भारत की सैन्य ताकत न देखे दुनिया... इसके लिए चीन-पाकिस्तान ने चली गंदी चाल, रिपोर्ट में हुआ खुलासा

"ऑपरेशन सिंदूर" के दौरान भारत ने अपने सैन्य पराक्रम का एक प्रभावशाली प्रदर्शन किया, जिससे न केवल पाकिस्तान बल्कि चीन में भी चिंता की लहर दौड़ गई.

China and pakistan played a dirty trick against India
प्रतीकात्मक तस्वीर/Photo- ANI

नई दिल्ली: "ऑपरेशन सिंदूर" के दौरान भारत ने अपने सैन्य पराक्रम का एक प्रभावशाली प्रदर्शन किया, जिससे न केवल पाकिस्तान बल्कि चीन में भी चिंता की लहर दौड़ गई. इस सैन्य अभियान के कई पहलू सामने आए हैं, जिनमें पारंपरिक संघर्ष से इतर सूचना युद्ध (Information Warfare) और प्रॉक्सी रणनीतियाँ भी शामिल थीं. हाल ही में सामने आई सैटेलाइट इमेजेस और खुफिया रिपोर्ट्स के ज़रिए भारत-विरोधी प्रयासों के कुछ अहम पहलुओं का खुलासा हुआ है.

सैटेलाइट तस्वीरों से हुआ पाकिस्तान का पर्दाफाश

भारत की ओर से किए गए लक्षित हमलों के बाद, पाकिस्तान ने उन नुकसानों को छिपाने की कोशिश की, जो कि उसके कुछ एयरबेस—मुरीदके, जैकोबाबाद और भोलारी—पर हुए थे.

रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने क्षतिग्रस्त संरचनाओं को तिरपाल से ढक कर उपग्रह से नजर आने वाले संकेतों को छिपाने का प्रयास किया, जिसे कुछ हल्के-रेजोल्यूशन सैटेलाइट इमेजेस में पहचान पाना मुश्किल था.

मैक्सार टेक्नोलॉजीज से प्राप्त तस्वीरों में देखा गया कि भोलारी एयरबेस पर एक क्षतिग्रस्त हैंगर की छत को हरे तिरपाल से ढका गया है. इस तकनीकी 'कैमोफ्लाज' की पहचान सबसे पहले जियो-इंटेलिजेंस विशेषज्ञ डेमियन साइमन द्वारा की गई. इस घटना को अनौपचारिक रूप से "ऑपरेशन तिरपाल" नाम दिया गया है.

चीन की भूमिका: प्रॉक्सी युद्ध और प्रोपेगेंडा रणनीति

फ्रांस की खुफिया एजेंसी द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को केवल सैन्य सहायता ही नहीं दी, बल्कि एक संगठित प्रोपेगेंडा अभियान के माध्यम से भारत की सैन्य प्रतिष्ठा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कमजोर करने का प्रयास भी किया.

इसका केंद्र बना भारत के फ्रांसीसी मूल के लड़ाकू विमान राफेल, जिसे लेकर चीन ने झूठे दावे और डिजिटल डिसइन्फॉर्मेशन कैम्पेन चलाया.
उदाहरण के लिए:

  • पाकिस्तान ने यह दावा किया कि उसने तीन राफेल सहित पांच भारतीय विमानों को मार गिराया.
  • इसके समर्थन में एआई-निर्मित मलबे की तस्वीरें, वीडियो क्लिप और 1000 फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट का सहारा लिया गया.
  • यह अभियान विशेष रूप से उन देशों को प्रभावित करने के लिए था जो फ्रांसीसी रक्षा उपकरण खरीदने पर विचार कर रहे थे.

फ्रांस के रक्षा और खुफिया अधिकारियों ने रिपोर्ट में बताया कि चीनी दूतावासों के रक्षा अधिकारियों ने विभिन्न देशों को राफेल के बजाय चीनी विमान खरीदने के लिए मनाने की कोशिश की.

भारत और राफेल निर्माता का स्पष्टीकरण

भारत ने पाकिस्तान द्वारा किए गए राफेल-विरोधी दावों की पुष्टि नहीं की, परंतु उच्च सैन्य अधिकारियों ने इतना जरूर कहा कि “युद्ध में नुकसान होना असामान्य नहीं है.”

एयर मार्शल ए.के. भारती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह संकेत दिया कि नुकसान हुआ हो सकता है, लेकिन आंकड़े और दावे अतिरंजित हैं.

भारतीय नौसेना के कैप्टन शिव कुमार ने माना कि सैन्य अभियान के पहले दिन कुछ विमानों को नुकसान पहुंचा था, लेकिन पांच लड़ाकू विमानों की क्षति का दावा "अतिरंजित" है.

इस बीच, राफेल विमान की निर्माता कंपनी दसॉल्ट एविएशन के CEO एरिक ट्रैपियर ने पाकिस्तान के दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे "झूठा और तथ्यहीन" बताया. उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तानी दावे में जिन तस्वीरों का हवाला दिया गया, वे नकली और डिजिटल रूप से गढ़ी गई थीं.

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