Budget 2026: चीन की दादागिरी खत्म करने की तैयारी! भारत बनेगा सेमीकंडक्टर हब, बजट में मिले 40,000 करोड़

केंद्रीय बजट 2026-27 में भारत सरकार ने सेमीकंडक्टर सेक्टर को लेकर एक अहम और दूरगामी फैसला लिया है.

Budget 2026 India will become semiconductor hub Nirmala Sitharaman
प्रतिकात्मक तस्वीर/ AI

Budget 2026: केंद्रीय बजट 2026-27 में भारत सरकार ने सेमीकंडक्टर सेक्टर को लेकर एक अहम और दूरगामी फैसला लिया है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने “इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0” की शुरुआत की घोषणा करते हुए साफ संकेत दिया कि अब देश तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़े पैमाने पर निवेश करने जा रहा है. इस मिशन के तहत सरकार का फोकस सेमीकंडक्टर उद्योग के नेतृत्व में रिसर्च, डिजाइन और स्किल डेवलपमेंट को बढ़ावा देने पर रहेगा.

सरकार ने सेमीकंडक्टर मिशन के लिए आवंटित बजट को बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपये कर दिया है. यह निवेश केवल फैक्ट्रियां लगाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे देशभर में आधुनिक रिसर्च सेंटर, ट्रेनिंग हब और टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम तैयार किया जाएगा. खास बात यह है कि ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे खनिज-संपन्न राज्यों को इस मिशन में विशेष सहयोग दिया जाएगा, ताकि सेमीकंडक्टर निर्माण के लिए जरूरी कच्चे माल और केमिकल्स की घरेलू सप्लाई मजबूत हो सके.

इसके साथ ही सरकार तीन विशेष केमिकल पार्क स्थापित करने की योजना पर भी काम करेगी. इन पार्कों का उद्देश्य सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में उपयोग होने वाले जरूरी रसायनों और सामग्री का देश में ही उत्पादन बढ़ाना है. इससे भारत की मैन्युफैक्चरिंग चेन मजबूत होगी और विदेशी सप्लाई पर निर्भरता धीरे-धीरे कम हो सकेगी.

क्यों अहम है सेमीकंडक्टर मिशन?

आज के दौर में सेमीकंडक्टर किसी भी देश की तकनीकी रीढ़ बन चुके हैं. मोबाइल फोन, लैपटॉप, स्मार्ट टीवी, इंटरनेट डिवाइस, कार, वॉशिंग मशीन, एसी और लगभग हर आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण में चिप्स का इस्तेमाल होता है. भारत अभी भी अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है. इससे न केवल लागत बढ़ती है, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन में किसी भी रुकावट का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और उद्योगों पर पड़ता है.

भारत की सेमीकंडक्टर जरूरतों में चीन पर निर्भरता काफी ज्यादा मानी जाती है. ऐसे में घरेलू स्तर पर चिप निर्माण को बढ़ावा देना रणनीतिक रूप से भी बेहद जरूरी हो जाता है. बजट 2026 में किया गया यह ऐलान इसी दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है, जिससे भविष्य में भारत तकनीकी मामलों में ज्यादा आत्मनिर्भर बन सकेगा.

मेक इन इंडिया को मिलेगा नया इंजन

सेमीकंडक्टर उत्पादन बढ़ने से “मेक इन इंडिया” अभियान को नई ताकत मिलने की उम्मीद है. इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमोबाइल और डिफेंस सेक्टर में घरेलू उत्पादन तेज होगा. इससे न केवल आयात पर निर्भरता घटेगी, बल्कि भारत वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की दिशा में भी आगे बढ़ेगा.

सेमीकंडक्टर फैक्ट्रियों, रिसर्च लैब्स और डिजाइन सेंटरों की स्थापना से लाखों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं. इंजीनियरिंग, आईटी, रिसर्च और टेक्नोलॉजी से जुड़े युवाओं के लिए नए करियर विकल्प खुलेंगे. इसके अलावा, स्किल डेवलपमेंट और ट्रेनिंग सेंटरों के जरिए देश में हाई-टेक मैनपावर तैयार की जाएगी.

राष्ट्रीय सुरक्षा और भविष्य की तकनीक

सेमीकंडक्टर केवल उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स तक सीमित नहीं हैं, बल्कि डिफेंस, स्पेस, मिसाइल टेक्नोलॉजी और साइबर सिक्योरिटी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में भी इनका बड़ा महत्व है. अगर इन क्षेत्रों में इस्तेमाल होने वाली चिप्स देश में ही विकसित और निर्मित होती हैं, तो राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूती मिलेगी और तकनीकी गोपनीयता भी बनी रहेगी.

भविष्य की तकनीकों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), 5G और 6G नेटवर्क, इलेक्ट्रिक व्हीकल, डेटा सेंटर और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स के लिए भी सेमीकंडक्टर बुनियादी जरूरत हैं. बजट 2026 में किया गया यह निवेश भारत को आने वाले वर्षों में इन उभरती तकनीकों में प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक मजबूत आधार प्रदान करता है.

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