The JC Show: दिल्ली में दुनिया जुटी और भारत ने सिर्फ मेजबानी नहीं की, बदलती दुनिया की आवाज को दिशा दी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीति ने ग्लोबल साउथ की आवाज को ग्लोबल एजेंडा बनाने की पहल साफ दिखाई दी. जहां भारत ने कहा कि विकासशील देश सिर्फ रूल टेकर नहीं बल्कि रूल शेपर बनेंगे. मोदी पुतिन की दोस्ती हो, मोदी-शी की मुलाकात हो या फिर अलग-अलग ध्रुवों के बीच संवाद की कोशिश. भारत ने अपनी स्ट्रेटेजिक ऑटोनोमी और डिप्लोमेटिक रीच दोनों का परिचय दिया और आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई को एक बड़ा डिप्लोमेटिक समर्थन मिला. ब्रिक्स के नई दिल्ली डिक्लेरेशन में पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी शब्दों में निंदा की गई और आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस का संदेश दिया गया. तो क्या यह सिर्फ एक ब्रिक्स समिट था या फिर दिल्ली से दुनिया को यह संदेश गया कि ग्लोबल साउथ की आवाज अब भारत की आवाज के साथ और बुलंद हो रही है. ब्रिक्स एंड बिय्ड इंडियास राइज अंडर नमो. आज बात करेंगे भारत की बढ़ती डिप्लोमेटिक ताकत की और वर्ल्ड ऑर्डर की और उस नेतृत्व की जिसने दिल्ली से पूरी दुनिया को कूटनीति के केंद्र में लाकर खड़ा कर दिया है और आज इसी पर चर्चा करेंगे द जेसी शो में और हमारे साथ मौजूद हैं भारत 24 के सीईओ और एडिटर इन चीफ और फर्स्ट इंडिया के सीएमडी और एडिटर इन चीफ डॉ जगदीश चंद्र.
सवाल: आज द जेसी शो की हमने हेडलाइन रखी है ब्रिक्स एंड बिय्ड इंडियास राइज अंडर नमो आखिर आखिर क्या है इसके मायने?
जवाब: अबब्सोलुटली इंडिया राइज अंडर नमो हैज़ बीन अनप्रेसिडेंटेड अनबिलीवेबल अनमचेबल ही कन्वर्टेड इंडिया इनू ए मेजर ग्लोबल पिटिकल पावर 140 करोड़ पीपल ऑफ दिस नेशन लव मोदी दे एडमायर मोदी ही एंजॉयस द टोटल ट्रस्ट एंड कॉन्फिडेंस ऑफ द एंटायर नेशन ही हैज़ रिीफाइंड इंडियन इकॉनमी ही बोट इंडियन इकॉनमी टू फिफ्थ पोजीशन एंड नाउ टारगेट थर्ड पोजीशन इन अ ईयर ओल्ड सो. सो ब्रिक्स और नो ब्रिक्स मोदी पॉपुलरिटी गोज़ ऑन रॉकिंग एंड दैट इज द थीम ऑफ़ द स्टोरी.
सवाल: आज की सेकंड हेडलाइन है अंडर नमो लीडरशिप वर्ल्ड यूनाइट्स इन इंडिया. वुड यू लाइक टू एक्सप्लेन दिस नैरेटिव?
जवाब: ही मैनेजेस ऑल कंट्रा फर्सेस एट वन प्लेटफार्म एट वन पर्टिकुलर पोजीशन एंड इनफैक्ट ही रिशेप्स इंडियन डिप्लोमेसी थ्रू पीस ही रिशेप्स न्यू वर्ल्ड ऑर्डर थ्रू पीस सो दिस इज ऑल प्रसाइजली ह कैपेसिटी टू कोऑर्डिनेट विद डिफरेंट इज अनप्रेसिडेंटेड. सो दिस इज ऑल.
सवाल: राजनीतिक प्रेक्षकों का यह कहना है कि ब्रिक्स समिट के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक और तमन्ना पूरी हो गई है. इस समिट की सफलता के साथ ही आप क्या कहना चाहेंगे इस बारे में?
जवाब: बिल्कुल आप ठीक कह रहे हैं. उनकी एक तमन्ना निश्चित तौर पर रही होगी. जब वो संसार में जाते हैं, अलग-अलग देशों में जाते हैं, भारत का मान सम्मान देखते हैं, 36 पुरस्कार पाते हैं. तो मन में कभी आता होगा कि यह जो ग्लोबल स्वरूप है भारत का मेरा जो ग्लोबल स्वरूप है, ये मेरे देश में लोग देखें. भारत के इस अंतरराष्ट्रीय कद को, अंतरराष्ट्रीय महत्व को दिल्ली में बैठ के देश के लोग देखें. तो उनकी तमन्ना पूरी हुई. तो उन्होंने कितनी सफलता से इसको आयोजन किया और आज तक देश के इतिहास में कहना चाहिए बल्कि ब्रिक्स समिट के इतिहास में जो है इतना शानदार इतना भव्य आयोजन कभी नहीं हुआ तो निश्चित तौर पे नरेंद्र मोदी की एक तमन्ना रही होगी कि भारत का जो अंतरराष्ट्रीय स्वरूप है उसमें भारत में बैठ के लोगों को दिखाऊं वो तमन्ना उनकी आज पूरी हो गई है.
सवाल: इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पुतिन और शी जिनपिंग के एक पिक्चर ने सबका ध्यान खींचा जिसमें तीनों नेता मुस्कुराते हुए एक दूसरे का हाथ थामे नजर आ रहे हैं. क्या कहती है ग्लोबल पिक्चर?
जवाब: वन फ्रेम थ्री सुपर लीडर्स, थ्री पावरफुल ग्लोबल लीडर्स एंड एट द सेंटर स्टेज नरेंद्र मोदी. सो इट इज़ वेरी क्लियर इन द न्यू वर्ल्ड ऑर्डर नरेंद्र मोदी हैज़ कैप्चरर्ड ए यूनिक पोजीशन एंड दिस पिक्चर शोज़ ओनली दिस फैक्ट.
सवाल: सर, व्हाई डस द वर्ल्ड? ट्रस्ट मोदी?
जवाब: यू सी ही इज़ क्रेडिबल. ही टॉक सेंस. ही इज़ अ मैन ऑफ योर वर्ड्स. एंड फाइनली ही डिलीवरर्स. सो पीपल रेस्पेक्टिंग पीपल लिसन टू हिम.
सवाल: सर डिप्लोमेटिक सर्कल्स में नरेंद्र मोदी को ब्रिक्स समिट का मैन ऑफ द मैच कहा जा रहा है. इस बारे में आप कुछ कहना चाहेंगे?
जवाब: यह उनकी नेतृत्व क्षमता को दर्शाता है. इन ए वे आप ये कह सकते हैं. और मैं तो यह कहूंगा कि ब्रिक्स स्टार्ट्स विद मोदी. ब्रिक्स एंड्स विद मोदी एंड एट द एंड ऑफ़ द डे ही इज़ द मैन ऑफ़ द मैच. एवरीबॉडी रिकग्नाइज़ेस एंड ही वाज़ द मेन सेंटर ऑफ़ अट्रैक्शन थ्रूउ दिस टू डे कॉन्क्लेव. सो वन कैन इज़ली कंक्लूड ही वाज़ अ मेन चार मेन हार्ट एंड सोल ऑफ ब्रिक्स एंड यू कैन से मैन ऑफ़ द मैच ऑफ ब्रिक्स.
सवाल: संसार के राजनीतिक और कूटनीतिक क्षेत्रों में ब्रिक्स में प्रधानमंत्री मोदी के दिए गए भाषण को बहुत ही गंभीरता से सुना गया. आखिर ऐसा क्या कहा प्रधानमंत्री मोदी ने और किन सब्जेक्ट्स पर उनका फोकस रहा?
जवाब: उनका कंसर्न था सबसे बड़ा और पूरे संसार का कंसर्न था. संसार की आवाज को उन्होंने अपने शब्दों में कहा और यह कहा कि देयर शुड बी अ फ्री नेविगेशन होमज उसके संदर्भ में उन्होंने कहा कि फ्री नेविगेशन होना चाहिए. फ्री मोमेंट होना चाहिए. आपने रेस्ट्रिकशंस लगा रखे हैं. उन रेस्ट्रिकशंस को जो है वो हटाया जाए. वहां से जो है सबसे बड़ा था फ्री नेविगेशन होना चाहिए. सेकंड इज के ट्रांसफॉर्मेशन एंड एंपावरमेंट ऑफ ग्लोबल साउथ जो कंट्रीज है उनका होना चाहिए. एंड दे शुड नॉट बी ओनली मियर फॉलोवर्स. देयर शुड बी अ पार्ट ऑफ डिसीजन मेकिंग प्रोसेस. तो ये दो बातें कही. तीसरा उन्होंने कहा कि जो सुरक्षा परिषद है, सिक्योरिटी काउंसिल है, इसमें सुधारों की आवश्यकता है और भारत को भी इसका स्थाई सदस्य बनाया जाना चाहिए. आश्चर्य की बात है कि रशिया और अमेरिका ने भी खास करके चाइना ने भी इसका इस बार जो है समर्थन किया और यूएन चीफ ने भी खुद से कहा कि मैं इसका विस्तार चाहता हूं.
सवाल: दो दिवसीय ब्रिक्स के समापन समारोह में प्रधानमंत्री मोदी ने क्या-क्या महत्वपूर्ण और संवेदनशील बातें कही?
जवाब: उन्होंने बड़ी इंपॉर्टेंट बातें कही उनका जो इको सिस्टम है इस पे ध्यान देना चाहिए और दूसरी इंपॉर्टेंट बात है जो फैसले हम ले रहे हैं इनका टाइमली इंप्लीमेंटेशन के एग्जीक्यूशन कैसे हो इस पे ध्यान देना चाहिए हमें जो है ये दो बातें बड़ी महत्वपूर्ण बातें उन्होंने कही है कि जो फैसले लिए गए हैं इनको एग्जीक्यूट करना है और टाइम लिमिट के अंदर एग्जीक्यूट करना है और जो इकोसिस्टम है पूरा उसको हमें समझना होगा और इसको देखना होगा.
सवाल: आखिर कैसा रहा नरेंद्र मोदी का ब्रिक्स की एक वर्ष की चेयरमैनशिप का अनुभव.
जवाब: उनका अनुभव बहुत शानदार था. ब्रिक्स वाज़ सुपरहिट ड्यूरिंग ह टेन्योर. 50 से ज्यादा उन्होंने जो है इनोवेशन किए और चार पिलर्स उन्होंने जो बनाए आपकी इनोवेशन है, एक्स्ट्रा सेंसिटिविटी है. इनोवेशन के साथ-साथ में जो नए आविष्कार हैं, नए प्रयोग हैं उनको कैसे महत्व देना है और सभी राष्ट्रों को खुली छूट कैसे देनी है आविष्कारों के लिए. तो उनका जो कार्यकाल था वो बहुत अच्छा कार्यकाल था. उसमें उनको बड़ा संतोष है और इसका जो समापन हुआ ये तो सर्वश्रेष्ठता आप देखते हैं कि संसार के किसी भी देश में जब पहले ब्रिक्स से सम्मेलन हुए हैं इतना शानदार आयोजन कभी नहीं हुआ तो उनका ये कार्यकाल जो है उनको हमेशा याद रहेगा और उनका मन तो करता होगा कि एक साल और रहा जाए ब्रिक्स के अंदर. इतना शानदार और आयोजन किया जाए. बट लेट्स सी नाउ इट गोज़ टू चाइना नेक्स्ट ईयर.
सवाल: सर प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिक्स को एंटी वेस्ट ब्लॉक की जगह एक इंडिपेंडेंट प्लेटफार्म के तौर पर प्रेजेंट किया. आपके हिसाब से ये शिफ्ट कितना इंपॉर्टेंट है?
जवाब: ये शिफ्ट बहुत इंपॉर्टेंट है और नरेंद्र मोदी कूटनीति का ये एक प्रतीक है. इसीलिए शायद ट्रंप ने इस बार कोई ज्यादा वो नहीं किया जो है नरेंद्र मोदी का कहना ये है कि भ हम किसी देश के खिलाफ नहीं है. पर हम ये चाहते हैं कि हम सब लोग मिलके काम करें. हमारी सबकी आवाज की सुनाई हो. एंड वी वांट बेटर रिप्रेजेंटेशन इन ग्लोबल साउथ एंड अदर इश्यूज. और हम डिसिशन प्रोसेस का जो है पार्ट बने. हम शत्रु नहीं है. वी आर नॉट कंफेशन. हमारी अपनी मौजूद है. वी शुड नॉट बी रिकग्नाइज एज अ वेस्ट वर्सेस ब्रिक्स. वी शुड रिकग्नाइज ओनली एज अ ब्रिक्स एज इट्स ओन पावर एज इट्स ओन फोर्स. ये उनका बेसिक कहना. तो बेसिकली उन्होंने रिीडफाइन करने की कोशिश की इसको जो है सो इट्स अ गुड आईडिया. गुड एक्सपेरिमेंट.
सवाल: दोस्ती हो तो ऐसी 12 साल में 20 से ज्यादा मुलाकातें. आप कैसे देखते हैं प्रधानमंत्री मोदी और पुतिन की इस दोस्ताना स्टोरी को?
जवाब: दे आर मेड फॉर ईच अदर ऑन द ग्लोबल प्लेटफार्म जिसे हम कह सकते हैं. अब देखिए तीन दिन थे. मैं नहीं समझता मेरे विचार से वह आए थे चाइनीस प्रेसिडेंट 24 घंटे में चले गए यह एक के बजाय दो दिन में जाते तीन दिन है सो कंफर्टेबल नरेंद्र मोदी मतलब मन लगता है भारत मन का नरेंद्र मोदी के साथ उनका मन लगता है तो बिल्कुल ये दोस्ती अटूट है आप देखते हैं और आगे भी कई विषयों पे आप उनके मूवमेंट को आपस में उनके रिश्तों को उनके बिजनेस कांटेक्ट्स को उनके डिप्लोमेसी को आप देखते हैं आई कैन से दे आर मेड फॉर ईच अदर.
सवाल: आखिर किन मुद्दों पर प्रधानमंत्री मोदी और पुतिन के बीच बातचीत हुई और क्या-क्या हुए दोनों देशों के बीच समझौते?
जवाब: भारत ₹1 लाख करोड़ के विमान डिफेंस इक्विपमेंट उनसे खरीदेगा और जो व्यापार है दोनों देशों के बीच में वो 2030 तक जो है 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का उसको लक्ष्य है. और तीसरी इंपॉर्टेंट बात ये है कि बाकी आप जो देखते हैं स्पेस के एग्रीमेंट्स हैं, क्रिटिकल मिनरल्स के एग्रीमेंट्स हैं, ऑयल एग्रीमेंट्स हैं. रूटीन में आप देखते हैं यूपीआई है. आपका जो है उसके एग्रीमेंट्स हैं. सारे एग्रीमेंट्स हुए हैं. लेकिन मेजर एग्रीमेंट्स जो है वो डिफेंस का हुआ है जो आपने देखा है.
सवाल: भारत मंडप में द्विपक्षीय वार्ता के बाद में मोदी और पुतिन एक ही बख्तरबंद कार में निकलते हैं. क्या संदेश है दुनिया के लिए सर?
जवाब: यह तो उनकी पॉपुलर कार डिप्लोमेसी है. काफी टाइम से आप देख रहे हैं. एंड नाउ इट्स द फैशन आल्सो. और वैसे देखा जाए तो सारे प्रतिबंधों के बावजूद वेस्ट के सारे विरोध के बावजूद उनके जो अमेरिका एंड वेस्टर्न कंट्रीज के दोनों की दोस्ती कायम है. इसका मतलब ये है कि नरेंद्र मोदी आपसी संबंधों में किसी तीसरे देश की वकालत को तीसरे देश के हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं करना चाहते. हम् सबसे बड़ी बात यह है और कार्ड डिप्लोमेसी एक टिपिकल वर्ड है आप देखिए नॉर्मल प्रोटोकॉल से हटके है थोड़ा नॉर्मल प्रोटोकॉल में ऐसा नहीं होता कोई कार डिप्लोमेसी नहीं होती कार डिप्लोमेसी वही होती है दोनों व्यक्तियों के बीच में संबंध गहरे होते हैं आपसी विश्वास होता है और एक मैसेज देना चाहते हैं दोनों व्यक्ति जो है कि वी आर फ्रेंड्स तो ये मैसेज उसके द्वारा दिया गया है उन्होंने इसको इसी ढंग से देखा जाना चाहिए.
सवाल: सर ब्रिक्स में नरेंद्र मोदी शी जिनपिंग पुतिन का दोस्ताना व्यवहार देखकर और इन देशों के बीच हुए समझौतों की आखिर क्या प्रतिक्रिया हुई होगी डोनल्ड ट्रंप के मन में?
जवाब: ट्रंप मस्ट बी एब्सेंट बट सरप्राइजिंगली ही ह नॉट एक्सप्रेस हिमसेल्फ ह डिसपॉइंटमेंट ह डिसगस्ट जिसे कहते हैं उसने कोई नहीं किया और शायद उसका कारण ये रहा कि नरेंद्र मोदी ने क्लियर कर दिया डिअ वन से दैट वे जो है कि वी आर नॉट अगेंस्ट यू हम किसी देश के खिलाफ नहीं है. इट इज़ नॉट वर्सेस. हम अपना वजूद चाहते हैं. वी वांट ग्रेटर पार्टिसिपेशन इन द वर्ल्ड अफेयर्स इन द अफेयर्स ऑफ़ ग्लोबल साउथ. वो उनका है. दूसरा क्या है? उसके अंदर खास बात ये भी कि थोड़ा सा डीमोरलाइज्ड होंगे. इन दिनों पोल की मां बात चल रही है. 60% लोग उसके खिलाफ हैं. हालांकि फेस वैल्यू पे आए हुए थे तो उन्होंने कहा कि भाई भारत और अमेरिका के संबंध आज जो है ये पिछले पांच सालों में इतने बेहतर कभी नहीं थे और हमारी ट्रेड डील जो गुगली है ट्रेड डील अमेरिका के साथ वो जल्द हो जाएगी. तो ट्रंप मस्ट बी अपसेट बट फॉर सरप्राइजिंगली ही केप्ट क्वाइट दिस टाइम. गुड साइन.
सवाल: ब्रिक्स के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच जो मीटिंग हुई आखिर उसका क्या ग्लोबल मैसेज गया?
जवाब: वैसे देखो मीटिंग वेरी क्रिटिकल वेरी इंपॉर्टेंट देखा जाए तो सबसे पहला इशू है बॉर्डर का तो दोनों ने ये तय किया सबसे पहले कि सीमा पर शांति ही बेस है इसका शांति पहली रिक्वायरमेंट है दोनों मानते हैं इस बात को चाइना भी मानता है तो इस बात को ध्यान में रख के कि जो फर्स्ट रिक्वायरमेंट है वो है पीस एट बॉर्डर उसके बाद आगे चला जाए तो नरेंद्र मोदी ने कहा उसके अंदर कि डिफरेंसेस शुड नॉट बिकम जिसे कह डिवीजन या जो डिफरेंसेस अपनी जगह है और इसमें उस तरह का आगे इनका विस्तार नहीं होना चाहिए. इसको हमें रोकना चाहिए इसको जो है और दोनों ने कहा वी आर कमिटेड फॉर ए फेयर रीज़नेबल एंड म्यूचुअली एक्सेप्टेड सशन टू द बॉर्डर इशज़ और लॉन्ग टर्म रिलेशनशिप में हम ध्यान देना चाहिए. चाइना ने कहा कि वी आर इंटरेस्ट इन लॉन्ग टर्म रिलेशनशिप. तो कुल मिला के अच्छा रहा एक माहौल बना है आगे बढ़ने का बॉर्डर के विषयों को टच करते हुए थोड़ा सा उसको समझते हुए बाकी विषयों को आगे बढ़ाने का एक माहौल बना इसमें ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट है हेल्थ है आगे आपका जो डिफेंस है एआई है तो पर्पस ये कहने का कि बॉर्डर अपनी जगह रहे ठीक है लेकिन इसका जो है दूसरों पे प्रभाव कम से कम पड़े और दूसरे जो विषय हैं वो प्रभावित उससे नहीं हो लेकिन एट द एंड ऑफ द डे मेन इशू वही है जब तक सीमा पे शांति नहीं है तब तक विकास के बात करना बेईमानी नहीं ये बात बहुत अच्छे से नरेंद्र मोदी ने जो है उनको शी को ये बात समझा दी है और दूसरा मुद्दा था बैलेंस ऑफ़ पेमेंट्स का वो इंडिया के प्रतिकूल है तो प्रधानमंत्री ने मुद्दा उठाया होगा इस तरह से बस सारा फोकस जो है वो बॉर्डर इशू पे और संबंधों को सामान्य बनाने पर रहा.
सवाल: आखिर क्या हुई नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच महत्वपूर्ण बातचीत और क्या-क्या हुए समझौते?
जवाब: समझौते जो सबसे महत्वपूर्ण बात है वो यही है कि बॉर्डर का जो इशू है वो आपका सेटल होना चाहिए. उसके बाद में एआई की बात हुई तो उन्होंने कहा कि ओपन रिसोर्स करना चाहिए. शी ने कहा वहां पे जो है इंडिया ने कहा ठीक है इस पे विचार करते हैं. फिर जो आपस का इन्वेस्टमेंट है इंडिया का और उनका व्यापार जो है वो ज्यादा से ज्यादा व्यापार फ्री होना चाहिए. रेस्ट्रिकशंस है व्यापार में जो बाधाएं हैं उनको दूर करने में बात होनी चाहिए. तो कुल मिला के जो स्थिति बनी वो यह है कि बॉर्डर के साथ-साथ दूसरे जो व्यवसायिक मुद्दे हैं ट्रेड इन्वेस्टमेंट इनके बारे में बातचीत हुई है और इन क्षेत्रों में ऐसी आशा की जाती है आने वाले देशों में चाइना और भारत के बीच जो है व्यापार बढ़ेगा.
सवाल: कुछ लोगों का ये मानना भी है कि ब्रिक्स के बाद में भारत और चीन के बीच में एक नए युग की शुरुआत हुई है और ये दोनों देशों के बीच में एक टर्निंग पॉइंट भी साबित होगा. आप इस आकलन को कैसे देखते हैं सर?
जवाब: आकलन इस पे डिपेंड करेगा कि चाइना का व्यवहार कैसे रहता है. बेसिकली यू कांट ट्रस्ट चाइना. आज तक का व्यवहार उसका डुबियस रहा है. तो नोबडी इज वेरी श्योर अबाउट देयर नेक्स्ट मूव जो है. तो इसलिए डिपेंड करेगा चाइना ईमानदारी से अगर पालन करता है बात की जो इस बार अंडरस्टैंडिंग हुई है उसकी इज्जत करता है उसको और जिस ढंग से देखिए नरेंद्र मोदी के साथ वो हाथ मिला रहे हैं मुस्कुरा रहे हैं वो सब बातें अगर जेनुइनली करेक्ट हैं तो व्यापार बढ़ेगा टर्निंग पॉइंट होगा और दोनों देशों के बीच में जिसे कहना चाहिए कि नए रिश्तों की शुरुआत होगी और निश्चित तौर पे अगर बॉर्डर का इशू आपस में सॉर्ट आउट कर लेते हैं तो इसमें कोई शक नहीं है कि चाइना इंडिया मे अप्रूव टू बी अ ग्रेट पावर.
सवाल: चीन के साथ क्वांगचू दिल्ली फ्लाइट को बहाल करवाने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल को आप कैसे देखते हैं?
जवाब: अच्छी पहल है. पहले तो देखिए कोरोना में बंद हो गई थी फ्लाइट. फिर 2000 20 और गलवान का जो हुआ उसमें जो बंद हो गई थी फ्लाइट. अब फिर से चालू किया व्यापार बढ़ेगा. टूरिस्ट बढ़ेंगे, आदान प्लान बढ़ेगा. सबसे बड़ी बात है कि सेंटीमेंट बढ़ेगा दोस्ती का. इट्स अ गुड मूव. इट्स अ गुड बिगनिंग, गुड स्टार्ट. इट्स अ वेलकम मूव. सर आखिर कैसा है भारत का रूस और चीन के साथ व्यापार संतुलन? संतुलन ठीक नहीं है. इंडिया इज अ सफर. इंडिया इज़ एट लॉस. ट्रेड डेफिसिट है. रशिया के साथ 59 अरब डॉलर का ट्रेड डेफिसिट है. चाइना के साथ 112 अरब डॉलर का ट्रेड डेफिसिट है. कोशिश कर रहा है इंडिया कि ट्रेड डेफिसिट को कम से कम किया जाए. इसको प्लस में कन्वर्ट किया जाए. लेट्स सी व्हाट कम्स अप इन द कमिंग इयर्स.
सवाल: ब्रिक्स के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के जो पारस्परिक संबंधों का माहौल बना क्या उसके लिए कोई चुनौतियां भी आ सकती हैं?
जवाब: चुनौतियां तो हैं चाइना के साथ. देखो हमेशा रहेंग चुनौतियां. कोई बातें तो बेसिक्स हैं. जी. एक तो जैसे मुद्दा है दिलाई लामा के उत्तराधिकारी के चयन का वो अपनी पसंद से करना चाहते हैं चाइना वाले कर पाएंगे कि नहीं दूसरा फिर क्या है कल को फिर से ऑपरेशन सिंदूर अगर हुआ तो चाइना कहां खड़ा होगा अभी तक का इतिहास ये है कि वो खड़ा होता है पाकिस्तान साथ में फिर वो कभी अरुणाचल में घुसने की बात करता है आप देखते हैं कभी नेपाल में घुस जाता है इंडिया के इंटरेस्ट के अगेंस्ट दैट इज़ है स्थाई समझौता हो नहीं सकता स्थाई में वो चाहते हैं कि अरुणाचल उन्हें दे दो हम चाहते हैं सियाचिन हमें दे दो और पॉसिबल नहीं है दोनों इस तरह से तो चुनौतियां तो देखो रहेंग इसके अंदर जो है लेकिन इसका अर्थ ये नहीं कि हम प्रयास छोड़ दें. इस बार एक जेन्युइन बोनाफाइड प्रयास नरेंद्र मोदी और शी के बीच हुआ है. लेट्स बी होपफुल दिस टाइम.
सवाल: चीन ने नई दिल्ली ब्रिक्स समिट में शामिल होने का जो फैसला है वो बहुत ही 11th आवर में लिया और जो उनका पूरा का पूरा प्रतिनिधि मंडल था उनका वीजा भी लगभग 27 अगस्त के आसपास ही बनाया गया. क्या आपको इसके बारे में कोई जानकारी है?
जवाब: मैंने पढ़ा था कहीं यू आर फ़क्चुअली करेक्ट. ऐसा हुआ शायद मन नहीं बना पाए होंगे 11th आवर तक कि जाना है कि नहीं जाना है. क्योंकि हमेशा ये संदिग्ध रहता है विषय में चाइना का कि ब्रिक्स में जाना है कि नहीं जाना है. ये नरेंद्र मोदी की बहुत बड़ी सफलता थी कि सभी लोगों को ले आए एक मंच पे शी को भी ले आए. तो कोई आश्चर्य नहीं है कि 11th को उन्होंने फैसला किया है. लेकिन ये है कि अब जो अंत होता है वो अच्छा होता है. वो आ गए भारत. उनका स्वागत है. स्वागत रहा और आगे आशा की जानी चाहिए कि अगली बार जो ऐसा कुछ होगा तो वीजा जो है ना दो महीने पहले बनेगा. छ महीने पहले बनेगा. लेट्स हैव हो.
सवाल: चीन के सबसे बड़े अखबार ग्लोबल टाइम्स ने कहा कि यदि भारत और चीन एक सुर में बोलेंगे तो सारी दुनिया को सुनना पड़ेगा. क्या आप भी सहमत हैं इस परसेप्शन से?
जवाब: अब्सोलुटली करेक्ट. एक रशिया को भूल गए. जब चाइना इंडिया बोलेंगे तो रशिया भी बोलेगा साथ खड़ा हो के. ठीक है ना? तो बहुत ही वकेबल पावर जिसे कहते हैं हो जाएगी. लेकिन देखो वो दिन शायद आए तो अच्छा है दोनों देशों के लिए. वर्ल्ड की आधी पापुलेशन को ये लोग कंट्रोल करेंगे. आधे व्यापार को कंट्रोल करेंगे. तो एक ये सुखद कल्पना है कि भारत और चाइना एक ही स्तर में बोले सपोर्टेड बाय पुतिन फ्रॉम बैक ड्रॉप. वेलकम. लेट्स सी.
सवाल: ब्रिक्स समिट के पहले दिन शी जिनपिंग कुछ असहज दिखे तो मोदी ने भाषण रोका और पूछा आप ठीक हैं. तो जेसी सर कैन यू रीड बिटवीन द लाइंस?
जवाब: नरेंद्र मोदी भी तो कमाल करते हैं ना. उनके मुंह पर कह दिया उनको कि यह जो क्रिटिकल मिनरल्स और टेक्नोलॉजी है दे शुड नॉट बी वेपनाइज्ड. दे शुड नॉट बी यूज्ड एस अ वेपन अगेंस्ट कंट्रीज. उसके मुंह पे कह दिया बैठे हुए. तो नरेंद्र मोदी का करज एंड कन्विक्शन जो कह दिया आम तौर पर ऐसा नहीं हो पाता. उन्हें भी झटका लगा होगा. ये क्या हुआ? तो हो सकता है थोड़ा असहज हुए होंगे. वहां पे जो है इसलिए नरेंद्र मोदी ने सदा शहता दिखाई. उनके अनुवादक से कहा कभी पूछो सब ठीक है क्या तो उन्होंने सिर हिलाया कि हां सब ठीक है उनके मन की पीड़ा को सारा संसार देखता है सब लोगों ने देखा वहां पे तो ऐसे तो होना स्वाभाविक है नरेंद्र मोदी उनके चेहरे पे साफ-साफ इस बात को कहते हैं टेक्नोलॉजी को आप वेपन के रूप में यूज़ नहीं करेंगे बहुत बड़ी बात है तो लेट्स ऑल प्रे फॉर हिज गुड हेल्थ.
सवाल: सर शी पुशेस चाइनास एआई विज़न ऑफ ओपन सोर्सेस कम्युनिटी बट शी इज़ फाइव पॉइंट एक्शन प्लान फॉर ब्रिक्स मे सी रेड फ्लैग्स गो अप इन इंडिया इंडिया आप कुछ कहना चाहेंगे इस पर?
जवाब: खतरा तो है. एआई ओपन होगी, बिनेस ओपन होगा दोनों देशों के बीच में. चाइना क्या मार्केट को डंप करता है और सस्ता माल लाता है. और जब रिश्ते और अच्छे हो जाएंगे तो सस्ता माल और ज्यादा आएगा. चाइनीज़ प्रोडक्ट आएंगे. इंडियन इकॉनमी में थोड़ा सा चैलेंज होगा. तो इसलिए कहा गया कि रेड फ्लैग हो सकता है. ये मतलब थोड़ी चिंता की बात है. इसका मतलब लेकिन ये है कि हम आगे बढ़ने से अपने आप को रोक दें. वी शुड फेस इट्स अ वर्ल्ड ऑफ़ कंपटीशन. सर्वाइवल ऑफ़ द फिटेस्ट. इंडिया विल आल्सो कंपेयर वि चाइना.
सवाल: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्रिज ईरान यूएई गल्फ वुड यू फदर एक्सप्लेन दिस आईडिया और इसके पीछे की इनसाइड स्टोरी क्या थी इंसाइड स्टोरी?
जवाब: इसकी थी कि ये जिसे कहना चाहिए डिप्लोमेसी का अद्भुत चमत्कार था नरेंद्र मोदी का विदेश मंत्रियों का सम्मेलन हुआ था इससे पहले इसी ड्राफ्ट के लिए इसी डिक्लेरेशन के लिए फेल हो गया कोई संभावना नहीं थी कि ब्रिस के अंदर ये जो आपका ड्राफ्ट है डिक्लेरेशन है इसमें आम सहमति बनेगी कोई संभावना नहीं नहीं थी. विपरीत स्थितियां विपरीत पक्ष ईरान और यूएई को एक साथ लाना तो कल्पना की बात थी ना. ईरान कहता है कि आप प्रस्ताव में अमेरिका और इजराइल की आलोचना करो. ये कहते हैं यूएई वाले कि आप ईरान की आलोचना करो. असंभव लेकिन नरेंद्र मोदी ने क्या बैक चैनल्स को कैसे यूज़ किया. सुबह 4:00 बजे तक बैठकें चली और अल्टीमेटली नरेंद्र मोदी ने वो चमत्कार कर दिया जो अनबिलीवेबल है इस तरह का. और डिक्लेरेशन जो है वो केवल साइन नहीं हुआ. वो यूनिमसली साइन हुआ है. आम सहमति से साइन हुआ है. सब ने लिखा है उसके ऊपर जो है इज़ अ ग्रेट विक्ट्री, ग्रेट डिप्लोमेटिक विक्ट्री एंड इन द ओवरऑल इंटरेस्ट ऑफ द वर्ल्ड पीस.
सवाल: मोदी, पुतिन और ईरान ने एक जॉइंट मैसेज ट्रंप को भेजा. वुड यू लाइक टू डिकोड दिस मैसेज?
जवाब: यही अनुमान मैसेज का जो है सब परेशान है. ट्रंप को दो टू कहा होगा. वी विल नॉट टोलरेट योर टेरिफ्स एंड एक्स पार्ट इकोनमिक सेंशंस दो टू मैसेज है. ये गया होगा निश्चित तौर पे हर व्यक्ति परेशान है ट्रंप की दादागिरी से. हालांकि कुछ दिनों से ट्रंप शांत है वो एक अलग मुद्दा है. तो मैसेज वेरी क्लियर के नाउ ब्रिक्स कंट्रीज ऑल कंट्रीज आर कमिंग अप. दे आर स्टैंडिंग अप अगेंस्ट ट्रम्प टेरिफ्स. तो साफ कहा विल नॉट टोलरेट योर टेरिफ्स. एंड योर एक्स पार्ट इकॉनमिक सेंशंस. एक्चुअली दे हर्ट इकनोमिक डेवलपमेंट ऑफ डेवलपिंग कंट्रीज. सो विल नॉट एक्सेप्ट दिस दादागिरी. यह मैसेज है.
सवाल: ब्रिक्स अब डॉलर को रिप्लेस करने की कोशिश कर रहा है और आखिर इसके भारत के लिए क्या मायने हैं?
जवाब: देखो रिप्लेस करने का तो ऐसा है कि चेहरे पे तो यही कहा जा रहा है. वी आर नॉट वर्सेस. हमारी कोई शत्रुता नहीं है आपसे. हम एक देश के खिलाफ नहीं है. हम अपना ग्रेटर पार्टिसिपेशन चाहते हैं. लेकिन मन में कहीं ना कहीं तो है ना डॉलर को मात देने की. डॉलर को मात देने का मतलब है अमेरिका को मात देना. तो थोड़ी सी हिपोक्रेसी है उस स्टेटमेंट में. जो ब्रिक्स वालों ने कहा है डॉलर को तो मात देना है उनको जो है पर उनका बेसिक जो इशू है वह डॉलर से ज्यादा इस बात का है कि जो डॉलर को तो मात दे दी ठीक है भाई माना विकल्प क्या है swift के आप थ्रू मूव नहीं करना चाहते डॉलर से मूव नहीं करना चाहते कौन सी ऐसी कॉमन करेंसी है जिससे ये राष्ट्र व्यापार कर सके ब्रिक्स वाले इट्स वेरी डिफिकल्ट जो है और दूसरी बात क्या है उनका जो बेसिक थीम है बेसिक जो उनका स्ट्रेस है फोकस है वो इस बात पे है कि लोकल करेंसी में पेमेंट करने की प्राथमिक ता मिले और भारत की बात है भारत तो चाहता ही है कि मैक्सिमम जो बिजनेस है इंटरनेशनल बिजनेस है वो रूपी के मारफत हो तो ये शुरुआत अच्छी है डॉलर को मात देने की बात नहीं डॉलर को मात देना वैसे भी कोई छोटा-मोटा काम नहीं बहुत चुनौती भरा काम है लेकिन प्रयास अच्छा है और इसका परिणाम यह निकलेगा कि जो ब्रिक्स के राष्ट्र हैं इनको अपनी करेंसी में इंटरनेशनल ट्रेड में पेमेंट करने की सुविधा मिल सकती है वाइसवरसा दैट विल बी अ गुड मूव एंड बेनिफिशियल फॉर इंडिया.
सवाल: सर आखिर वुमेन एंपावरमेंट के बारे में ईरान और यूएई के बीच कोई सहमति बन पाई है?
जवाब: सहमति बन गई. सरप्राइजिंगली दे आर ऑन द सेम पेज. ईरान में महिलाओं पे अत्याचार और सब कहानियां इस तरह की रही है. वहां पे बट दिस टाइम बोथ ऑफ़ देम एग्रीड फॉर वुमेन एंपावरमेंट, वुमन लिबरलाइजेशन जिसे कहते हैं. वहां पे जो है नारी स्वतंत्रता इन सब पे बात हुई. इट्स अ गुड साइन.
सवाल: अटलांटिक से खिसक कर हिंद महासागर की तरफ आता हुआ दुनिया का शक्ति केंद्र क्या एशिया युग की शुरुआत है?
जवाब: निश्चित तौर पे इन ए लिमिटेड वे इसकी शुरुआत है. पहले लोग वाशिंगटन की तरफ देखते थे हर काम के लिए. अब लोग धीरे-धीरे क्या है? न्यू दिल्ली, मास्को, बीजिंग मतलब उनकी तरफ देखते हैं और लोग यह कल्पना करते हैं, अनुमान लगाते हैं कि चाइना की जो मैन्युफैक्चरिंग पावर है, इंडिया की स्किल्ड लेबर है, रशिया का जो डिफेंस है, दैट वे वहां की जो पावर है और ऑयल है, ये सब लोग अगर मिलके प्रयास करना चाहें तो एक बड़ा भारी पैकेज एक बड़ा भारी विकल्प जो है ये अमेरिका और वेस्ट के सामने खड़े हो सकते हैं. तो इस तरह से हो सकता है ऐसे हालात बने आगे जाके.
सवाल: सर आखिर बांग्लादेश के प्रधानमंत्री क्यों नहीं आए भारत इस समिट में?
जवाब: देखिए बांग्लादेश के प्रधानमंत्री है ना अभी थोड़ा डिप्लोमेसी में इनएक्सपीरियंस हैं. इमच्योर हैं. थोड़ा जो है वो ऐसा समझते हैं अपने को पता नहीं किस बहुत बड़े राष्ट्र के वो प्रधानमंत्री बन गए हैं. शुरू से उनका व्यवहार कुछ ऐसा रहा है. नॉट ओनली इंडिया के प्रति ओवरऑल जिसे कहते हैं ट्रस्ट मी नॉट. अरे भाई इतना अनग्रेटफुल हो गए आप. आपके देश को तो आजादी भारत ने करवाया था सेना भेज के. एक बेसिक सेंस ग्रेटट्यूड तो होना चाहिए ना. आप शत्रु के हाथ में खेल रहे हैं. चाइना से कंट्रोल हो रहे हैं. यहां भाग रहे हैं. वहां भाग रहे हैं. और आपको बुलाया गया तो आप उसमें कहते हैं मुझे इनविटेशन जो भेजा गया वो एक डिफरेंट कैटेगरी का था. इनविटेशन जो भेजा गया उनको वो उस प्रॉपर कैटेगरी का नहीं था. इसलिए वो नहीं आए वहां से. वो इनविटेशन बमस्टक चेयरमैन के नाते भेजा गया. इमैच्योरिटी ऑन द पार्ट ऑफ़ बांग्लादेश प्राइम मिनिस्टर. अभी नए हैं और राजनीति में एक दो ठोकर लगेंगी तो सीखेंगे आगे जाकर के. नरेंद्र मोदी का इनविटेशन और आप नहीं आए फुलिश.
सवाल: सर प्रधानमंत्री मोदी की यूएई मिस्र इंडोनेशिया मलेशिया कजाकिस्तान साउथ अफ्रीका और फिलिस्तीन के साथ में बटरल मीटिंग हुई इस मीटिंग में किन-किन विषयों पर फोकस रहा?
जवाब: जनरल विषय देखिए आप जो बात करते हैं किसी से तो आप जो है सेमीकंडक्टर्स की बात करते हैं किसी से किसी से आप जो टूरिज्म की बात करते हैं किसी से ट्रेड की बात करते हैं इन्वेस्टमेंट की बात करते हैं कुछ से ऑयल की बात करते हैं कुछ से आप यूपीए पेमेंट की बात करते हैं तो ये पैकेज है पूरा एक तरह से डेवलप मेंट के ये बिंदु है पिलर्स हैं डेवलपमेंट के हैं इन सभी देशों के साथ में जब वार्ता हुई मिलना हुआ ब्रीफली बटलर टॉक्स हुई तो नरेंद्र मोदी के साथ में इन विषयों पे चर्चा हुई और मलेशिया के बड़ा इंटरेस्टिंग है तो मलेशिया ने और मलेशिया के इजिप्ट का उससे ज्यादा इंटरेस्टिंग है उन्होंने कहा कि ब्रिक्स एंड बियोंड ब्रिक्स वी स्टैंड नेक्स्ट टू नरेंद्र मोदी उन्होंने कहा मलेशिया के प्राइम मिनिस्टर कहते हैं कि मेरे देश में नरेंद्र मोदी बहुत लोकप्रिय हैं जो है और गाना गा रहे हैं तीन देवियां फिल्म थी पहले 60 70 के दशक में जो है देवांद की उसे गाना गा रहे हैं के ख्वाब हो तुम या कोई हकीकत वो गाना गा रहे नरेंद्र मोदी देख रहे हैं ये तो नरेंद्र मोदी तो एक तरह से ब्रिक्स में प्रिंसिपल की स्थिति में थे आते हैं बाकी सब लोग आते हैं गाना गाते हैं नरेंद्र मोदी को आकर्षित करने की लुभाने की कोशिश करते हैं तो कुल मिला के इन सभी राष्ट्रों के साथ नरेंद्र मोदी की बटरल टॉक थी बहुत ब्रीफ थी अच्छी थी और एनकरेजिंग थी.
सवाल: ब्रिक्स ने फिलिस्तीन पर सख्त रुख अपनाया है और गाजा में हिंसा पर पूरी रोक की आवाज यहां पर उठाई है. सर इस पोजीशन का भारत पर क्या असर पड़ेगा और भारत के लिए इसके क्या मायने हैं?
जवाब: देखो भारत का स्टैंड शुरू से क्लियर है. भारत दो राष्ट्रों की थ्योरी का समर्थन करता है. अर्थात वहां के लोगों के जो अधिकार हैं नागरिकों के उसको स्वीकार करता है जो हम लोगों के खिलाफ है. तो भारत का स्टैंड बिल्कुल क्लियर है. भारत का सेकंड स्टैंड ये है कि देयर शुड बी डायलॉग एंड डिप्लोमेसी नॉट वॉर. झगड़े नहीं होने चाहिए. तो भारत का दृष्टिकोण बिल्कुल क्लियर है और ब्रिक्स का भी क्लियर है. उसमें यह है कि भाई दो राष्ट्रों की जो मान्यता है, दो स्टेट की जो मान्यता है, उसको स्वीकार करो, झगड़े बंद करो, शांति करो और अपना व्यापार करो. तो भारत का वही स्टैंड है जो पहले था, भारत का स्टैंड आज भी वही है.
सवाल: सर ब्रिक्स देशों के बीच में खासकर मिडिल ईस्ट और रूस, यूक्रेन युद्ध को लेकर मतभेद है. सवाल यहां पर ये है कि क्या पीएम मोदी इतने बड़े और ब्रिक्स के बढ़ते समूह को साथ लेकर चल पाएंगे?
जवाब: देखो चमत्कार कर दिया ईरान और यूएई का आप देख रहे हैं नरेंद्र मोदी इज द ओनली एक्सेप्टेबल वॉइस एक्सेप्टेबल पर्सन एक्सेप्टेबल फोर्स एज ए इंटरनेशनल मीडिएटर और एज ए इंटरनेशनल पीस मेकर जिसे कहते हैं तो उम्मीद की जानी चाहिए और भारत का तो लाभ है ही उसमें नरेंद्र मोदी आगे बढ़ते हैं तो भारत आगे बढ़ता है और अब देखिए शांति होगी तो भारत का भी लाभ है उसके अंदर जो है तो लेट्स होप कि नरेंद्र मोदी उस फ्रंट पे भी अल्टीमेटली कामयाब होते हैं वो लोग आएंगे वो राष्ट्र आएंगे नरेंद्र मोदी के पास उनसे सहायता मांगेंगे. जैसे पुतिन ने उस दिन कहा कि भाई मैंने चाइना और भारत से सहायता मांगी. उन दोनों ने कहा है कि हम यूक्रेन वॉर को जो है सुलटाना चाहते हैं. हम आपके साथ खड़े हैं. तो आएगा एक दिन वो लोग नरेंद्र मोदी के यहां आएंगे उनसे सहायता मांगेंगे. तो आई एम श्योर जो व्यक्ति ईरान और यूएई का झगड़ा सुलझा सकता है. वो कुछ भी कर सकता है. हम लेट्स होप.
सवाल: ट्रंप की पॉलिसीज ब्रिक्स को और मजबूत बना रही है. जेसी सर हाउ डू यू से दिस?
जवाब: इट इज अ वेरी आयरनी जिसे कहना चाहिए एक मजाक है एक विडंबना है इंटरेस्टिंग आयरनी जिसे आप कह सकते हैं अब क्या है कि छोटे या बड़े राष्ट्र जो भी हैं ब्रिक्स से राष्ट्र मान लीजिए तो ट्रंप जो है उनको धमकाते हैं मैं टेरिफ लगा दूंगा 50% 100% इकोनमिक सेंशन लगा दूंगा ये वो परेशान है देश वो परेशान हो के एक दूसरे को फोन करते हैं भाई क्या करें वो कहते हैं आओ आजा मेरी गाड़ी में बैठ जा [हंसी] तो सभी लोग जो मिलके अपनी योजना बना रहे हैं और इंटरेस्ट कॉमन है कि ट्रंप के गिरी को खत्म करना है. तो ट्रंप की जो धमकियां है वो इनडायरेक्टली ब्रिक्स के देशों को मजबूत कर रही है. यूनाइट कर रही है. उनको एक दूसरे से जोड़ रही हैं. तो ये व्यंग है. उसका मतलब ये है.
सवाल: अगर अमेरिका और पश्चिमी राष्ट्र इसी तरीके से आगे भी ब्रिक्स की आलोचना जारी रखते हैं तो फिर सर इसके क्या परिणाम निकलेंगे?
जवाब: इसका परिणाम वही होता है जिसे कहते हैं माय फुट. फिर आदमी चिंता करना बंद कर देता है ना. दे विल रिफ्यूज टू एंगेज. दे रिफ्यूज टू डायलॉग विद अमेरिका अदर कंट्रीज और एक दिन आएगा तो राष्ट्र खड़े हो जाएंगे और भाई वेस्ट के पास में सबके पास में मिला के क्या है 29% 50% पापुलेशन इनके पास है 40% ट्रेड इनके पास है ये किसी दिन अगर खड़े हो गए ठीक से ये ब्रिक्स राष्ट्र जो है तो मुकाबला नहीं कर पाएंगे तो आपका जो प्रश्न था उसका उत्तर एक ही है जब यू गो बियोंड ए पॉइंट एंड पुश ए पर्सन टू द वॉल जो है तो फिर यही होता है तो लेट्स सी कि ऐसी सिचुएशन नहीं बने सर आखिर क्या थी ब्रिक्स समिट की जनरल थीम? जनरल थीम देखो इसकी बेसिकली थी इनोवेशन थी, रिसाइलेंस थी, कोपरेशन थी, सस्टेनेबिलिटी थी. ये इसकी बेसिक थीम थी इस तरह की. इसके हम आगे बढ़ना चाहते हैं. मतलब आपस में मिलके सभी का हित देखते हुए जो नरेंद्र मोदी कहते हैं सबका विकास, सबका साथ इन अ वे जो है इस तरह की थीम उनकी थी.
सवाल: व्हाट आर द मेन हाईलाइट्स ऑफ द ब्रिक्स डिक्लेरेशन जिसमें सबसे पहले मैं बात करूंगी ट्रंप टेरिफ एंड एक्स पार्ट इकोनमिक सेंशंस की.
जवाब: वो सही है आपकी बात है उन राष्ट्रों ने वही दो ठोक मैसेज भेजा है वी विल नॉट टोलरेट एनी मोर ट्रंप टेररिफ्स एंड एक्स पार्ट इकोनॉमिक सेंशंस ये बिल्कुल क्लियर है. टेररिज्म की बात ये है कि बड़ा इंपॉर्टेंट रेोल्यूशन हुआ है नरेंद्र मोदी के इच्छा के हिसाब से हुआ है वही हुआ है टोटली जीरो टोलरेंस ऑन टेररिज्म जिसे कहते हैं एंड नो डबल स्टैंडर्ड्स ऑन टेररिज्म इसका मतलब यह है कि टेरर में उग्रवादी संगठन नहीं केवल बल्कि वो राष्ट्र जो उनके लिए सेफ हेवन देते हैं या हथियार देते हैं या सहायता देते हैं वो भी मुलजिम है उनको भी करना है और रही बात पहलगांव की ये जो ब्रिक्स आया है ने नरेंद्र मोदी के लिए असाधारण सफलताओं की एक झड़ी एक श्रेणी लेके आया है आप देखिए पहलगांव के हमले में पाकिस्तान का हाथ प्रवन है. चाइना जानता है सब बात. चाइना ने उस पे साइन किए नरेंद्र मोदी के उस प्रस्ताव पे कि कंडेम टेररिज्म. कितनी बड़ी बात है. तो ये तो चमत्कार हुआ है. लेट्स सी चाइना ने अब जो साइन किए हैं आने वाले दिनों में चाइना का रोल पाकिस्तान के साथ प्रॉक्सी टेररिज्म के साथ क्रॉस बॉर्डर टेररिज्म में जो इनडायरेक्ट रोल रहता है थ्रू पाकिस्तान वो कैसा रहता है. इट इज़ टू बी सीन. लेकिन अभी फेस वैल्यू पे यह चमत्कार है.
सवाल: एक्शन अगेंस्ट ड्रग्स एंड आर्म्स माफिया कंट्रोल ऑन साइबर क्राइम.
जवाब: ये बिल्कुल ठीक है. ये तो एक अच्छा प्रस्ताव है. सभी देशों में प्रॉब्लम है ड्रग माफिया की. आजकल जो है हथियारों के गैंग बन गए हैं. उग्रवादी बन गए हैं. वो सब आपस में चला रहे हैं. आपस में कार्ट्स बन गई हैं. ड्रग की आर्म्स की जो है इसे रोका जाना चाहिए. तो ब्रिक्स ने ऐसा कॉग्निस लिया है इस बार और सारे संसार से अपील की है ये कि इनको हम मिलके कम से कम ब्रिक्स राष्ट्र में तो मिलके हम इसको जॉइंटली ना इसके अगेंस्ट हम एक्शन लें इसके अगेंस्ट हम जो है ना कोई मूवमेंट करें कोई लॉ बनाएं क्या करें इट्स अ गुड प्रपोजल.
सवाल: टू चैलेंज डॉलर मोनोपोली एंड लोकल करेंसी पुश
जवाब: वो मैंने आपसे कहा डॉलर का तो मन में तो है भाव चुनौती देने का पर बेसिक इरादा ये है कि हमारी जो लोकल करेंसी है इसमें हमारा ज्यादा से ज्यादा इंटरनेशनल ट्रेड हो वुमेन एमावरमेंट एंपावरमेंट पे सब तो सहमत हैं सारे के सारे और यहां तक सहमत हैं कि आप देखिए कि वह ईरान और उनके बीच में भी बात हो गई. वहां भी ठीक वी एग्री वुमेन एंपावरमेंट. सो दिस इज़ फाइन. एनर्जी सिक्योरिटी सर. एनर्जी सिक्योरिटी बड़ा कंसर्न है. वो सारे राष्ट्र चाहते हैं आपस में आगे बढ़े और जो बटरल टॉक्स हो रही हैं उसमें एक प्रायोरिटी सब्जेक्ट है. तो उन्होंने इसको प्रायोरिटी में लिया है. इट्स अ गुड मूव. युद्ध विराम होना चाहिए उसमें और भारत का स्टैंड बिल्कुल क्लियर है. फिलिस्तीन के अंदर के भी दो राष्ट्रों की थ्योरी को हम मानते हैं.
ग्लोबल वन इज़ अ वेरीट सब्जेक्ट. ये ब्रिक्स में पहली बार लिया गया है जिसको इंडिया में हम गुड गवर्नेंस कहते हैं. नरेंद्र मोदी जिसको गुड गवर्नेंस कहते हैं. तो ये ग्लोबल गवर्नेंस कहते हैं. ग्लोबल गवर्नेंस ठीक होनी चाहिए. और प्रोटेक्शन ये है कि वॉर होता है, युद्ध होता है, बच्चों पे हमला होता है. तो सिविल प्रोटेक्शन वॉर में होना चाहिए. ये कंसर्न है सबका. सारे संसार से न्यूक्लियर हथियार हटे और नहीं आए उनको खतरा लगता है गुस्से में आके कभी इजराइल जैसे देश कहीं से लेके और इधर से करके अमेरिका और दूसरे लोग जो है कहीं न्यूक्लियर उसको यूज़ नहीं कर दें हथियार को जो है तो अच्छा प्रस्ताव है मतलब मन को भी समझाना एक तरह से भी न्यूक्लियर यूज़ नहीं हो आसान नहीं है न्यूक्लियर का यूज़ होना लेकिन अगर कागज़ में आता है प्रयास होता है और हम न्यूक्लियर फ्री वेस्ट एशिया की बात करते हैं तो विश्व शांति के लिए एक अच्छा प्रस्ताव है. एक अच्छा डेवलपमेंट है.
सवाल: ब्रिक्स कंट्रीज के बीच डिफरेंसेस के बावजूद जॉइंट डिक्लेरेशन सामने आए. क्या आप इसे इंडिया का डिप्लोमेटिक सक्सेस कहेंगे सर?
जवाब: इट्स अ मिरेकल जिसे कहना चाहिए. आप सोच नहीं सकते. विदेश मंत्रालय के अफसर जो बैठ के कागज बनाते हैं, विदेश मंत्री कागज बनाते हैं. तो कितने कंट्राडिक्शनंस होते हैं उसके अंदर? आप देखिए. नरेंद्र मोदी हैज़ अर्न द आर्ट ऑफ़ मैनेजिंग कंट्राडिक्शंस. एक सीमा से आगे कंट्राश को उन्होंने मैनेज किया है. तो ये तो एक इतिहास की घटना है. ब्रिक्स इतिहास की घटना है. और विश्व के जब जब ये शांति की बात आएगी या डिप्लोमेसी की बात आएगी तो नरेंद्र मोदी की चर्चा होगी. भारत की चर्चा होगी. इस ब्रिक्स की चर्चा होगी जहां पे इस तरह का प्रस्ताव पास हुआ. तो ऑफकोर्स इट इज़ हिस्टोरिकल डेवलपमेंट.
सवाल: दिल्ली डिक्लेरेशन में ट्रेड टेररिफ सेंशन और मल्टीपोलर वर्ड को लेकर बातचीत हुई. अब इसके आगे भारत की क्या प्रायोरिटी होनी चाहिए?
जवाब: भारत की प्रॉब्लम यही है इसके अंदर कि जो बातचीत इस बात को आगे बढ़ाए जो भारत तो बेनिफिशरी है इसके अंदर अगर ऐसा होता है और देश बढ़ते हैं आगे नरेंद्र मोदी आगे बढ़ते हैं और उन देशों से वार्ता होती है या ब्रिक्स के देशों में आपसी समझौता होता है मल्टीपल जैसे बात होती है तो इंडिया इज़ अल्टीमेटली बेनिफिशरी बीइंग अ मेजर पार्ट ऑफ़ ब्रिक्स कंट्रीज तो लेट्स सी कि इसमें क्या निकलता है व्हाई इंडिया इस गोइंग टू बेनिफिशरी एट द एंड ऑफ़ द डे.
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