नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारतीय नौसेना ने अपने ऑपरेशन को और तेज कर दिया है. होर्मुज जलडमरूमध्य और उसके आसपास के संवेदनशील इलाकों में भारतीय युद्धपोत लगातार निगरानी कर रहे हैं. इसके साथ ही खाड़ी क्षेत्र के बाहर अरब सागर में भी भारतीय जहाजों और तेल टैंकरों को एस्कॉर्ट कर सुरक्षित देश तक पहुंचाने का अभियान जारी है.
सोमवार को एक अहम घटनाक्रम में भारतीय तेल टैंकर जग लाडकी को नौसेना के युद्धपोत की निगरानी में सुरक्षित आगे बढ़ते देखा गया. यह टैंकर 80,800 मीट्रिक टन मुरबान क्रूड ऑयल लेकर भारत की ओर रवाना हुआ है.
फुजैराह बंदरगाह पर ईरानी ड्रोन हमला
बताया गया कि जब यह टैंकर फुजैराह बंदरगाह पर कच्चा तेल लोड कर रहा था, उसी दौरान वहां एक संदिग्ध ईरानी ड्रोन हमला हुआ. यह घटना 14 मार्च 2026 की बताई जा रही है.
हालांकि इस हमले में टैंकर को कोई नुकसान नहीं पहुंचा और उस पर मौजूद सभी भारतीय नाविक पूरी तरह सुरक्षित हैं.
रणनीतिक रूप से अहम है फुजैराह पोर्ट
फुजैराह बंदरगाह की खास बात यह है कि यह होर्मुज जलडमरूमध्य के दक्षिण में स्थित है, जिससे यहां से आने-जाने वाले जहाजों को इस संवेदनशील स्ट्रेट से गुजरने की जरूरत नहीं पड़ती. यही वजह है कि यह पोर्ट तेल आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है.
ऑपरेशन संकल्प के तहत बढ़ी गतिविधियां
जानकारों के अनुसार, भारतीय नौसेना की यह सक्रियता ऑपरेशन संकल्प का हिस्सा है. इस ऑपरेशन का उद्देश्य भारतीय जहाजों, टैंकरों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, खासकर तब जब क्षेत्र में संघर्ष और अस्थिरता बढ़ रही हो.
हालांकि नौसेना की ओर से वॉरशिप की सटीक तैनाती पर आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर चौकसी काफी बढ़ा दी गई है.
दो टास्क फोर्स कर रही सुरक्षा की निगरानी
सूत्रों के मुताबिक भारतीय जहाजों और नाविकों की सुरक्षा के लिए नौसेना ने युद्धपोतों पर दो अलग-अलग टास्क फोर्स तैनात किए हैं. इनका उद्देश्य किसी भी आपात स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया देना और जहाजों को सुरक्षित मार्ग प्रदान करना है.
पश्चिम एशिया में जारी संकट को देखते हुए इन टास्क फोर्स को हाई अलर्ट पर रखा गया है.
कई मंत्रालयों के समन्वय से चल रहा अभियान
ऑपरेशन संकल्प को केवल नौसेना ही नहीं, बल्कि कई सरकारी मंत्रालयों के समन्वय से संचालित किया जा रहा है. इसमें रक्षा मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, शिपिंग मंत्रालय, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय और डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ शिपिंग शामिल हैं.
इस समन्वय का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर किसी भी प्रकार का असर न पड़े.
खाड़ी क्षेत्र में भारतीय जहाजों की स्थिति
सरकारी जानकारी के अनुसार 16 मार्च 2026 की शाम तक खाड़ी क्षेत्र में भारतीय जहाजों की स्थिति इस प्रकार है:
एलपीजी टैंकरों की सुरक्षित वापसी
इसी दौरान भारतीय एलपीजी टैंकर शिवालिक सुरक्षित रूप से मुंद्रा पोर्ट पहुंच चुका है. वहीं दूसरा टैंकर नंदा देवी कांडला बंदरगाह पहुंचने वाला है.
इन दोनों टैंकरों के जरिए कुल 92,712 मीट्रिक टन एलपीजी भारत लाया गया है, जो घरेलू जरूरतों के लिए अहम माना जा रहा है.
ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने की चुनौती
इसके अलावा जग लाडकी के जरिए 80,800 मीट्रिक टन उच्च गुणवत्ता वाला मुरबान क्रूड ऑयल भारत लाया जा रहा है.
मौजूदा हालात में जब पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है, ऐसे में भारतीय नौसेना का यह अभियान देश की ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री व्यापार को बनाए रखने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.
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