Bihar BJP Meeting: बिहार की सियासत इन दिनों बेहद गर्म है. बीजेपी ने अपने विधायक दल की बैठक के लिए यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को पर्यवेक्षक नियुक्त किया है. उनके साथ साध्वी निरंजन ज्योति और अर्जुनराम मेघवाल सह-पर्यवेक्षक होंगे.
बैठक बुधवार सुबह 10 बजे पटना में आयोजित की जाएगी. इस बैठक का मुख्य एजेंडा है बीजेपी विधायक दल का नेता चुनना, जो बाद में एनडीए के विधायक दल की बैठक में सरकार बनाने का दावा पेश करेगा.
बैठक का महत्व और बीजेपी की रणनीति
बीजेपी के लिए यह दिन इसलिए खास है क्योंकि 20 नवंबर को बिहार में नई सरकार शपथ लेने वाली है. शपथ ग्रहण से पहले सभी राजनीतिक दल अपने विधायक दल की बैठक कर नेता चुनने में जुटे हैं. बीजेपी इस बार विधायकों की संख्या के हिसाब से मजबूत स्थिति में है. पार्टी के पास 89 विधायक हैं, जबकि जेडीयू के पास 85.
संख्या में यह अंतर बहुत अधिक नहीं है, इसलिए दोनों दलों के बीच सीटों और मंत्रीपदों को लेकर रणनीतिक बातचीत चल रही है. एनडीए विधायक दल की बैठक के बाद ही साफ होगा कि कौन नेता राज्यपाल के पास जाकर सरकार बनाने का दावा पेश करेगा. सूत्रों के मुताबिक, बिहार में बीजेपी के दो डिप्टी सीएम होंगे, लेकिन उनका अंतिम फैसला अभी लंबित है.
सीएम और मंत्रिमंडल का समीकरण
सीएम पद के लिए नीतीश कुमार के नाम पर सहमति बन चुकी है. लेकिन अब सबसे बड़ी चर्चा है कि मंत्रिमंडल के बड़े और महत्वपूर्ण विभाग किसके पास जाएंगे. बीजेपी इस बार सामाजिक समीकरणों पर विशेष ध्यान दे रही है. पार्टी यह सुनिश्चित करना चाहती है कि सरकार में सभी समुदायों और वर्गों का संतुलित प्रतिनिधित्व हो.
इसके अलावा, डिप्टी सीएम पद को लेकर भी कई परतें हैं. सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी इस बार दो डिप्टी सीएम पद रख सकती है, ताकि सामाजिक और राजनीतिक संतुलन ठीक से साधा जा सके.
केशव प्रसाद मौर्य की भूमिका
केशव प्रसाद मौर्य यूपी के डिप्टी सीएम हैं और बिहार चुनाव में बीजेपी के सह प्रभारी की जिम्मेदारी निभा चुके हैं. उन्हें इस बैठक का पर्यवेक्षक नियुक्त करना इसलिए अहम है क्योंकि मौर्य बिहार में पार्टी के रणनीतिक फैसलों और विधायकों के मनोबल पर सीधे नजर रखेंगे.
उनके अनुभव और चुनाव में निभाई गई भूमिका बीजेपी के लिए इस बैठक को सफल बनाने में अहम साबित होगी. सह-पर्यवेक्षक साध्वी निरंजन ज्योति और अर्जुनराम मेघवाल भी विधायकों के बीच पार्टी की नीतियों और रणनीति को स्पष्ट करेंगे.
बीजेपी-जेडीयू के बीच समीकरण
बीजेपी और जेडीयू के बीच इस बार विधायकों की संख्या में अंतर कम होने के कारण राजनीतिक समीकरण जटिल हो गया है. पिछली बार जेडीयू के विधायकों की संख्या बीजेपी से कम थी, लेकिन इस बार दोनों दलों के बीच लगभग बराबरी है. इससे यह साफ हो जाता है कि मंत्रिमंडल का गठन और डिप्टी सीएम पद का बंटवारा बीजेपी और जेडीयू दोनों के लिए संवेदनशील मुद्दा बन गया है.
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