Bihar Flood: बिहार में बाढ़ का कहर! गंगा के बढ़ते जलस्तर ने तोड़ा 2016 का रिकॉर्ड, 11 जिलों में मंडराया खतरा

Bihar Flood Alert: पटना में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया है और 2016 का रिकॉर्ड टूटने से बिहार के 11 जिलों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है, जिसके चलते प्रशासन ने राहत और बचाव की तैयारियां तेज कर दी हैं.

Bihar Flood Alert Government Deploys Ministers In 13 Districts
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Bihar Flood Alert: बिहार में नदियों के बढ़ते जलस्तर के साथ बाढ़ का संकट लगातार गहराता जा रहा है. गंगा समेत कई प्रमुख नदियों में उफान के चलते निचले इलाकों में पानी फैल गया है और कई जगहों पर घरों, सड़कों और संपर्क मार्गों तक बाढ़ का पानी पहुंच चुका है. बिगड़ते हालात के बीच सम्राट सरकार ने राहत और बचाव अभियान को और तेज करने के लिए बड़ा प्रशासनिक एक्शन प्लान तैयार किया है. सरकार ने 13 बाढ़ प्रभावित जिलों में प्रभारी मंत्रियों और प्रभारी सचिवों को कैंप करने का निर्देश दिया है, ताकि राहत कार्यों की निगरानी सीधे जमीन पर की जा सके.

मंत्रियों और अधिकारियों को प्रभावित इलाकों में पहुंचकर राहत-बचाव कार्यों का जायजा लेने, स्थानीय लोगों से बातचीत करने और उनकी समस्याओं का फीडबैक लेने को कहा गया है. सरकार का जोर इस बात पर है कि राहत व्यवस्था केवल जिला मुख्यालयों तक सीमित न रहे, बल्कि बाढ़ प्रभावित गांवों और राहत शिविरों तक उसकी सीधी पहुंच सुनिश्चित हो.

13 जिलों में मंत्री-अधिकारी संभालेंगे मोर्चा

सरकार के निर्देश के मुताबिक बक्सर, भोजपुर, पटना, सारण, वैशाली, बेगूसराय, समस्तीपुर, लखीसराय, खगड़िया, मुंगेर, भागलपुर, कटिहार और अरवल में प्रभारी मंत्री और प्रभारी सचिव कैंप करेंगे. इन जिलों में मंत्री स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय कर राहत एवं बचाव अभियान की समीक्षा करेंगे और मौके पर मौजूद व्यवस्थाओं का जायजा लेंगे.

बक्सर की जिम्मेदारी नंद किशोर राम, भागलपुर की नीतीश मिश्रा, पटना की विजय चौधरी और कटिहार की जिम्मेदारी प्रमोद चंद्रवंशी को दी गई है. वहीं समस्तीपुर में दामोदर रावत, मुंगेर में संजय पासवान, बेगूसराय में रामकृपाल यादव और वैशाली में निशांत कुमार मोर्चा संभालेंगे. सारण की जिम्मेदारी बिजेंद्र प्रसाद यादव, खगड़िया की मदन सहनी, भोजपुर की अरुण शंकर प्रसाद, लखीसराय की सुनील कुमार और अरवल की जिम्मेदारी दीपक प्रकाश को सौंपी गई है.

गंगा ने पार किया 2016 का रिकॉर्ड स्तर

बाढ़ की गंभीरता का अंदाजा गंगा के जलस्तर से भी लगाया जा सकता है. जल संसाधन विभाग के मंत्री विजय चौधरी के मुताबिक गंगा इस बार 2016 में दर्ज अपने उच्चतम जलस्तर को भी पार कर गई है. सरकार का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और संवेदनशील इलाकों में प्रशासनिक टीमें तैनात हैं.

गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए पटना पर भी विशेष निगरानी रखी जा रही है. राजधानी के शहरी इलाकों और सुरक्षा तटबंधों के आसपास के क्षेत्रों में प्रशासन को अलर्ट रहने का निर्देश दिया गया है. पटना नगर निगम, जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा गया है.

भोजन, पानी और पशु चारे पर सरकार का जोर

बाढ़ प्रभावित लोगों तक जरूरी राहत सामग्री पहुंचाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है. प्रशासन को प्रभावित परिवारों के लिए भोजन, सूखा राशन, पीने का पानी, दवाएं और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं. इसके साथ ही बाढ़ से प्रभावित पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान देने को कहा गया है.

राहत शिविरों में भी जरूरी सुविधाओं की लगातार समीक्षा की जा रही है, ताकि विस्थापित लोगों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े. जरूरत के मुताबिक नावों और राहत-बचाव दलों की तैनाती भी की जा रही है.

कई जिलों में घरों और सड़कों तक पहुंचा पानी

गंगा के अलावा सोन, पुनपुन, सरयू और कोसी नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी ने भी कई इलाकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. निचले क्षेत्रों में पानी फैलने से लोगों को सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों की ओर जाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. कई जगहों पर सड़क और संपर्क मार्ग प्रभावित होने से आवागमन भी बाधित हुआ है.

बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है. प्रभारी मंत्रियों और सचिवों के मौके पर कैंप करने से राहत अभियान की निगरानी अब सीधे उच्च स्तर से होगी. सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बाढ़ पीड़ितों तक भोजन, पानी, दवा, नाव और पशु चारे जैसी जरूरी सुविधाएं समय पर पहुंचें.

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