पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में हाल के दिनों में हिंसा काफी बढ़ गई है. बलूच अलगाववादी लड़ाकों और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के बीच लगातार संघर्ष हो रहा है. दोनों पक्षों को नुकसान होने की खबरें सामने आ रही हैं.
पाकिस्तानी सेना ने बलूच लड़ाकों के खिलाफ कई सैन्य अभियान शुरू किए हैं. इसके बावजूद अलग-अलग इलाकों में हमले जारी हैं, जिससे सुरक्षा स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है.
लगातार हो रहे हैं हमले
रिपोर्टों के अनुसार, बलूच लड़ाके अलग-अलग जगहों पर सुरक्षा बलों को निशाना बना रहे हैं. कई हमले गुरिल्ला तरीके से किए जा रहे हैं, जिससे सेना के लिए उन्हें रोकना मुश्किल हो रहा है.
बलूचिस्तान में सेना, पुलिस और खुफिया एजेंसियों की बड़ी मौजूदगी होने के बावजूद कई इलाकों में हिंसा पूरी तरह नहीं थम पाई है.
बलूचिस्तान में सेना की बड़ी तैनाती
बलूचिस्तान की सुरक्षा की जिम्मेदारी पाकिस्तानी सेना की 12वीं कोर के पास है. इसके अलावा वायुसेना और नौसेना के भी कई अहम ठिकाने इस प्रांत में मौजूद हैं.
ग्वादर बंदरगाह, क्वेटा, पासनी, ओरमारा और जिवाणी जैसे इलाकों में सेना और सुरक्षा एजेंसियों की तैनाती है. खुफिया एजेंसी आईएसआई भी यहां सक्रिय है.
इसके बावजूद कई इलाकों में बलूच लड़ाकों के हमले जारी रहने से सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं.
गुरिल्ला रणनीति से चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि बलूच लड़ाके गुरिल्ला रणनीति अपनाते हैं. पहाड़ी और दूर-दराज के इलाके उनके लिए अनुकूल माने जाते हैं, जिससे सुरक्षा बलों के लिए अभियान चलाना कठिन हो जाता है.
इसी वजह से कई सैन्य अभियानों के बाद भी हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हो सके हैं.
स्वतंत्रता दिवस मनाने का ऐलान
कुछ बलूच संगठनों ने 11 अगस्त को अपना स्वतंत्रता दिवस मनाने का ऐलान किया है. इस बीच पाकिस्तानी सेना ने नए सैन्य अभियान शुरू करने की घोषणा की है.
हालांकि, मौजूदा हालात को देखते हुए यह कहना जल्दबाजी होगी कि इस संघर्ष का आगे क्या परिणाम होगा. बलूचिस्तान की स्थिति लगातार बदल रही है और सुरक्षा एजेंसियां हालात पर नजर बनाए हुए हैं.
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