मुजफ्फरपुर, राज्य डेस्क: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में जहां एक तरफ चिताएं जलती हैं तो दूसरी तरफ शिक्षा की अलख भी जगती है. यहां पर हाथों में किताबें लिए गरीबों के बच्चों की आवाजों में संस्कृत के श्लोक गूंजते हैं. यह किसी को अजब लग सकता है, लेकिन है 100 प्रतिशत सच. मुजफ्फरपुर जिले के सिकन्दरपुर स्थित इस मुक्तिधाम में रोज बच्चों की पाठशालाएं सजती हैं. यहां संस्कृत की भी पढ़ाई कराई जा रही है. दरअसल, कचरा बीनने से लेकर सफाई करने वालों के बच्चों के लिए यह अनोखी पहल की गई है. शिक्षा ज्ञान की कड़ी में सबसे पहले यहां बच्चों को अक्षर ज्ञान दिया गया और अब आचार्य इन्हें संस्कृत संस्कार का ज्ञान दे रहे हैं.
रोज पढ़ते हैं 200 बच्चे
सिकन्दरपुर स्थित इस मुक्तिधाम में लगने वाली इस अनूठी पाठशाला में 200 से अधिक बच्चे रोजाना शामिल होते हैं. श्मशान घाट में जलती चिताओं के बीच में पढ़ने वाले बच्चे अब संस्कृत में संवाद भी करते हैं. यहां पर आ रहे बच्चे सिर्फ 4-5 दिन में ही संस्कृत बोलने सीख रहे हैं और आसानी से वार्तालाप में पारंगत हो जाते हैं. यहां के बच्चों के सिखाने लिए सात उपविषयों का निर्धारण किया गया है. जिनमें से मुख्य रूप से आरंभिक ज्ञान, वस्तु और नाम परिचय. अपना परिचय, गीत, क्रीड़ा और शास्त्रों से प्रश्नावली के साथ संस्कृत संभाषण भी शामिल है.
संस्कृति की समझ के लिए संस्कृत जरूरी
पाठशाला संस्थापक संचालक सुमित कुमार ने बताया कि समाज का प्रत्येक व्यक्ति जब तक संस्कृत भाषा से परिचित और जानकर नहीं होगा तब तक वह अपनी संस्कृति और सभ्यता के मूल तत्वों से परिचित हो सकता है. अब इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए पाठशाला में विशेष रूप संस्कृत संभाषण का आयोजन किया गया जा रहा है. यहां के पढ़ने वाले गरीब बच्चे अपने संस्कृति के साथ ही संस्कार को बढ़ा रहे हैं और यही एक कारण है कि इसको लेकर के पहल की गई है और इसमें यहां पढ़ने वाले बच्चों में रुचि दिख रही है.
उठाया संस्कृत को पढ़ाने का बीड़ा
संस्कृत पढ़ाने वाले आचार्य अखिलेश शास्त्री का कहना है कि बच्चों तक ने अपनी एक मात्र परंपरागत भाषा और संस्कृति से जुड़ी संस्कृत को पढ़ाने का बीड़ा को उठाया है. बच्चों में भी इसको लेकर ललक पैदा हो रही है और अब तो महज चार दिन में ही बच्चे संस्कृत में बात भी करने लग जाते हैं. ये बच्चे अब तो संस्कृत में बोलने-लिखने और पढ़ने भी लग गए हैं और अपना परिचय भी संस्कृत में देते हैं.
रिपोर्ट: विशाल कुमार