Indian LPG Tankers: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में इस समय भारत से जुड़े कई जहाज फंसे हुए हैं. सरकार के मुताबिक करीब 3 लाख मीट्रिक टन लिक्विड पेट्रोलियम गैस (LPG) इस इलाके में अटकी हुई है. यह जानकारी शिपिंग मंत्रालय के स्पेशल सेक्रेटरी राजेश कुमार सिन्हा ने मंगलवार को एक प्रेस ब्रीफिंग में दी.
शिपिंग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, इस समय स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास कुल 22 भारतीय ध्वज वाले जहाज मौजूद हैं. इनमें 6 एलपीजी कैरियर, 1 एलएनजी टैंकर, 4 क्रूड ऑयल टैंकर, 1 केमिकल प्रोडक्ट्स कैरियर, 3 कंटेनर जहाज और 2 बल्क कैरियर शामिल हैं. इसके अलावा कुछ अन्य सपोर्ट जहाज भी इस क्षेत्र में मौजूद हैं.
अधिकारियों के अनुसार एक बड़ा गैस जहाज, जिसे Very Large Gas Carrier कहा जाता है, लगभग 45 हजार मीट्रिक टन LPG ले जा सकता है. इसी आधार पर अनुमान लगाया गया है कि होर्मुज में फंसे 6 भारतीय जहाजों में करीब 3 लाख मीट्रिक टन LPG मौजूद है.
#WATCH | Delhi: MEA spokesperson Randhir Jaiswal says, "We are in talks with Iran and other countries. As our Special Secretary mentioned, many ships are still there in the Strait of Hormuz area. It is our intention to work with Iran and other countries to bring those ships back… pic.twitter.com/RL0j8OqEnS
— ANI (@ANI) March 17, 2026
कुछ जहाज सुरक्षित भारत पहुंच चुके
इस बीच राहत की बात यह है कि दो भारतीय एलपीजी टैंकर सुरक्षित भारत पहुंच चुके हैं. ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ नाम के ये दोनों जहाज 14 मार्च को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार करके भारत आ गए. इन जहाजों में लगभग 92,700 मीट्रिक टन LPG थी.
इसके अलावा ‘जग लाड़की’ नाम का एक क्रूड ऑयल टैंकर भी संयुक्त अरब अमीरात के फुजैराह बंदरगाह से 81,000 मीट्रिक टन कच्चा तेल लेकर भारत के लिए रवाना हो चुका है.
ईरान के साथ बातचीत की खबरों से इनकार
इस बीच ऐसी खबरें भी सामने आई थीं कि भारत ने अपने जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए ईरान के साथ किसी तरह की जहाज अदला-बदली पर चर्चा की है. लेकिन भारत सरकार ने इन खबरों को साफ तौर पर खारिज कर दिया है.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि ईरान के साथ इस तरह की कोई बातचीत नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि भारत की प्राथमिकता अपने जहाजों और चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित करना है.
जहाजों को सुरक्षित निकालने के प्रयास जारी
हालांकि सरकार ने यह माना है कि वह ईरान और क्षेत्र के अन्य देशों के साथ लगातार संपर्क में है. इसका मकसद यह है कि जो जहाज अभी भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास फंसे हैं, उन्हें सुरक्षित रास्ता देकर आगे बढ़ाया जा सके.
रणधीर जायसवाल ने बताया कि कई जहाज अभी भी उस इलाके में मौजूद हैं और सरकार उन्हें सुरक्षित वापस लाने के लिए हर संभव कोशिश कर रही है. इसके लिए संबंधित देशों के साथ बातचीत जारी है.
पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी चर्चा
प्रेस ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्रालय ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर की हालिया ब्रसेल्स यात्रा का भी जिक्र किया. उन्हें यूरोपीय संघ की विदेश मामलों की परिषद की बैठक में शामिल होने के लिए बुलाया गया था.
इस बैठक में भारत और यूरोपीय संघ के रिश्तों के अलावा वैश्विक हालात पर भी चर्चा हुई. खास तौर पर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और उसके ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंता जताई गई. कई यूरोपीय देशों के विदेश मंत्रियों ने कहा कि इस संकट का हल बातचीत और कूटनीति से ही निकाला जा सकता है. भारत ने भी इसी बात पर जोर दिया कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखना जरूरी है.
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