Motihari Virat Ramayana Temple: बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के कल्याणपुर प्रखंड स्थित कैथवलिया गांव में आज एक ऐतिहासिक और धार्मिक क्षण साकार हो गया. यहां निर्माणाधीन विराट रामायण मंदिर परिसर में विश्व के सबसे ऊंचे और विशाल शिवलिंग की विधिवत स्थापना की गई. इस अद्भुत शिवलिंग की ऊंचाई 33 फीट और गोलाई भी 33 फीट है, जबकि इसका कुल वजन करीब 200 मीट्रिक टन बताया गया है.
शिवलिंग की स्थापना के साथ ही पूरा इलाका हर-हर महादेव के जयकारों से गूंज उठा. आयोजन को खास बनाने के लिए कंबोडिया से मंगाए गए विशेष फूलों से पूजा की गई और हेलिकॉप्टर के जरिए आसमान से पुष्पवर्षा भी की गई.
दुनिया के सबसे विराट रामायण मंदिर में विश्व के सबसे विशाल शिवलिंग की स्थापना!
— Samrat Choudhary (@samrat4bjp) January 17, 2026
पूर्वी चंपारण के कैथवलिया स्थित विराट रामायण मंदिर में सहस्र लिंगम की स्थापना के लिए पीठ पूजा में माननीय मुख्यमंत्री श्री @NitishKumar जी के साथ सम्मिलित होकर ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बना।
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विराट रामायण मंदिर की भव्य रूपरेखा
जिस विराट रामायण मंदिर में इस शिवलिंग की स्थापना हुई है, वह अपने आप में एक भव्य धार्मिक परिसर होगा. मंदिर परिसर का कुल क्षेत्रफल करीब 120 एकड़ में फैला हुआ है. इस मंदिर में कुल 12 शिखर होंगे और 22 अलग-अलग मंदिर बनाए जाएंगे. इनमें से सबसे ऊंचा शिखर लगभग 270 फीट ऊंचा होगा, जो इसे देश के सबसे ऊंचे मंदिर शिखरों में शामिल करेगा.
सीएम नीतीश कुमार सहित कई दिग्गज रहे मौजूद
इस ऐतिहासिक मौके पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा और सम्राट चौधरी समेत कई मंत्री और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे. इसके अलावा देश के विभिन्न मठों और मंदिरों से आए साधु-संतों ने भी शिवलिंग स्थापना के साक्षी बनकर आयोजन को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया.
विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुई पूजा
पटना के प्रसिद्ध महावीर मंदिर के सचिव सायन कुणाल ने बताया कि शिवलिंग की स्थापना के लिए हरिद्वार और पटना से विशेष आचार्य और पुरोहितों को बुलाया गया था. पूरे विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ शिवलिंग की प्राण-प्रतिष्ठा संपन्न कराई गई.
17 जनवरी को ही क्यों चुना गया स्थापना का दिन?
मंदिर सचिव के अनुसार, 17 जनवरी की तिथि का विशेष धार्मिक महत्व है. मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव लिंग स्वरूप में प्रकट हुए थे. इसी आस्था को ध्यान में रखते हुए शिवलिंग की स्थापना के लिए यह दिन चुना गया.
तमिलनाडु में हुआ शिवलिंग का निर्माण
इस विशाल शिवलिंग का निर्माण तमिलनाडु के महाबलीपुरम के पट्टीकाडु गांव में किया गया था. बीते करीब 10 वर्षों से इसका निर्माण कार्य चल रहा था. शिवलिंग के मुख्य शिल्पकार लोकनाथ हैं, जिनकी अगुवाई में कारीगरों की टीम ने इसे पत्थर से तराशकर यह अद्भुत रूप दिया.
लंबा सफर तय कर मोतिहारी पहुंचा शिवलिंग
विश्व का यह सबसे बड़ा शिवलिंग 23 नवंबर 2025 को सड़क मार्ग के जरिए तमिलनाडु के महाबलीपुरम से बिहार के लिए रवाना हुआ था. करीब डेढ़ महीने की यात्रा के बाद यह 5 जनवरी 2026 की रात करीब 10 बजे अपने पवित्र स्थान, कैथवलिया स्थित विराट रामायण मंदिर परिसर में पहुंचा.
शिवलिंग के पहुंचते ही उसे देखने के लिए रोजाना हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है. खास बात यह है कि स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लोग भी इस आयोजन को लेकर उत्साहित हैं और इसे गांव के लिए गर्व का विषय बता रहे हैं.
आस्था, कला और एकता का संगम
कैथवलिया में स्थापित यह विशाल शिवलिंग न सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र बनेगा, बल्कि भारतीय शिल्पकला, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता का भी प्रतीक माना जा रहा है. आने वाले समय में यह स्थल देश-विदेश से श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करने की पूरी क्षमता रखता है.
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