अंतरिक्ष में घूमने वाले लाखों एस्टेरॉयड में कुछ इतने बड़े होते हैं कि अगर वे पृथ्वी से टकरा जाएं तो भारी तबाही मचा सकते हैं. इसी वजह से वैज्ञानिक लगातार ऐसे खगोलीय पिंडों पर नजर रखते हैं. अब एस्टेरॉयड 99942 एपोफिस एक बार फिर चर्चा में है. वैज्ञानिकों के मुताबिक 13 अप्रैल 2029 को यह पृथ्वी के बेहद करीब से गुजरेगा और उस समय दोनों के बीच दूरी करीब 32 हजार किलोमीटर रह जाएगी. यह दूरी पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की औसत दूरी करीब 3.84 लाख किलोमीटर की तुलना में बेहद कम है. हालांकि, नासा के अनुसार इस नजदीकी के बावजूद एपोफिस के पृथ्वी से टकराने का खतरा नहीं है.
सैटेलाइट्स की कक्षा से भी करीब होगा एपोफिस
एपोफिस की इस नजदीकी को इसलिए भी असाधारण माना जा रहा है क्योंकि यह कई जियोस्टेशनरी सैटेलाइट्स की कक्षा से भी नीचे से गुजर सकता है. पृथ्वी की सतह से लगभग 35,786 किलोमीटर की ऊंचाई पर जियोस्टेशनरी सैटेलाइट्स काम करते हैं, जबकि एपोफिस करीब 32 हजार किलोमीटर की दूरी तक पहुंच जाएगा. इसका नाम प्राचीन मिस्र की पौराणिक कथाओं में अराजकता और विनाश से जुड़े देवता एपोफिस के नाम पर रखा गया है. करीब 340 मीटर व्यास वाला यह एस्टेरॉयड इतना बड़ा है कि वैज्ञानिकों के लिए इसका पृथ्वी के इतने करीब से गुजरना एक बेहद महत्वपूर्ण खगोलीय घटना होगी.
पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बदल सकता है इसकी चाल
जब एपोफिस पृथ्वी के पास से गुजरेगा, तब हमारे ग्रह का शक्तिशाली गुरुत्वाकर्षण उसके रास्ते और घूमने की गति को प्रभावित करेगा. वैज्ञानिकों के मुताबिक इस दौरान एस्टेरॉयड की कक्षा में बदलाव आ सकता है और उसकी सतह पर मौजूद ढीला मलबा भी हिल सकता है. इसका अध्ययन करने के लिए नासा का OSIRIS-APEX अंतरिक्ष यान एपोफिस पर नजर रखेगा और उसके करीब जाकर इस ऐतिहासिक फ्लाईबाई के प्रभावों का अध्ययन करेगा. वैज्ञानिकों के लिए यह मिशन इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे उन्हें पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के इतने करीब आने पर एस्टेरॉयड के व्यवहार को समझने का अनोखा मौका मिलेगा.
सतह पर आ सकता है ‘एस्टेरॉयड भूकंप’
एपोफिस के पृथ्वी के पास आने से केवल उसकी कक्षा ही प्रभावित नहीं होगी, बल्कि उसकी सतह पर भी हलचल पैदा हो सकती है. वैज्ञानिकों का अनुमान है कि गुरुत्वाकर्षण के खिंचाव से वहां मौजूद बड़े पत्थर अपनी जगह से खिसक सकते हैं और छोटे भूस्खलन जैसी घटनाएं हो सकती हैं. इसे एक तरह के ‘एस्टेरॉयड भूकंप’ के रूप में समझा जा सकता है. एपोफिस के घूमने का तरीका भी बदल सकता है, क्योंकि फिलहाल यह सामान्य तरीके से एक धुरी पर घूमने के बजाय कुछ हद तक लड़खड़ाते हुए घूमता है. पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण का प्रभाव इस घूर्णन को बदल सकता है.
डरने की जरूरत नहीं, वैज्ञानिकों के लिए बड़ा मौका
डायनासोर के विलुप्त होने से जुड़े विशाल एस्टेरॉयड की घटनाओं के कारण अंतरिक्ष से आने वाले बड़े पिंड हमेशा डर का विषय रहे हैं, लेकिन एपोफिस को लेकर ऐसी चिंता की जरूरत नहीं है. नासा के अनुसार 2029 की इस करीबी मुलाकात के दौरान पृथ्वी से टक्कर का खतरा नहीं है. इसके बजाय यह वैज्ञानिकों के लिए एक दुर्लभ अवसर होगा, जब वे किसी बड़े एस्टेरॉयड को इतनी नजदीकी से देख और उसका अध्ययन कर सकेंगे. पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण से एपोफिस में होने वाले बदलाव भविष्य में एस्टेरॉयड की प्रकृति और उनके व्यवहार को समझने में अहम जानकारी दे सकते हैं.
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