शी जिनपिंग की ताइवान पर धमक भरी चाल, ट्रंप से मुलाकात से पहले चीन की परमाणु ताकत का प्रदर्शन

दक्षिण कोरिया में होने जा रही चीन-अमेरिका की उच्चस्तरीय बैठक से पहले बीजिंग ने ऐसा कदम उठाया है, जिससे वॉशिंगटन की नींद उड़ गई है. राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत से कुछ दिन पहले ही ताइवान के आसपास अपने परमाणु-सक्षम बमवर्षक विमानों के साथ जबरदस्त सैन्य अभ्यास करवाया है.

Chinan Deploys h-6k nuclear bombers near taiwan before trump meet
Image Source: Social Media

दक्षिण कोरिया में होने जा रही चीन-अमेरिका की उच्चस्तरीय बैठक से पहले बीजिंग ने ऐसा कदम उठाया है, जिससे वॉशिंगटन की नींद उड़ गई है. राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत से कुछ दिन पहले ही ताइवान के आसपास अपने परमाणु-सक्षम बमवर्षक विमानों के साथ जबरदस्त सैन्य अभ्यास करवाया है. यह कदम न केवल शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है, बल्कि इसे ताइवान और उसके सहयोगियों के लिए एक खुली चेतावनी भी माना जा रहा है.

चीनी सरकारी मीडिया के मुताबिक, ईस्टर्न थिएटर कमांड ने हाल ही में ताइवान के आसपास बड़े पैमाने पर युद्धाभ्यास किया. इस दौरान J-10 फाइटर जेट्स और H-6K बमवर्षक विमानों ने एयर ब्लॉकेड और प्रिसीजन स्ट्राइक जैसे अभियानों का अभ्यास किया. बताया जा रहा है कि इन ड्रिल्स में चीन ने दुश्मन की रक्षा प्रणाली को ध्वस्त करने और लंबी दूरी से हमले करने की रणनीति का परीक्षण किया.

तारीखों का नहीं हुआ खुलासा 

हालांकि चीन ने इन अभ्यासों की सटीक तारीख और स्थान का खुलासा नहीं किया, लेकिन रविवार देर रात जारी किए गए सैन्य वीडियो में H-6K बमवर्षक से गिरते बमों के दृश्य दिखाए गए. इस वीडियो में दावा किया गया कि ताइवान का तटीय इलाका साफ दिखाई दे रहा था. हालांकि यह पुष्टि नहीं हो पाई कि वीडियो में दिखा क्षेत्र वास्तव में ताइवान का ही था या नहीं.

ताइवान ने जताई सतर्कता, पर कहा—स्थिति सामान्य

ताइवान रक्षा मंत्रालय ने सोमवार को अपने आधिकारिक बयान में बताया कि पिछले 24 घंटों में उसके एयर डिफेंस जोन के पास सिर्फ चार चीनी सैन्य विमान देखे गए. इनमें से तीन लड़ाकू विमान ताइवान स्ट्रेट के ऊपर और एक सपोर्ट एयरक्राफ्ट दक्षिण-पश्चिम दिशा में दिखाई दिया. मंत्रालय ने कहा कि किसी असामान्य सैन्य गतिविधि का पता नहीं चला है, लेकिन हालात पर चौकन्नी नजर रखी जा रही है. इसी बीच, चीन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सप्ताहांत में कहा कि “बीजिंग और ताइपे को शांति से एकीकरण की दिशा में काम करना चाहिए,” क्योंकि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ताइवान के चीन को सौंपे जाने के 80 साल पूरे हो गए हैं. वहीं ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-टे ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि, “हम शांति चाहते हैं, लेकिन हमें यह भ्रम नहीं होना चाहिए कि केवल बातचीत से ही स्थायी शांति आ जाएगी. शक्ति और सुरक्षा के बिना शांति संभव नहीं.” उन्होंने यह भी कहा कि ताइवान अपने रक्षा बजट में वृद्धि जारी रखेगा ताकि वह किसी भी संभावित खतरे का सामना कर सके.

ट्रंप-शी की मुलाकात से पहले बढ़ी भू-राजनीतिक हलचल

दक्षिण कोरिया में इस हफ्ते होने वाले एशिया रीजनल समिट में शी जिनपिंग और डोनाल्ड ट्रंप की आमने-सामने बैठक होने जा रही है. यह मुलाकात इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की रणनीतिक दिशा तय करने में अहम मानी जा रही है. चर्चा का केंद्र बिंदु व्यापार समझौता और क्षेत्रीय सुरक्षा होगा.

हालांकि चीन के इस सैन्य कदम ने बैठक से पहले तनाव बढ़ा दिया है. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने रविवार को कहा, “ताइवान को इस बैठक को लेकर चिंता करने की आवश्यकता नहीं है. अमेरिका अपनी प्रतिबद्धता पर कायम है.” अमेरिका लंबे समय से ताइवान का सबसे बड़ा अनौपचारिक सहयोगी रहा है. अमेरिकी कानून के तहत, वॉशिंगटन ताइवान को रक्षा उपकरण और तकनीकी सहयोग देने के लिए बाध्य है, चाहे दोनों देशों के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध न हों.

रणनीतिक संदेश या मनोवैज्ञानिक दबाव?

विश्लेषकों का मानना है कि शी जिनपिंग का यह कदम ट्रंप के साथ होने वाली वार्ता से ठीक पहले एक रणनीतिक दबाव बनाने की कोशिश है. बीजिंग यह दिखाना चाहता है कि वह इंडो-पैसिफिक में अपनी स्थिति से पीछे हटने वाला नहीं है. साथ ही, यह अभ्यास ताइवान के भीतर स्वतंत्रता समर्थक ताकतों को भी सीधी चेतावनी है कि किसी भी सैन्य चुनौती का जवाब ‘ताकत से’ दिया जाएगा. दूसरी ओर, वॉशिंगटन के लिए यह स्थिति दोहरी चुनौती बन चुकी है — एक ओर उसे चीन के साथ वार्ता में संतुलन बनाए रखना है, और दूसरी ओर अपने सहयोगी ताइवान का भरोसा भी नहीं टूटने देना है.

यह भी पढ़ें: दहल उठा रूस! यूक्रेन ने किया जबरदस्त धमाका...दोनों देशों की जंग ने लिया खतरनाक मोड़