क्या जाने वाली है गौतम गंभीर की कुर्सी? BCCI ने अफवाहों पर तोड़ी चुप्पी

टीम इंडिया के हालिया नतीजों ने क्रिकेट जगत में बहस को तेज कर दिया है. गौतम गंभीर के कोच बनने के बाद भारतीय टीम को कुछ ऐसे झटके लगे हैं, जिनकी किसी को उम्मीद नहीं थी.

BCCI Planning to sacking gautam gambhir breaks silence
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टीम इंडिया के हालिया नतीजों ने क्रिकेट जगत में बहस को तेज कर दिया है. गौतम गंभीर के कोच बनने के बाद भारतीय टीम को कुछ ऐसे झटके लगे हैं, जिनकी किसी को उम्मीद नहीं थी. घरेलू मैदान पर न्यूजीलैंड से टेस्ट सीरीज में क्लीन स्वीप, फिर साउथ अफ्रीका के खिलाफ भी वैसी ही हार और उसके बाद न्यूजीलैंड से वनडे सीरीज गंवाना ये सभी परिणाम इतिहास में पहली बार दर्ज हुए. इन पराजयों के बाद सवाल उठने लगे कि क्या कोचिंग स्टाफ में बदलाव की जरूरत है. इसी बीच गंभीर को हटाने की चर्चाएं और बीसीसीआई के कथित प्लान को लेकर अफवाहें भी तेज हो गईं. अब इन तमाम अटकलों पर बोर्ड ने अपनी स्थिति साफ कर दी है.

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के सचिव देवजीत सैकिया ने इन तमाम दावों को सिरे से नकार दिया है. स्पोर्टस्टार से बातचीत में उन्होंने कहा कि भारत जैसे देश में हर किसी की अपनी राय होती है और क्रिकेट को लेकर तो लगभग हर व्यक्ति खुद को जानकार मानता है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि निजी राय रखने का सभी को अधिकार है, लेकिन फैसले भावनाओं के आधार पर नहीं, बल्कि प्रक्रिया और अनुभव के आधार पर लिए जाते हैं.


सोशल मीडिया पर लगाई जा रही अटकलें 

सैकिया के मुताबिक सोशल मीडिया और मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं. पूर्व क्रिकेटर हों या मौजूदा खिलाड़ी, सभी खुलकर अपनी बात रख रहे हैं, लेकिन इससे बीसीसीआई के फैसलों पर कोई सीधा असर नहीं पड़ता. बोर्ड के भीतर एक व्यवस्थित ढांचा है, जो हर निर्णय को जिम्मेदारी के साथ लेता है.

चयन और फैसलों की प्रक्रिया

बीसीसीआई सचिव ने आगे बताया कि बोर्ड में एक क्रिकेट कमेटी काम करती है, जिसमें अनुभवी पूर्व खिलाड़ी शामिल हैं. टीम चयन के लिए पांच चयनकर्ताओं की समिति है, जो पूरी योग्यता और अनुभव के बाद इस जिम्मेदारी तक पहुंचते हैं. टीम से जुड़े सभी अहम फैसले इन्हीं लोगों द्वारा लिए जाते हैं. अलग-अलग राय होना स्वाभाविक है, लेकिन अंतिम निर्णय हमेशा चयनकर्ता और क्रिकेट कमेटी ही करती है.

मनोज तिवारी का बयान बना चर्चा का विषय

इन सबके बीच पूर्व भारतीय क्रिकेटर मनोज तिवारी का बयान भी सुर्खियों में रहा. उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि अगर सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में भारत टी20 वर्ल्ड कप 2026 नहीं जीत पाता, तो बीसीसीआई को गौतम गंभीर को लेकर बड़ा और कठिन फैसला लेना चाहिए. इस बयान के बाद कोचिंग को लेकर बहस और तेज हो गई थी.

टी20 में सफलता, बाकी फॉर्मेट में सवाल

गौतम गंभीर के मार्गदर्शन में भारतीय टीम ने टी20 क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन किया है. उनके कार्यकाल में भारत ने अब तक सात टी20 सीरीज और टूर्नामेंट खेले हैं और सभी में जीत दर्ज की है, जिसमें एशिया कप की ट्रॉफी भी शामिल है. हालांकि टेस्ट और वनडे फॉर्मेट में टीम वैसी निरंतरता नहीं दिखा पाई, जिसकी उम्मीद की जा रही थी.कुल मिलाकर, फिलहाल बीसीसीआई ने साफ कर दिया है कि कोचिंग को लेकर चल रही चर्चाएं महज अटकलें हैं और बोर्ड अपने तय सिस्टम के अनुसार ही आगे के फैसले लेगा.

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