यूपी चुनाव 2027 की तैयारी तेज, लखनऊ में जुटेगी BJP की पूरी टीम, अमित शाह और नितिन नवीन होंगे शामिल

मिशन-2027 को लेकर भाजपा अक्टूबर में लखनऊ में बड़ा मंथन करेगी, जहां हिंदुत्व, OBC समीकरण, विपक्षी नैरेटिव और संगठन की चुनौतियों पर रणनीति तय कर चुनावी अभियान को धार देने की तैयारी है.

BJP Mission 2027 UP Election Strategy Takes Shape
Image Source: Internet

UP Election 2027: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की आहट के साथ सियासी तैयारियां तेज हो गई हैं. भाजपा अब चुनावी मैदान में उतरने से पहले संगठन से लेकर रणनीति तक हर मोर्चे को मजबूत करने में जुटी है. पार्टी की कोशिश है कि विरोधियों के नैरेटिव का जवाब देने के साथ-साथ जमीन पर अपनी पकड़ और मजबूत की जाए. इसी रणनीति के तहत यूपी भाजपा को मिशन-2027 के लिए नए सिरे से तैयार करने की कवायद शुरू हो गई है.

विरोधियों के नैरेटिव की काट पर जोर

राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बीएल संतोष और प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े ने टीम यूपी के साथ बैठक में आगामी चुनाव को लेकर संगठन की रणनीति पर मंथन किया. कार्यकर्ताओं को विरोधी दलों के नैरेटिव का मजबूती से जवाब देने, प्रभावी स्लोगन और नारों के जरिए माहौल बनाने के साथ ही जनता के बीच सीधा संपर्क बढ़ाने का मंत्र दिया गया. रात्रि प्रवास और चौपाल जैसे कार्यक्रमों के जरिए पार्टी नेताओं को सीधे मतदाताओं तक पहुंचने की रणनीति पर भी जोर दिया गया है.

इन योजनाओं को अक्टूबर की शुरुआत में लखनऊ में प्रस्तावित कार्यसमिति की बैठक में अंतिम रूप देकर जमीन पर उतारने की तैयारी है. इस बैठक में गृहमंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह समेत भाजपा के कई राष्ट्रीय पदाधिकारी, केंद्रीय और राज्य सरकार के मंत्री, जिलाध्यक्ष और जिला प्रभारी शामिल होंगे. इससे पहले पार्टी की कार्यसमिति की बैठक 14 जुलाई 2024 को लखनऊ में हुई थी.

कई मुद्दों पर घिरी है यूपी की सियासत

भाजपा के सामने इस बार सिर्फ विपक्ष की चुनौती नहीं है, बल्कि प्रदेश में उठ रहे कई राजनीतिक मुद्दे भी उसके लिए अहम हैं. अयोध्या में राम मंदिर से जुड़े चढ़ावे की चोरी का मामला, यूजीसी और आरक्षण को लेकर जारी बहस, ब्राह्मण और ओबीसी राजनीति में बढ़ती हलचल के साथ संभल, रामपुर, मुरादाबाद और सहारनपुर जैसे इलाकों में ध्रुवीकरण का असर चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है. पार्टी इन्हीं मुद्दों को ध्यान में रखते हुए अपनी रणनीति और संदेश को धार देने की तैयारी कर रही है.

सहयोगी दलों के दबाव ने बढ़ाई चुनौती

एनडीए के सहयोगी दल भी आगामी चुनाव को लेकर अपनी जमीन मजबूत करने में जुटे हैं. सुभासपा, अपना दल-एस, रालोद और निषाद पार्टी अपने-अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में शक्ति प्रदर्शन के साथ पिछड़ों के हक से जुड़े मुद्दे उठा रहे हैं. इसके जरिए सहयोगी दल ज्यादा सीटों को लेकर भाजपा पर दबाव बनाने की कोशिश में हैं. ऐसे में सीट बंटवारे से लेकर सामाजिक समीकरण तक, भाजपा को सहयोगियों के साथ संतुलन साधना होगा.

संगठन के भीतर की हलचल भी एजेंडे में

पार्टी के सामने संगठन के अंदर की चुनौतियां भी कम नहीं हैं. जनप्रतिनिधियों और मंत्रियों की ओर से अधिकारियों के खिलाफ धरना देने के मामले सामने आते रहे हैं. वहीं क्षेत्रीय संगठन के विस्तार और पदों को लेकर भी विरोध और आरोप-प्रत्यारोप की स्थिति बनी हुई है. ऐसे में कार्यसमिति की बैठक में इन तमाम मुद्दों पर मंथन कर पार्टी की एक स्पष्ट लाइन तय किए जाने की उम्मीद है.

हिंदुत्व के एजेंडे को भी मिलेगी धार

माना जा रहा है कि भाजपा चुनावी रणनीति में विकास और संगठन के साथ हिंदुत्व के मुद्दे को भी प्रमुखता दे सकती है. मथुरा-वृंदावन को केंद्र में रखकर हार्डकोर हिंदुत्व के नैरेटिव को और मजबूत करने की कोशिश की जा सकती है. वहीं प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के मुताबिक जल्द ही मोर्चों की क्षेत्रीय टीमों और कार्यसमिति सदस्यों की घोषणा की जाएगी. इसके साथ ही संगठन का ढांचा पूरा करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ेगी. कुल मिलाकर भाजपा मिशन-2027 से पहले संगठन, सहयोगी दलों, सामाजिक समीकरण और चुनावी नैरेटिव चारों मोर्चों पर अपनी तैयारी पुख्ता करने में जुटी है.

ये भी पढ़ें- 5 लाख का कैशलेस बीमा, 400 विधि अधिकारियों को टैबलेट... CM योगी की वकीलों को बड़ी सौगात