BAPS Hindu Mandir: संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबू धाबी में स्थित BAPS हिंदू मंदिर को मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है. मंदिर प्रशासन ने जानकारी दी है कि सुरक्षा कारणों के चलते मंदिर फिलहाल श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए बंद रहेगा. शुरुआती तौर पर यह व्यवस्था 9 मार्च 2026 तक लागू रहेगी, हालांकि आगे की स्थिति के अनुसार नया निर्णय लिया जाएगा.
मंदिर के भीतर पूजा जारी रहेगी
मंदिर प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भले ही श्रद्धालुओं की एंट्री रोकी गई है, लेकिन मंदिर में रहने वाले स्वामी और संत नियमित रूप से पूजा और प्रार्थना करते रहेंगे. वे देश और दुनिया में शांति, सुरक्षा और मानव कल्याण के लिए प्रार्थना करेंगे.
साथ ही मंदिर की ओर से लोगों से अपील की गई है कि वे शांत रहें और किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें. प्रशासन ने सभी से आग्रह किया है कि जहां तक संभव हो घरों में रहें और सरकारी एजेंसियों द्वारा जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करें.
यूएई का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर
बोचनवासी श्री अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (BAPS) द्वारा निर्मित यह मंदिर संयुक्त अरब अमीरात में बना सबसे बड़ा हिंदू मंदिर माना जाता है. यह मंदिर भारतीय संस्कृति, आस्था और वास्तुकला का एक महत्वपूर्ण प्रतीक बनकर उभरा है. करीब 27 एकड़ क्षेत्र में फैला यह मंदिर पारंपरिक नागर शैली में बनाया गया है, जो उत्तर भारत की प्राचीन मंदिर वास्तुकला की झलक दिखाता है.
भव्य और पारंपरिक वास्तुकला
मंदिर का मुख्य ढांचा लगभग 13.5 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है. इसकी लंबाई करीब 262 फीट, चौड़ाई 180 फीट और ऊंचाई लगभग 108 फीट है. मंदिर में सात विशाल शिखर और पांच गुंबद बनाए गए हैं, जो इसकी भव्यता को और बढ़ाते हैं.
इस भव्य मंदिर के निर्माण पर लगभग 700 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं. निर्माण में करीब 50 हजार घन फीट इटैलियन संगमरमर, 18 लाख घन फीट भारतीय सैंडस्टोन और लगभग 18 लाख पत्थर की ईंटों का इस्तेमाल किया गया है. खास बात यह है कि मंदिर के निर्माण में लोहे या स्टील का उपयोग नहीं किया गया है. पूरे ढांचे को चूना पत्थर और संगमरमर से तैयार किया गया है, जिससे यह लंबे समय तक सुरक्षित रह सके.
भारत की संस्कृति की झलक
मंदिर परिसर में बना एम्फीथिएटर बनारस के घाटों की शैली से प्रेरित है, जिससे यहां आने वाले लोगों को भारतीय संस्कृति का अनुभव हो सके. यहां दो जलधाराएं बनाई गई हैं, जो प्रतीकात्मक रूप से गंगा और यमुना नदियों का प्रतिनिधित्व करती हैं.
त्रिवेणी संगम की अवधारणा को दर्शाने के लिए मंदिर से निकलने वाली रोशनी की एक किरण सरस्वती नदी का प्रतीक मानी जाती है. मंदिर के प्रवेश द्वार पर आठ मूर्तियां स्थापित की गई हैं, जो सनातन धर्म के आठ प्रमुख मूल्यों को दर्शाती हैं.
दीवारों पर उकेरी गईं सैकड़ों कहानियां
मंदिर की दीवारों पर की गई बारीक नक्काशी भी विशेष आकर्षण का केंद्र है. पत्थरों पर घोड़े और ऊंट जैसे जानवरों की आकृतियां बनाई गई हैं, जो यूएई की स्थानीय संस्कृति का प्रतिनिधित्व करती हैं. इसके अलावा मंदिर की दीवारों पर हिंदू धर्म और दुनिया की विभिन्न संस्कृतियों से जुड़ी 250 से अधिक कहानियां भी उकेरी गई हैं, जो इसे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद खास बनाती हैं.
विभिन्न धर्मों के लोगों का योगदान
इस मंदिर की एक खास विशेषता यह भी है कि इसके निर्माण में अलग-अलग धर्मों के लोगों ने योगदान दिया. BAPS के अनुसार, मंदिर के मुख्य आर्किटेक्ट ईसाई हैं, प्रोजेक्ट मैनेजर सिख समुदाय से हैं, डिजाइनर बौद्ध धर्म से जुड़े हैं, निर्माण कंपनी पारसी समुदाय से संबंधित है और प्रोजेक्ट के डायरेक्टर जैन धर्म से आते हैं. इस तरह यह मंदिर केवल आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि विविधता और सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक बनकर सामने आया है.
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