिक इसलिए नहीं आती क्योंकि ये सेंसिटिव मैटर्स हैं. एक बार इसको पूरी तरीके से हम लोग क्लियर आउट कर लेते हैं. इसके ऊपर ऑफिशियल जानकारी जरूर साझा की.
सवाल: सरकार का यही स्टैंड है कि एग्रीकल्चर सेक्टर में हम किसी और को स्वागत नहीं करेंगे. सर एक बार फिर आपको आपने खुद कहा कि मैं मोदी जी का हनुमान हूं. हनुमान राम जी की जितनी भी आपदाएं हैं उसको दूर कर देते हैं. ऐसी कौन सा काम है जो आपने किया जिसकी वजह से आप उनको हनुमान कहते हैं? पिछले इस बार के बिहार चुनाव या उससे पहले मेरा रेफरेंस आपने नितीश जी के लिए बहुत कुछ अच्छा कहा पर आप समझ गए कि मेरा रेफरेंस क्या है?
जवाब: आई लव माय प्राइम मिनिस्टर अ लॉट और मैं कितने भी शब्दों में मैं उनकी तारीफ करूं मैं कम मानता हूं. कारण है मैंने उनके जैसा व्यक्तित्व नहीं देखा जो अपने काम को लेकर इतने गंभीर हो जो अपने काम को लेकर इतने क्लियर हो. मैं 2013 में हम लोग यूपीए के साथ थे एंड आई कैन से दिस ऑन रिकॉर्ड माय फादर वाज़ वेरी कंफर्टेबल विथ दैट अलायंस एंड ही डिडट्ट वांट कि वो अलायंस बदले वो ऐसा नहीं चाह रहे थे. बट मैं उस वक्त और उस वक्त प्रधानमंत्री पद के यह दावेदार थे. गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर इन्होंने अपने आप को साबित किया था. अब यह वही भूमिका है जो मैं बिहार जाकर निभाना चाहता हूं कि आपने एक एग्जांपल सेट करके दिखाया गुजरात जैसे राज्य को एक विकसित राज्य बनाकर वहां पे सारी सुख सुविधा इंफ्रास्ट्रक्चरल डेवलपमेंट राजस्व बढ़ाना अलग-अलग प्रयोग करके आपने उस राज्य को उठाने का काम किया. आपने साबित किया अपने आप को. यह मुझे और मुझे लगता है कि मेरे जैसे कई युवाओं को प्रभावित करता था. उस वक्त से मैं उनके साथ जुड़ने की मैंने सोच रखी. इट वास वेरी डिफिकल्ट टू कन्विंस माय फादर बट सम हाउ आई मैनेज टू डू दैट आल्सो और 2014 से मैं इनके साथ रहा. इनके साथ रहने का मेरा समर्पण इस कदर इस हद तक है कि 2020 में मैं अलग हुआ. अकेले चुनाव लड़ा. बिलकुल. नोइंग कि बिहार जैसा राज्य जो गठबंधन राजनीति का लंबे समय से सपोर्ट करता रहा है.
गठबंधन राजनीति को नोइंग कि मैं अकेले लड़के शायद बहुत ज्यादा कुछ नहीं कर पाऊंगा बट मैं तब भी वैकल्पिक गठबंधन की ओर नहीं गया. किसी अल्टरनेटिव अलायंस में नहीं गया. किसी दूसरे के साथ मैंने गठबंधन नहीं किया. और तब भी मैं प्रधानमंत्री जी और उनके विचारों, उनकी नीतियों का मैं समर्थन करता रहा. और यह हनुमान वाला प्राकरण वहीं से आया क्योंकि कुछ दलों को आपत्ति थी कि चिराग भले अकेले लड़ रहा है बट प्रधानमंत्री की तस्वीर का इस्तेमाल नहीं करेगा उनकी बातों का. तो उस वक्त मैंने कहा था कि मुझे उनकी तस्वीर अपने पोस्टर होल्डिंग पे लगाने की जरूरत नहीं है. किसी दिन जरूरत पड़ेगी तो दिल चीर के दिखा दूंगा. उसकी उनकी तस्वीर मेरे दिल में बसती है. तो यहां से वो हनुमान वाला जिक्र आना शुरू हुआ. बट हां मैं उनके व्यक्तित्व से बहुत प्यार करता हूं. जिस तरीके से मेरे पिता के जाने के बाद घर परिवार में जो भी हुआ पर उन्होंने मुझसे मेरे परिवार से कभी वो संपर्क नहीं तोड़ा. उन्होंने हर दूसरे महीने तीसरे महीने फोन करना मुझसे मेरी मां से उनका हालचाल पूछना और जब मैं वापस गठबंधन में आया जिस तरीके से एक पिता की तरह उन्होंने मुझे गले लगाकर लिटरली गले लगाकर मुझे गठबंधन में वापस लिया. तो उनके व्यक्तित्व के ये कुछ ऐसे रूप हैं जिनकी वजह से मैं पूरी तरीके से उनके प्रति समर्पित हूं.
ये भी पढ़ें: नरेंद्र मोदी के लाडले, PM के लाल, गठबंधन की राजनीति के मास्टर चिराग पासवान: Dr Jagdeesh Chandra