बिहार की सियासत इस वक्त अपने सबसे रोमांचक मोड़ पर है. विधानसभा चुनाव 2025 का पहला चरण अब बस कुछ ही कदम दूर है. 6 नवंबर को 121 सीटों पर होने वाले मतदान से पहले मंगलवार यानी आज प्रचार का आखिरी दिन है. सियासी गलियारों से लेकर गांवों की चौपालों तक चुनावी माहौल पूरी तरह गरम है. हर पार्टी अपने स्टार प्रचारकों को मैदान में उतार चुकी है ताकि आखिरी समय में वोटरों के दिलों पर अपनी छाप छोड़ी जा सके.
4 नवंबर की शाम 6 बजे से पहले सभी दलों के नेता अपनी पूरी ताकत झोंकने में जुटे हैं. इसके बाद चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार प्रचार थम जाएगा. पहले चरण की सभी 121 सीटों पर 6 नवंबर को वोटिंग होगी और लाखों मतदाता तय करेंगे कि बिहार की सत्ता की कुर्सी पर कौन बैठेगा.
बीजेपी के दिग्गजों की आज धुआंधार एंट्री
भाजपा ने प्रचार के आखिरी दिन अपने सबसे बड़े चेहरे मैदान में उतारे हैं. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज बिहार के तीन अलग-अलग जिलों में जनसभाएं करेंगे. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी चार जगह रैलियों को संबोधित करेंगे, जबकि पार्टी अध्यक्ष जे.पी. नड्डा दो बड़ी सभाओं में जनता से संवाद करेंगे.यही नहीं, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी आज चार रैलियों में “डबल इंजन सरकार” की उपलब्धियों का बखान करेंगे. बीजेपी की रणनीति साफ है—हर जिले में एक बड़ा चेहरा दिखाकर माहौल अपने पक्ष में करना.
राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की रैलियों में दिखेगा विपक्षी जोश
वहीं, विपक्ष भी पीछे नहीं है. कांग्रेस के राहुल गांधी आज बिहार में तीन बड़े इलाकों—औरंगाबाद, कुटुंबा और वजीरगंज—में जनसभाएं करेंगे. राहुल अपने भाषणों में बेरोजगारी, महंगाई और किसानों के मुद्दों को जोरदार ढंग से उठाने की तैयारी में हैं.दूसरी ओर, राजद नेता तेजस्वी यादव आज एक दिन में रिकॉर्ड 17 रैलियां करेंगे. तेजस्वी की कोशिश है कि अपने युवा जोश और आक्रामक तेवरों से अंतिम समय में महागठबंधन के पक्ष में माहौल खड़ा कर सकें.
अन्य दलों की कोशिशें भी जारी
बीजेपी और कांग्रेस-राजद के अलावा अन्य दल भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराने में जुटे हैं. लोजपा (रामविलास) के नेता चिराग पासवान और रालोसोपा प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा आज कई सभाओं को संबोधित करेंगे. वहीं, AIMIM समेत छोटे दल भी रोड शो और नुक्कड़ सभाओं के जरिए वोटरों को आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं.
निर्णायक मोड़ पर बिहार की जनता
अब जबकि प्रचार का शोर थमने को है, बिहार की जनता के सामने असली फैसला करने का वक्त है. हर दल ने वादों, भाषणों और नारों की बौछार कर दी है. लेकिन 6 नवंबर को जब वोटिंग मशीन का बटन दबेगा, तब पता चलेगा कि जनता के दिल में किसकी बात गूंजी और किसकी नहीं.
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