ट्रेड-डील के लिए 25 अगस्त को भारत आएगी अमेरिकी टीम, दोनों देशों के बीच होगी छठे राउंड की चर्चा

भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित ट्रेड डील को लेकर हलचल तेज हो गई है.

American team will come to India on August 25 for trade deal
प्रतिकात्मक तस्वीर/ ANI

नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित ट्रेड डील को लेकर हलचल तेज हो गई है. इस दिशा में अगला बड़ा कदम 25 अगस्त को उठाया जाएगा, जब अमेरिका की एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल टीम भारत पहुंचेगी. यह छठा राउंड होगा, जो द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement - BTA) की दिशा में अब तक की सबसे अहम वार्ता मानी जा रही है.

अगस्त-अक्टूबर: ट्रेड डील का 'क्रिटिकल विंडो'

यह वार्ता ऐसे वक्त में हो रही है जब दोनों देश 1 अगस्त की डेडलाइन से पहले एक अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश में लगे थे. अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए 26% रेसिप्रोकल टैरिफ का सस्पेंशन पीरियड भी इसी तारीख को खत्म हो रहा है.

अब बातचीत का फोकस सितंबर-अक्टूबर के बीच पहले चरण को पूरा करने और उस दिशा में ठोस कदम उठाने पर है, जिससे BTA को मूर्त रूप दिया जा सके.

पिछली वार्ता वॉशिंगटन में, अब बारी दिल्ली की

इससे पहले ट्रेड डील को लेकर वॉशिंगटन में राउंड-5 हुआ था. भारत के प्रमुख वार्ताकार राजेश अग्रवाल और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ब्रेंडन लिंच के बीच विस्तार से बातचीत हुई थी. अब भारत में होने वाला छठा राउंड कई उलझे मुद्दों को सुलझाने की दिशा में निर्णायक साबित हो सकता है.

कृषि और डेयरी पर भारत का स्पष्ट 'ना'

अमेरिका जहां अपने उत्पादों को भारतीय बाजार तक पहुंचाना चाहता है, वहीं भारत ने कृषि और डेयरी सेक्टर को ‘रेड लाइन’ बना दिया है. भारत का रुख साफ है—किसानों के हितों से समझौता नहीं किया जाएगा. अमेरिका जहां डेयरी, सेब, मेवे और जेनेटिकली मॉडिफाइड फसलों को डील में शामिल करना चाहता है, वहीं भारत इन मांगों को स्पष्ट रूप से खारिज कर चुका है.

भारतीय किसान संगठनों ने भी सरकार से अपील की है कि कृषि से जुड़े मुद्दों को बाहरी दबाव में आकर न छेड़ा जाए.

भारत की मांगें: श्रम-प्रधान उद्योगों को प्रोत्साहन

भारत की प्राथमिकताओं में शामिल हैं:

  • 26% रेसिप्रोकल टैरिफ से छूट
  • स्टील, एल्युमिनियम और ऑटोमोबाइल सेक्टर पर राहत
  • फैब्रिक, गारमेंट, जेम्स एंड ज्वेलरी, प्लास्टिक, केमिकल्स, और समुद्री उत्पादों (झींगा) पर अमेरिकी टैरिफ में नरमी
  • फल और खाद्य तेलों जैसे तिलहन, अंगूर और केले पर टैक्स रियायत

भारत चाहता है कि इन श्रम-प्रधान क्षेत्रों को अमेरिकी बाजार में उचित पहुंच मिले.

अमेरिका की डील की अपेक्षाएं

अमेरिका चाह रहा है कि उसे भारत में इंडस्ट्रियल गुड्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, वाइन और पेट्रोकेमिकल्स पर टैक्स में छूट मिले. इसके अलावा वह भारत से एग्रीकल्चर, डेयरी और जैविक रूप से बदली गई फसलों (GMO Crops) तक बेहतर पहुंच चाहता है.

लेकिन भारत के लिए यह संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण है- एक ओर घरेलू हित, दूसरी ओर रणनीतिक सहयोग.

द्विपक्षीय व्यापार में जबरदस्त उछाल

अप्रैल-जून 2025 की तिमाही में भारत का अमेरिका को निर्यात 22.8% बढ़ा है, जो बढ़कर 25.51 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है. यह आंकड़ा इस बात की पुष्टि करता है कि भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में अभूतपूर्व गति आई है और दोनों देश इसे अगले स्तर पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

500 बिलियन डॉलर का लक्ष्यल

भारत और अमेरिका की नजरें अब 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर 500 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने पर टिकी हैं. मौजूदा डील, जो शुरुआत में एक अंतरिम समझौता हो सकती है, इसी दिशा में पहला ठोस कदम मानी जा रही है.

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