LPG Surcharge: क्या LPG महंगा होने पर रेस्टोरेंट्स वसूल सकते हैं 'गैस चार्ज', क्या कहते हैं नियम?

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, खासकर ईरान और इजराइल के बीच हालात बिगड़ने के बाद भारत में कमर्शियल एलपीजी गैस सिलेंडर की सप्लाई पर असर देखने को मिल रहा है.

Can restaurants charge gas charges if LPG becomes expensive
प्रतिकात्मक तस्वीर/ AI

LPG Surcharge: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, खासकर ईरान और इजराइल के बीच हालात बिगड़ने के बाद भारत में कमर्शियल एलपीजी गैस सिलेंडर की सप्लाई पर असर देखने को मिल रहा है. कई शहरों में रेस्टोरेंट, होटल और ढाबा संचालक गैस की बढ़ती कीमतों और सीमित उपलब्धता के कारण परेशान हैं. रोजाना बड़ी मात्रा में गैस का इस्तेमाल करने वाले इन व्यवसायों के सामने लागत बढ़ने की चुनौती खड़ी हो गई है.

कई जगहों पर सिलेंडर की कमी के चलते लंबी कतारें लग रही हैं, जबकि कुछ इलाकों में ब्लैक मार्केट में ऊंचे दामों पर गैस बेचे जाने की शिकायतें भी सामने आई हैं. इस स्थिति के बीच अब ग्राहकों के बिल में ‘गैस चार्ज’ जोड़ने का मामला भी चर्चा में आ गया है.

वायरल बिल से मचा बवाल

हाल ही में बेंगलुरु के एक कैफे का बिल सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसमें 5% डिस्काउंट देने के बाद 5% ‘गैस क्राइसिस चार्ज’ जोड़ा गया था. करीब 17 रुपये का यह अतिरिक्त शुल्क जीएसटी के साथ कुल बिल को 374 रुपये तक ले गया.

इस बिल की तस्वीर सामने आने के बाद लोगों ने सवाल उठाना शुरू कर दिया कि एक साधारण पेय जैसे नींबू पानी पर गैस चार्ज कैसे लगाया जा सकता है. कई यूजर्स ने इसे उपभोक्ताओं के साथ अनुचित व्यवहार और ‘लूट’ तक करार दिया.

ऐसे ही मामले चेन्नई, गुरुग्राम और अन्य शहरों से भी सामने आए हैं, जहां इडली-वड़ा, मोमोज या अन्य खाने की चीजों पर 9 से 30 रुपये तक का अतिरिक्त ‘एलपीजी चार्ज’ जोड़ा गया. कुछ रेस्टोरेंट्स ने लागत बढ़ने के कारण सीधे मेन्यू के दाम बढ़ा दिए हैं, जबकि कुछ ने अस्थायी रूप से अपना कारोबार बंद भी कर दिया है.

क्या कानून इसकी अनुमति देता है?

उपभोक्ता अधिकारों से जुड़े नियम इस मामले में साफ हैं. कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट 2019 और सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) के दिशा-निर्देशों के अनुसार, रेस्टोरेंट बिल में केवल खाने-पीने की वस्तुओं की वास्तविक कीमत और लागू जीएसटी ही जोड़ा जा सकता है.

सर्विस चार्ज को लेकर भी नियम स्पष्ट हैं- इसे जबरन नहीं जोड़ा जा सकता और यह पूरी तरह ग्राहक की इच्छा पर निर्भर करता है. यदि कोई ग्राहक सर्विस चार्ज देने से मना करता है, तो रेस्टोरेंट उसे देने के लिए मजबूर नहीं कर सकता.

ऐसे में ‘गैस क्राइसिस चार्ज’ या ‘एलपीजी चार्ज’ जैसे अतिरिक्त शुल्क को अलग से जोड़ना नियमों के खिलाफ माना जाता है. इसे छिपा हुआ या अनुचित शुल्क (Unfair Trade Practice) की श्रेणी में रखा जाता है.

सरकार और CCPA का क्या कहना है?

सरकार और CCPA पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि रेस्टोरेंट्स किसी भी प्रकार का अतिरिक्त शुल्क डिफॉल्ट रूप से या बिना ग्राहक की सहमति के नहीं जोड़ सकते. ऐसा करना उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है.

यदि किसी व्यवसाय को बढ़ती लागत की वजह से कीमत बढ़ानी है, तो उसे अपने मेन्यू में ही बदलाव करना होगा. बिल में अलग से ‘गैस चार्ज’ जैसी लाइन जोड़ना पारदर्शिता के नियमों के खिलाफ है.

शिकायत कैसे करें?

अगर किसी ग्राहक को अपने बिल में ऐसा कोई अतिरिक्त या संदिग्ध चार्ज दिखता है, तो वह इसकी शिकायत कर सकता है. इसके लिए कई विकल्प उपलब्ध हैं-

  • नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन नंबर 1915 पर कॉल किया जा सकता है
  • NCH (National Consumer Helpline) ऐप के जरिए शिकायत दर्ज की जा सकती है
  • या फिर आधिकारिक पोर्टल consumerhelpline.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत की जा सकती है
  • शिकायत के दौरान बिल की फोटो या अन्य सबूत देना जरूरी होता है.

CCPA ऐसे मामलों की जांच कर सकती है और दोषी पाए जाने पर रेस्टोरेंट पर जुर्माना (करीब 50,000 रुपये तक) लगा सकती है या ग्राहक को रिफंड देने का आदेश दे सकती है.

रेस्टोरेंट्स की दलील और नियमों की सख्ती

दूसरी ओर, रेस्टोरेंट संचालकों का कहना है कि गैस की कीमतों में तेजी से वृद्धि होने के कारण उनकी लागत काफी बढ़ गई है. ऐसे में उन्हें या तो कीमतें बढ़ानी पड़ती हैं या कारोबार बंद करना पड़ता है.

हालांकि कानून के अनुसार, किसी भी अतिरिक्त शुल्क को पारदर्शी तरीके से लागू करना जरूरी है. यदि कोई नया चार्ज लगाया जाता है, तो ग्राहक को पहले इसकी जानकारी देना और उसकी सहमति लेना आवश्यक है.

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