इस्लामाबाद: पाकिस्तान में सैन्य व्यवस्था में हुए नए बदलावों के बाद सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर की ताकत काफी बढ़ गई है. वह पहले से सेना प्रमुख हैं और अब चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज यानी सीडीएफ की जिम्मेदारी भी उनके पास है. इस बदलाव के बाद तीनों सेनाओं से जुड़े अहम मामलों में उनकी भूमिका सबसे ऊपर हो गई है.
पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार ने संसद के जरिए इन बदलावों को मंजूरी दी है. राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी की मंजूरी के बाद नए कानून लागू हो गए हैं.
कैसे बढ़ी असीम मुनीर की ताकत?
पाकिस्तान की संसद ने 20 अगस्त को रक्षा बलों और नेशनल कमांड अथॉरिटी से जुड़े दो कानूनों को मंजूरी दी. यह बदलाव 2025 में हुए 27वें संविधान संशोधन के बाद शुरू हुई नई सैन्य व्यवस्था का हिस्सा हैं.
इस संशोधन के तहत ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी के चेयरमैन का पद खत्म कर दिया गया था. इसकी जगह चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज का पद बनाया गया और असीम मुनीर को देश का पहला सीडीएफ बनाया गया.
आर्मी चीफ और सीडीएफ दोनों पद
असीम मुनीर के पास अब सेना प्रमुख के साथ सीडीएफ की जिम्मेदारी भी है. नए नियमों के मुताबिक सीडीएफ रक्षा बल मुख्यालय की कमान संभालेंगे और राष्ट्रीय सुरक्षा व रक्षा से जुड़े मामलों में प्रधानमंत्री को सैन्य सलाह देंगे.
इस व्यवस्था के कारण थल सेना के साथ नौसेना और वायु सेना से जुड़े बड़े सैन्य मामलों में भी सीडीएफ की भूमिका बढ़ गई है.
2030 तक पद पर रहने की संभावना
इस बदलाव का असर असीम मुनीर के कार्यकाल पर भी पड़ा है. पहले उनके 2027 में रिटायर होने की उम्मीद थी. लेकिन सीडीएफ के पांच साल के कार्यकाल के कारण अब उनके नवंबर 2030 तक पद पर बने रहने का रास्ता साफ हो गया है.
यानी आने वाले कई सालों तक वह पाकिस्तान के सैन्य ढांचे में सबसे प्रभावशाली पदों में बने रह सकते हैं.
पाकिस्तान में फिर बढ़ी सेना की भूमिका?
पाकिस्तान के इतिहास में सेना का राजनीति में काफी प्रभाव रहा है. सेना कई बार सीधे सत्ता में भी आ चुकी है. हालांकि इस बार सेना की ताकत बढ़ाने के लिए सीधे तख्तापलट नहीं किया गया, बल्कि संसद के जरिए कानून और संवैधानिक व्यवस्था में बदलाव किए गए.
आलोचकों का कहना है कि इन बदलावों से चुनी हुई सरकार के साथ सेना का प्रभाव और मजबूत हुआ है. इसी वजह से पाकिस्तान की मौजूदा व्यवस्था को लेकर ‘हाइब्रिड शासन’ की चर्चा भी तेज हो गई है.
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