तुर्की में शांति वार्ता के बीच पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने तालिबान को दिया अल्टीमेटम, खुली जंग की दी चेतावनी

Pakistan Afghanistan Conflict: अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव नए स्तर पर पहुंच गया है. पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ ने तालिबान को खुलेआम चेतावनी दी है कि अगर तुर्की में चल रही शांति वार्ता सफल नहीं हुई, तो दो पड़ोसी देशों के बीच खुली जंग का विकल्प खुला है.

Amid peace talks in Türkiye Pakistani Defense Minister gives ultimatum Taliban warns of open war
Image Source: Social Media/X

Pakistan Afghanistan Conflict: अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव नए स्तर पर पहुंच गया है. पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ ने तालिबान को खुलेआम चेतावनी दी है कि अगर तुर्की में चल रही शांति वार्ता सफल नहीं हुई, तो दो पड़ोसी देशों के बीच खुली जंग का विकल्प खुला है. यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल ही में दोहा में अस्थायी सीजफायर लागू किया गया था और शांति के लिए उम्मीदें जगी थीं.

आसिफ ने अपने बयान में कहा कि पाकिस्तान हमेशा अफगानिस्तान के साथ शांतिपूर्ण संबंध चाहता है, लेकिन अगर तालिबान द्वारा किए गए वादे पूरे नहीं किए गए, तो पाकिस्तान के पास ‘ओपन वॉर’ का विकल्प मौजूद है. उन्होंने तालिबान पर आरोप लगाया कि उन्होंने दशकों तक अफगान शरणार्थियों को अपने देश में रखा, लेकिन बदले में पाकिस्तान की ओर से गोलीबारी और सुरक्षा खतरे झेलने पड़े.

तुर्की में चल रही शांति वार्ता, उद्देश्य और परिदृश्य

तुर्की की राजधानी इस्तांबुल में दोनों पक्षों की वार्ता दो दौर में चल रही है. पाकिस्तान की तरफ़ से दो सदस्यीय सुरक्षा टीम और अफगान तालिबान की तरफ़ से छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल इस वार्ता में शामिल हैं. प्रतिनिधिमंडल में गृह, रक्षा और विदेश मंत्रालय के उच्च अधिकारी मौजूद हैं. तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने सोशल मीडिया पर कहा कि हमारा प्रतिनिधिमंडल दोहा समझौते के बाद तुर्की पहुंचा है, और बाकी मुद्दों पर बातचीत जारी रहेगी.

वार्ता का मुख्य मकसद दोहा में हुए अस्थायी सीजफायर को स्थायी और लॉन्ग-टर्म बनाने के लिए कोई भरोसेमंद तंत्र तैयार करना है. हालांकि आसिफ ने चेतावनी दी कि अगर यह वार्ता विफल होती है तो दोनों देशों के बीच सीमा पर संघर्ष की संभावना बढ़ जाएगी.

सीमा पर हालिया झड़पें और बढ़ता तनाव

दोनों देशों के बीच तनाव इस महीने की शुरुआत में सीमा पर हुई खूनी झड़पों के बाद और बढ़ गया. 12 अक्टूबर को पाकिस्तानी सेना ने अफगान बॉर्डर पर एयरस्ट्राइक्स कीं, जिनमें तालिबान के दर्जनों लड़ाके मारे गए. इसका जवाब तालिबान ने भारी फायरिंग से दिया, जिसमें लगभग 60 पाकिस्तानी सैनिकों की मौत हुई. दोनों पक्ष एक-दूसरे पर सार्वजनिक आरोप लगा रहे हैं.

पाकिस्तान का आरोप है कि तालिबान TTP (Tehrik-e-Taliban Pakistan) को शरण दे रहा है, जो खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में पाकिस्तान के नागरिकों और सैनिकों पर हमले कर रहा है. आसिफ के अनुसार, हाल के लगभग 80% आतंकी हमलों में अफगान तालिबान का सहयोग रहा. दूसरी ओर, तालिबान ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पाकिस्तानी सेना के हालिया अभियान अफगानिस्तान की संप्रभुता का उल्लंघन हैं.

पाकिस्तान की फ्रस्ट्रेशन और भविष्य की चुनौती

ख्वाजा आसिफ का बयान पाकिस्तान में बढ़ते TTP हमलों और आंतरिक असुरक्षा को दर्शाता है. देश में सुरक्षा चुनौतियां बढ़ती जा रही हैं और सीमा पर तनाव के कारण शांति प्रक्रिया पर भी असर पड़ रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर तुर्की वार्ता सफल नहीं होती, तो अफगान तालिबान और पाकिस्तान के बीच संघर्ष अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर परिणाम पैदा कर सकता है. इस वक्त पाकिस्तान-तालिबान विवाद सिर्फ सैन्य और राजनीतिक मसला नहीं रह गया है, बल्कि यह क्षेत्र में सुरक्षा, शरणार्थियों और आतंकवाद विरोधी रणनीति पर भी सीधे असर डालता है.

यह भी पढ़ें- Chhath Puja 2025: छठ में महिलाएं क्यों लगाती हैं नाक से मांग तक नारंगी सिंदूर? जानें परंपरा और आध्यात्मिक महत्व