चीन ने तोड़ा सब्र का बाण! जापान ने ऐसा क्या किया? गुस्से में लाल हुआ ड्रैगन का देश

एशिया की राजनीतिक फिज़ाओं में अचानक तेज़ गर्मी बढ़ गई है. वजह है जापान का वह ऐतिहासिक कदम, जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी—द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार जापान ने एक पूरा हथियार सिस्टम किसी देश को निर्यात किया है, और वो भी सीधे अमेरिका को. 

China and Japan Crashesh angry on 104 patriot missile export
Image Source: Social Media

एशिया की राजनीतिक फिज़ाओं में अचानक तेज़ गर्मी बढ़ गई है. वजह है जापान का वह ऐतिहासिक कदम, जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी—द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार जापान ने एक पूरा हथियार सिस्टम किसी देश को निर्यात किया है, और वो भी सीधे अमेरिका को. 

इस कदम ने बीजिंग को गुस्से से भर दिया है, और चीन खुलकर जापान को उसके इतिहास, संविधान और युद्धोत्तर शांति समझौते की याद दिला रहा है.जापान की यह नई आक्रामक रणनीति एशिया-प्रशांत में शक्ति समीकरणों में बड़ा बदलाव लाने वाली दिख रही है.

पुराने घाव फिर ताज़ा: जापान-चीन रिश्तों में बढ़ी तल्ख़ी

चीन और जापान के रिश्ते दशकों से तनावों से भरे रहे हैं. पूर्वी चीन सागर में द्वीपों को लेकर विवाद लगातार दोनों देशों को आमने-सामने खड़ा करता है. कई मौकों पर नौसैनिक टकराव तक हो चुके हैं.इसके साथ ही जापानी प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची के हालिया ताइवान वाले बयान ने चीन की नाराज़गी को और बढ़ा दिया था. अब मिसाइल निर्यात का यह कदम चीन के लिए एक सीधा संदेश माना जा रहा है—जापान अब पहले वाला शांतिपसंद देश नहीं रहा.

अमेरिका को क्यों चाहिए जापान की पैट्रियट मिसाइलें

क्योडो न्यूज के अनुसार, अमेरिका इन मिसाइलों का उपयोग अपने घटते सैन्य भंडार को भरने के लिए करेगा.यूक्रेन युद्ध ने अमेरिकी हथियारों के स्टॉक को काफी खाली कर दिया है. इस कारण वॉशिंगटन ऐसे देशों की तलाश में है जो जल्दी उत्पादन कर सकें और डिलीवरी भी तेज़ी से दे सकें. जापान की तकनीकी क्षमता और अमेरिका-जापान की साझेदारी इस ज़रूरत को पूरा करती है.यही वजह है कि वॉशिंगटन ने टोक्यो की ओर हाथ बढ़ाया और जापान ने ऐतिहासिक रूप से पहली बार एक पूरा हथियार सिस्टम निर्यात करने की मंज़ूरी दी.

जापान की शांति नीति में बड़े बदलाव

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जापान ने हथियार निर्यात को लेकर बेहद सख्त नियम बनाए थे. उसके तीन मूल सिद्धांत (Three Principles on Defense Equipment Transfer) हथियार एक्सपोर्ट को लगभग असंभव बना देते थे.
लेकिन अब एशिया में बदलते सुरक्षा माहौल—विशेषकर चीन और उत्तर कोरिया के बढ़ते सैन्य व्यवहार—ने जापान को रणनीति बदलने पर मजबूर किया है.2023 में जापान ने अपने नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन कर अमेरिका को जापान में बनी पैट्रियट मिसाइलों की सप्लाई की अनुमति दी. यह बदलाव अब उसके नए रणनीतिक युग की शुरुआत माना जा रहा है.

चीन ने क्या आरोप लगाए?

बीजिंग ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जापान अपने अतीत को छिपाने की कोशिश कर रहा है और शांतिवादी संविधान को कमजोर कर रहा है.चीन का तर्क है कि जापान हथियारों का निर्माण और निर्यात बढ़ाकर एशिया में अस्थिरता पैदा कर रहा है.जापान इन आरोपों को खारिज करता है और कहता है कि वह केवल क्षेत्र में बढ़ते सुरक्षा खतरों—विशेषकर चीन की सैन्य गतिविधियों—का जवाब दे रहा है.

यह भी पढ़ें: तेजस ही नहीं दुबई एयर शो में क्रैश हो चुके हैं पाक-चीन समेत इन देशों के लड़ाकू विमान, जानें पूरी जानकारी