भारत, बलूचिस्तान या अफगानिस्तान... किस देश में हमला करेगा पाकिस्तान? रात में आया हथियारों से भरा प्लेन

पाकिस्तान को तुर्की से हथियारों की एक बड़ी खेप मिलने की खबर सामने आई है. बताया जा रहा है कि इस खेप में कई ड्रोन भी शामिल हैं.

China and Turkey Supply weapons Drones Missile Air Defense To Pakistan
प्रतिकात्मक तस्वीर/ AI

इस्लामाबाद: पाकिस्तान को तुर्की से हथियारों की एक बड़ी खेप मिलने की खबर सामने आई है. बताया जा रहा है कि इस खेप में कई ड्रोन भी शामिल हैं. खास बात यह है कि हथियारों की यह सप्लाई बेहद गोपनीय तरीके से की गई और इसकी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है.

यह सप्लाई ऐसे समय में हुई है, जब पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब के बीच मक्का समझौता हो चुका है. भारत के लिए यह घटनाक्रम इसलिए अहम है क्योंकि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी तुर्की की ओर से पाकिस्तान को सैन्य मदद मिलने की खबरें सामने आई थीं.

तीन दिनों तक दिखी सैन्य विमानों की आवाजाही

रिपोर्टों के मुताबिक, 19 से 21 अगस्त के बीच तुर्की के सैन्य विमानों ने पाकिस्तान के कई एयरबेस का दौरा किया. इनमें सी-130 और ए-400एम जैसे बड़े सैन्य परिवहन विमान शामिल बताए जा रहे हैं.

करीब 60 से 65 घंटे तक इन विमानों की आवाजाही पर नजर रखे जाने का दावा किया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, कुछ उड़ानें रात के समय हुईं और सैन्य विमान पाकिस्तान के अलग-अलग एयरबेस पर पहुंचे.

पाकिस्तान को क्या मिला?

सुरक्षा सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि तुर्की के सी-130 विमान रावलपिंडी के नूरखान और कराची के मसरूर एयरबेस पर पहुंचे. वहीं एक ए-400एम विमान मुरीद एयरबेस पर उतरा.

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इन विमानों के जरिए पाकिस्तान को बायरक्तार टीबी2 और अकिंसी जैसे ड्रोन मिले हैं. इसके अलावा कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित क्रूज मिसाइल मिलने की भी बात कही जा रही है.

हालांकि, इन हथियारों की संख्या और पूरी खेप को लेकर अभी तक पाकिस्तान या तुर्की की ओर से आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है.

चीन के विमान भी आए नजर

रिपोर्ट के मुताबिक, तुर्की के अलावा चीन के सैन्य विमानों की गतिविधियां भी पाकिस्तान में देखी गई हैं. इन विमानों को रावलपिंडी के नूरखान और कराची के मसरूर एयरबेस पर उतरते हुए देखा गया.

तुर्की और चीन दोनों से सैन्य सामान की आवाजाही की खबरों ने पाकिस्तान की सैन्य तैयारियों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. हालांकि, सिर्फ विमानों की आवाजाही के आधार पर यह कहना मुश्किल है कि पाकिस्तान किसी खास सैन्य कार्रवाई की तैयारी कर रहा है.

पाकिस्तान क्यों बढ़ा रहा हथियारों का भंडार?

पाकिस्तान पिछले कुछ समय से चीन और तुर्की के साथ अपने सैन्य संबंध लगातार मजबूत कर रहा है. हाल ही में सऊदी अरब और तुर्की के साथ रक्षा सहयोग भी बढ़ा है. चीन से पाकिस्तान लंबे समय से लड़ाकू विमान, ड्रोन और दूसरे सैन्य उपकरण खरीदता रहा है.

ऐसे में हथियारों की नई खेप पूरी तरह से अलग घटना नहीं है. लेकिन इस बार जिस तरह सैन्य विमानों की गुप्त आवाजाही की खबर सामने आई है, उसने सुरक्षा विशेषज्ञों का ध्यान जरूर खींचा है.

भारत के खिलाफ या बलूचिस्तान में कार्रवाई?

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को पाकिस्तान की सैन्य गतिविधियों पर नजर बनाए रखनी चाहिए. तुर्की और चीन से मिलने वाले ड्रोन और दूसरे हथियारों का इस्तेमाल पाकिस्तान अपनी अलग-अलग सुरक्षा जरूरतों के लिए कर सकता है.

वहीं कुछ क्षेत्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि इन ड्रोन का इस्तेमाल बलूचिस्तान में सक्रिय विद्रोही संगठनों के खिलाफ भी किया जा सकता है. इसलिए अभी यह साफ नहीं है कि हथियारों की यह खेप भारत को ध्यान में रखकर लाई गई है या पाकिस्तान अपने अंदरूनी सुरक्षा अभियानों के लिए इसका इस्तेमाल करेगा.

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