Budget 2026: निर्मला सीतारमण ने पेश किया बजट, क्या सस्ता और क्या हुआ महंगा? जानें सबकुछ

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में बजट 2026 पेश किया. यह उनका लगातार नौवां बजट और मौजूदा सरकार का 15वां केंद्रीय बजट रहा. बजट पेश होते ही देशभर में इसका असर दिखने लगा है.

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प्रतिकात्मक तस्वीर/ AI

Budget 2026: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में बजट 2026 पेश किया. यह उनका लगातार नौवां बजट और मौजूदा सरकार का 15वां केंद्रीय बजट रहा. बजट पेश होते ही देशभर में इसका असर दिखने लगा है. आम नागरिक से लेकर कारोबारियों और निवेशकों तक, हर कोई यह समझना चाहता है कि इस बजट से उसकी रोजमर्रा की जिंदगी पर क्या असर पड़ेगा.

हर साल की तरह इस बार भी लोगों की सबसे बड़ी जिज्ञासा यही है कि बजट के बाद कौन-सी चीजें सस्ती होंगी और किन वस्तुओं पर जेब ज्यादा ढीली करनी पड़ेगी. सरकार ने कुछ सेक्टर्स को राहत देकर उपभोक्ताओं को फायदा पहुंचाने की कोशिश की है, वहीं कुछ क्षेत्रों में टैक्स और ड्यूटी बढ़ने से कीमतों में इजाफा होना तय माना जा रहा है.

खेल और फिटनेस से जुड़ी चीजें होंगी सस्ती

बजट 2026 के बाद खेल-कूद से जुड़े सामान अब पहले की तुलना में कम दाम पर मिलने की संभावना है. सरकार के इस फैसले का मकसद युवाओं और बच्चों में खेलों के प्रति रुचि बढ़ाना और घरेलू खेल उद्योग को बढ़ावा देना है. सस्ते दामों पर स्पोर्ट्स इक्विपमेंट मिलने से स्कूलों, अकादमियों और आम उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी, जिससे खेल सामग्री की मांग और बिक्री दोनों बढ़ सकती हैं.

दवाओं के दाम घटेंगे, मरीजों को राहत

स्वास्थ्य क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए सरकार ने कई अहम दवाओं को सस्ता करने का फैसला किया है. बजट के बाद कैंसर से जुड़ी 17 प्रमुख दवाओं के साथ-साथ गंभीर बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली करीब 7 अन्य दवाओं की कीमतें कम होंगी. इससे लंबे समय से महंगे इलाज का बोझ झेल रहे मरीजों और उनके परिवारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. यह कदम हेल्थकेयर को ज्यादा किफायती बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है.

बीड़ी सस्ती, लेकिन सिगरेट पर राहत नहीं

तंबाकू उत्पादों की बात करें तो बजट के बाद बीड़ी की कीमतों में कमी देखी जा सकती है, जबकि सिगरेट पीने वालों को कोई खास राहत नहीं मिली है. यानी बीड़ी सस्ती हो सकती है, लेकिन सिगरेट पर टैक्स या कीमतों में कोई कमी नहीं की गई है. यह फैसला स्वास्थ्य नीतियों के संतुलन और टैक्स ढांचे को ध्यान में रखते हुए लिया गया माना जा रहा है.

लेदर प्रोडक्ट और जूते होंगे सस्ते

चमड़े से बने जूते और अन्य लेदर प्रोडक्ट्स अब पहले की तुलना में सस्ते हो सकते हैं. बजट में इस सेक्टर को राहत देने से घरेलू लेदर उद्योग को फायदा मिलेगा और उपभोक्ताओं के लिए फुटवियर और बैग जैसे उत्पाद अधिक किफायती होंगे. इससे छोटे कारोबारियों और मैन्युफैक्चरर्स को भी मांग बढ़ने का फायदा मिल सकता है.

मोबाइल फोन और ईवी बैटरी की कीमतें घटेंगी

टेक्नोलॉजी और ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के मकसद से मोबाइल फोन और इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) की बैटरियों को सस्ता करने का प्रावधान किया गया है. इससे स्मार्टफोन खरीदने वालों को राहत मिलेगी और इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की रफ्तार तेज हो सकती है. EV सेक्टर में बैटरियों की लागत कम होना उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत मानी जाती है, क्योंकि यही इलेक्ट्रिक गाड़ियों की सबसे महंगी यूनिट होती है.

बायोगैस मिक्स्ड CNG होगी सस्ती

पर्यावरण के अनुकूल ईंधन को प्रोत्साहित करने के लिए बायोगैस से मिश्रित CNG को सस्ता करने का फैसला किया गया है. इससे न केवल परिवहन लागत घटेगी, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल को भी बढ़ावा मिलेगा. टैक्सी, ऑटो और पब्लिक ट्रांसपोर्ट जैसे क्षेत्रों में इसका सीधा फायदा देखने को मिल सकता है.

घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स और सोलर प्रोडक्ट्स में राहत

बजट के बाद माइक्रोवेव ओवन जैसे घरेलू इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद सस्ते होने की संभावना है. इसके अलावा सोलर एनर्जी से जुड़े उपकरणों की कीमतों में भी कमी आ सकती है. सरकार का फोकस साफ ऊर्जा और रिन्यूएबल एनर्जी को बढ़ावा देने पर है, ताकि आम लोगों को सोलर पैनल और इससे जुड़े उपकरण अपनाने के लिए प्रोत्साहन मिले.
साथ ही, कपड़ों की कीमतों में भी कुछ राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे रोजमर्रा की जरूरतों पर खर्च थोड़ा कम हो सकता है.

बजट 2026 के बाद क्या होगा महंगा?

जहां कुछ वस्तुओं पर राहत दी गई है, वहीं कुछ क्षेत्रों में कीमतों में बढ़ोतरी भी तय है.

शराब होगी महंगी

शराब पर टैक्स बढ़ने या राहत न मिलने के चलते इसके दाम बढ़ सकते हैं. इसका सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ेगा और शराब की कीमतों में इजाफा देखने को मिल सकता है.

स्क्रैप और खनिज होंगे महंगे

उद्योगों में इस्तेमाल होने वाले स्क्रैप और खनिजों की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है. इससे मैन्युफैक्चरिंग लागत बढ़ने की संभावना है, जिसका असर आगे चलकर कुछ उत्पादों की कीमतों पर भी पड़ सकता है.

फ्यूचर एंड ऑप्शन ट्रेडिंग होगी महंगी

शेयर बाजार में फ्यूचर और ऑप्शन ट्रेडिंग करने वालों के लिए लागत बढ़ सकती है. बजट के बाद इस सेगमेंट में टैक्स या शुल्क बढ़ने से निवेशकों के लिए ट्रेडिंग करना थोड़ा महंगा साबित हो सकता है.

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