Iran US War: अमेरिका की ओर से ईरान पर हमले रोकने की घोषणा के बाद भी देश के कई हिस्सों में नए हवाई हमलों की खबरें सामने आई हैं. इन हमलों की जिम्मेदारी अब तक किसी ने नहीं ली है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर ईरान पर हमला कौन कर रहा है. ये हमले ऐसे समय हुए, जब ईरान अपने दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहा था.
कई शहरों में हुए धमाके
ईरानी मीडिया के मुताबिक, गुरुवार को बुशहर, सिस्तान-बलूचिस्तान, अहवाज, चाबहार और कई दूसरे इलाकों में हवाई हमले और धमाकों की घटनाएं हुईं. हालांकि, ईरान ने इन हमलों के लिए किसी देश का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया है.
लेकिन एक ईरानी सांसद ने आरोप लगाया कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने अमेरिका के अभियान में मदद की है. वहीं, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इन हमलों को लेकर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है.
ईरान ने भी कई देशों पर किए हमले
इन घटनाओं से पहले ईरान ने बहरीन, जॉर्डन, कुवैत और कतर की ओर मिसाइलें दागी थीं. हमलों के बाद इन देशों में मिसाइल अलर्ट जारी किया गया और लोगों को सुरक्षित जगहों पर जाने के लिए कहा गया. इसके बाद यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान कुवैत पहुंचे और वहां के नेतृत्व से मुलाकात की. वहीं, खाड़ी देशों ने कतर के विदेश मंत्री से भी बातचीत की.
ईरान ने लगाए गंभीर आरोप
ईरान का दावा है कि सऊदी अरब और यूएई ने भी उस पर हवाई हमले किए हैं. ईरान का कहना है कि उसके ऊर्जा ठिकानों पर हमले के पीछे इन देशों की भूमिका रही है. हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
इजरायल ने क्या कहा?
इजरायल ने जून के बाद से ईरान पर किसी नए हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है. आमतौर पर इजरायल अपने सैन्य अभियानों की जानकारी सार्वजनिक कर देता है. इजरायली सरकार ने बताया कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत की. इस दौरान खाड़ी क्षेत्र की स्थिति पर चर्चा हुई.
इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज़ ने कहा कि उनकी सेना पूरी तरह तैयार है. अगर जरूरत पड़ी तो ईरान के खिलाफ फिर से सैन्य कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने कहा कि अगर इजरायल को दोबारा हमला करना पड़ा तो पहले से ज्यादा ताकत के साथ कार्रवाई की जाएगी.
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी बढ़ा विवाद
इन घटनाओं के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी तनाव बना हुआ है. अमेरिका और कई अरब देशों का कहना है कि इस समुद्री रास्ते से जहाजों की आवाजाही बिना किसी रुकावट के जारी रहनी चाहिए. वहीं, ईरान का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर उसका नियंत्रण है और वहां से गुजरने वाले जहाजों को शुल्क देना चाहिए.
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