बांग्लादेश के अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के खिलाफ दुनिया भर में विरोध तेज़ हो गया है. स्विट्ज़रलैंड के जिनेवा शहर में हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शन ने इस बात को और स्पष्ट कर दिया कि यूनुस को लेकर जनता में आक्रोश गहराता जा रहा है.
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के 60वें सत्र के दौरान जिनेवा के मशहूर ब्रोकन चेयर स्मारक के पास बांग्लादेशी प्रवासियों और अवामी लीग के समर्थकों ने प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने ‘KILLER YUNUS’, ‘पद छोड़ो यूनुस’, और ‘आतंकवादी यूनुस’ जैसे नारे लगाए. यह प्रदर्शन शेख हसीना के समर्थकों द्वारा आयोजित किया गया था, जिसमें यूनुस पर अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा और राजनीतिक हत्याओं में शामिल होने के आरोप लगाए गए.
न्यूयॉर्क में UNGA के बाहर भी हुआ था विरोध
यूनुस के खिलाफ केवल यूरोप ही नहीं, अमेरिका में भी गुस्सा देखने को मिला. 27 सितंबर को न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर प्रदर्शनकारियों ने यूनुस के खिलाफ बैनर लहराए और इस्तीफे की मांग की. प्रदर्शन में भाग लेने वाले अधिकांश लोग पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के समर्थक थे, जिन्होंने यूनुस पर लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप लगाया.
#WATCH | Geneva, Switzerland | Members of the Awami League carry banners demanding the resignation of Muhammad Yunus and calling for the revocation of his Nobel Peace Prize. They raised slogans like “Terrorist Terrorist, Yunus” and “Step Down Yunus”, and in support of Bangabandhu… pic.twitter.com/lvxdyW3HB0
— ANI (@ANI) September 30, 2025
भारत में भी उठी आवाज़: PM मोदी की यात्रा के दौरान हुआ प्रदर्शन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान, वाशिंगटन डीसी के ब्लेयर हाउस के बाहर भी यूनुस के खिलाफ बांग्लादेशी समुदाय ने प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यूनुस के कार्यकाल में धार्मिक अल्पसंख्यकों पर अत्याचार बढ़ा है, और उनकी नीतियां बांग्लादेश को अस्थिर करने वाली हैं.
क्या यूनुस से छीना जाएगा नोबेल शांति पुरस्कार?
मोहम्मद यूनुस के खिलाफ चल रहे अंतरराष्ट्रीय विरोध के बीच, यह सवाल अब चर्चा में है कि क्या नोबेल पुरस्कार समिति यूनुस से उनका शांति पुरस्कार वापस लेगी. प्रदर्शनकारियों की यह प्रमुख मांग है कि यूनुस की छवि एक शांतिदूत की नहीं, बल्कि राजनीतिक उत्पीड़न करने वाले नेता की बन चुकी है.
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