चीन के सबसे बड़े दुश्मन ने भारत से मांगा 'D4 एंटी ड्रोन सिस्टम', इसकी ताकत देख चुका है पाकिस्तान

भारत में विकसित अत्याधुनिक D4 एंटी-ड्रोन सिस्टम को लेकर ताइवान ने पहली बार औपचारिक अनुरोध किया है.

China's biggest enemy asked India for 'D4 anti-drone system'
प्रतीकात्मक तस्वीर/Photo- ANI

नई दिल्ली: भारत में विकसित अत्याधुनिक D4 एंटी-ड्रोन सिस्टम को लेकर ताइवान ने पहली बार औपचारिक अनुरोध किया है. यह वही तकनीक है, जिसने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान द्वारा भेजे गए सैकड़ों ड्रोन को पलक झपकते हवा में नष्ट कर दिया था. अब जब ताइवान इस प्रणाली को अपने रक्षा कवच में जोड़ना चाहता है, तो सवाल यह है: क्या भारत यह कदम उठाने को तैयार है, खासकर तब जब इस फैसले से बीजिंग की तीव्र प्रतिक्रिया तय मानी जा रही है?

भारत की D4 तकनीक: युद्धक्षेत्र में गेमचेंजर

D4, यानी Detect, Deter, Destroy, Defend, भारतीय रक्षा अनुसंधान संगठन DRDO और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) द्वारा विकसित एक बहुस्तरीय एंटी-ड्रोन सिस्टम है. यह प्रणाली न केवल दुश्मन ड्रोन की पहचान और जैमिंग करती है, बल्कि लेजर आधारित हार्ड-किल तकनीक से उन्हें हवा में ही नष्ट भी कर सकती है.

कैसे काम करता है D4?

Detect: EO/IR सेंसर और मल्टी-बैंड रडार से सटीक ट्रैकिंग

Deter: GPS spoofing और RF जैमिंग से लक्ष्य से भटकाना

Destroy: लेजर या माइक्रोवेव हथियार से हवा में ही विनाश

Defend: एकाधिक ड्रोन या स्वॉर्म अटैक से संवेदनशील प्रतिष्ठानों की रक्षा

ऑपरेशन सिंदूर में यह प्रणाली निर्णायक साबित हुई, जब तुर्की के Bayraktar TB2 और चीनी JY-300 जैसे दर्जनों ड्रोन भारत की सीमा में प्रवेश करते ही ढेर कर दिए गए.

चीन की आक्रामकता के बीच भारत पर भरोसा

2024 के बाद से PLA (चीन की सेना) ने ताइवान स्ट्रेट में ड्रोन निगरानी और अर्ध-आक्रामक उड़ानों की संख्या दोगुनी कर दी है. चीन की यह नीति ताइवान को कूटनीतिक रूप से अलग-थलग करने के साथ-साथ सैन्य दबाव में रखने की रणनीति है.

ताइवान के लिए भारत का D4 सिस्टम न केवल सुरक्षा कवच बन सकता है, बल्कि रणनीतिक मनोबल का भी प्रतीक होगा. ताइपेई द्वारा भारत से सैन्य सहयोग की यह पहली आधिकारिक मांग है और इससे चीन में बेचैनी स्वाभाविक है.

ताइवान को अपना अंग मानता है चीन

चीन, जो ‘वन चाइना पॉलिसी’ के तहत ताइवान को अपना अंग मानता है, भारत द्वारा किसी भी तरह की सैन्य सहायता को ‘घोर हस्तक्षेप’ मान सकता है. अगर भारत D4 सिस्टम ताइवान को देता है, तो चीन की प्रतिक्रिया तीन स्तर पर आ सकती है:

  • डिप्लोमैटिक दबाव: UN और द्विपक्षीय मंचों पर भारत की आलोचना
  • सीमा तनाव: अरुणाचल या लद्दाख में सैन्य गतिविधियों में उभार
  • आर्थिक प्रतिबंध या साइबर हमले: भारत के सरकारी संस्थानों या कंपनियों पर डिजिटल हमला

लेकिन अब सवाल यह नहीं है कि चीन क्या करेगा, बल्कि यह है कि भारत क्या करने को तैयार है.

क्या ताइवान को D4 सिस्टम देना चाहिए?

विशेषज्ञों की राय दो टूक है:

"चीन जब पाकिस्तान, म्यांमार और श्रीलंका को आधुनिक हथियार, ड्रोन और पनडुब्बी देने में संकोच नहीं करता, तो भारत को भी अपनी रक्षा नीति में जवाबदेही दिखानी होगी."

भारत की अब तक की नीति “रणनीतिक चुप्पी” की रही है, लेकिन वियतनाम, इंडोनेशिया, फिलीपींस जैसे देशों के साथ बढ़ते रक्षा सहयोग के बाद यह स्पष्ट हो रहा है कि भारत अब 'सिर्फ प्रतिक्रिया' नहीं, बल्कि 'प्री-एम्पटिव रणनीति' अपनाना चाहता है.

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